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करोड़ों के पेंशन घोटाले में आरोपियों के घर नगर निगम में छापामारी, हड़कंप

Sat, 09 Dec 2017 01:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 09 Dec 2017 01:49 AM IST
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Criminals in Criminal Crores Criminal Procedure
ईडी ने नारंग की दो करोड़ उनतीस लाख चवालीस हजार से ज्यादा की संपत्ति एवं बैंक धनराशि को जब्त किया है।
नगर निगम में वर्ष 1986 से 1996 के बीच हुए करोड़ों के पेंशन घोटाले में मुख्य दस्तावेज गुम हो गया है। इसकी खोज लखनऊ से इलाहाबाद तक हुई और कुछ पता नहीं चला तो स्थानीय पुलिस के साथ सतर्कता अधिष्ठान के अफसरों ने शुक्रवार को नगर निगम में छापामारी की। घोटाले में बर्खास्त कर्मचारियों के घर भी खंगाले गए। इससे निगम में हड़कंप मचा रहा। अफसरों ने नगर आयुक्त से भी पूछताछ की है। गुम कागज खोजने के लिए नगर निगम का लेखा और अधिष्ठान विभाग रात भर खुला रहा। नगर आयुक्त मातहत अफसरों संग बैठक करते रहे। उन्हें मुख्य सचिव ने 11 दिसंबर को लखनऊ तलब किया है। शनिवार को नगर विकास सचिव लखनऊ में उनसे घोटाले के संबंध में वार्ता करेंगे।
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करोड़ों के पेंशन घोटाले में सतर्कता अधिष्ठान जांच कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक जिस दस्तावेज के आधार पर नगर निगम के 9 कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया। उनके खिलाफ कार्रवाई की गई, वह फाइल से गुम हो गया है। इसके लिए लखनऊ में हड़कंप मचा है। मामला मुख्य सचिव के संज्ञान में आई तो उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने 11 दिसंबर को प्रमुख सचिव गृह, नगर विकास, सतर्कता अधिष्ठान के अफसरों, नगर आयुक्त समेत अन्य अफसरों अपने कार्यालय में तलब किया है।
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हाई प्रोफाइल इस मामले में गुम दस्तावेज को खोजने के लिए स्थानीय पुलिस के साथ सतर्कता अधिष्ठान की लखनऊ से आई टीम ने नगर निगम में छापा मारा। घंटों खोजबीन के बाद वह नहीं मिला तो आरोपी कर्मचारियों के घर भी खंगाले गए। इनमें कई की मृत्यु हो चुकी है। नगर आयुक्त से भी पूछताछ की गई। रात भर इस मामले में क्रमवार ब्यौरा तैयार किया गया। जिसे नगर आयुक्त लेकर प्रमुख सचिव नगर विकास के सामने शनिवार को पेश होंगे। वहीं 11 को उन्हें मुख्य सचिव ने भी तलब किया है। सूत्रों के मुताबिक करोड़ों के इस घोटाले में कई सूत्रधारों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज को जानबूझ कर गायब किया गया है।
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घोटाले में बर्खास्त कर्मचारी

नगर निगम में हुए करोड़ों के पेंशन घोटाले में आरोपी लेखा लिपिक रामेश्वर प्रसाद मिश्रा, खंचाजी बुधल त्रिपाठी, सहालेखाकार राजकुमार माथुर, पोतदार वेद प्रकाश पांडेय, अनिल कुमार शर्मा, शंकर बाजपेयी, श्रीराम प्यारे तिवारी आदि हैं। इनमें इन सभी आरोपियों को बर्खास्त किया गया। जिसमें रामेश्वर प्रसाद मिश्रा समेत कुछ आरोपियों की मौत हो चुकी हैं। तीन पोतदार बाद में बहाल हुए जिनमें शंकर की ही सेवा बची है, अन्य सेवानिवृत्त हो गए। शुक्रवार को इन कर्मचारियों के घरों में छापामारी हुई तो हड़कंप मच गया। काफी खोजबीन के बाद भी पुलिस को सफलता नहीं मिली।
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