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आंखों में जलन, घबराहट से अफरातफरी, भगदड़
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 14 Apr 2018 01:31 AM IST
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नैनी में शंकरढाल के समीप चक रघुनाथ मोहल्ले में शुक्रवार देर रात हर तरफ शोर के बीच अफरातफरी का माहौल था। शोर मचा रहे लोग जान बचाने को इधर उधर भाग रहे थे। भगदड़ के बीच आंखों में जलन और घबराहट की शिकायत करने वालों की संख्या घड़ी की सूई के साथ बढ़ती जा रही थी। अमोनिया गैस का रिसाव मोहल्ले के एक या दो नहीं करीब डेढ़ सौ घरों तक प्रभावी रहा। रात 10 बजे के करीब बेचैनी की शिकायत करने वालों की संख्या 500 पार हो गई। देर रात वहां एक के बाद एक एंबुलेंस पहुंचने लगीं तो बेहोश लोगों को अस्पताल ले जाने की होड़ मच गई। इनकी संख्या लगभग 27 बताई गई, जिनकी स्थिति प्राथमिक उपचार के बाद सामान्य हो गई।
चक रघुनाथ मोहल्ले में अमोनिया गैस के रिसाव से पहले हुए धमाके को लोग कुछ और समझ बैठे। घरों से बाहर निकले लोग ही वातावरण में फैली अमोनिया की गंध भांपकर शोर मचाने लगे तो मोहल्लों वालों को खतरे का आभास हुआ। तब तक प्रभावित लोगों में अमोनिया गैस का प्रभाव दिखने लगा था। रात के सन्नाटे में बेचैनी से चीख रहे लोगों की आंखों में जलन के कारण पानी बह रहा था। प्रभावित लोगों को आसपास स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। इसकी बाद एंबुलेंस पहुंचती तो एक या दो नहीं आठ से दस लोग उस पर सवार होकर खुद को अस्पताल ले जाने को कहते। आसपास के अस्पतालों में ले जाए गए अधिकांश लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। नैनी के एक निजी अस्पताल में अमोनिया के प्रभाव से बेहोश हुई बच्ची सान्या की हालत गंभीर बनी है जबकि छह को होश आ गया। यहां भर्ती किए गए अधिकांश लोगों को देर रात छुट्टी दे दी गई लेकिन वे अपने घर न जाकर दूसरे मोहल्लों में परिचितों के घर रुके।
डीएम सुहास एल वाई के निर्देश पर वहां पहुंचे सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक छह फैक्ट्री कर्मियों में दो लोगों को सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं चार अन्य प्रभावित लोगों को एसआरएन अस्पताल भेजा गया है। नैनी के निजी अस्पतालों में गैस रिसाव से प्रभावित लोगों का इलाज कराने का प्रबंध कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। मौके पर चार एंबुलेंस के साथ पैरामेडिकल स्टाफ के साथ डॉक्टरों की दो टीमें मौके पर ही कैंप कर लोगों का उपचार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आक्सीजन मास्क और सिलेंडर की व्यवस्था है।
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हल्की होने के कारण अमोनिया गैस का आक्सीजन में बहुत जलती घुलना सेहत के लिए घातक होता है। अमोनिया की तेज गंध के प्रभाव में ज्यादा देर रहने वाले के चेतना शून्य होने का खतरा सौ फीसदी रहता है। गैस रिसाव से बेचैनी, घबराहट की शिकायत हो तो तुरंत स्थान बदल देना उचित होता नहीं तो जान पर बन आती है।
एमएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीबी अग्रवाल के मुताबिक अमोनिया गैस रिसाव किसी भी व्यक्ति के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। गैस की तीखी गंध सांसों से शरीर में पहुंचने की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति बेहोश होता है। समय पर इलाज का न मिले तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। उन्होंने बताया कि शुरुआती लक्षणों में आंखों मे जलन हो या सांस लेने में दिक्कत संग बेचैनी की शिकायत पर पानी का उपयोग गैस के प्रभाव को कम करता है। वहीं गैस रिसाव स्थल पर अमोनिया की गंध मिले तो जमीन पर लेटने वाले कम प्रभावित होते हैं। यह गैस आक्सीजन में घुलने के साथ ऊपर की ओर उड़ती है।
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चक रघुनाथ मोहल्ले में अमोनिया गैस के रिसाव से पहले हुए धमाके को लोग कुछ और समझ बैठे। घरों से बाहर निकले लोग ही वातावरण में फैली अमोनिया की गंध भांपकर शोर मचाने लगे तो मोहल्लों वालों को खतरे का आभास हुआ। तब तक प्रभावित लोगों में अमोनिया गैस का प्रभाव दिखने लगा था। रात के सन्नाटे में बेचैनी से चीख रहे लोगों की आंखों में जलन के कारण पानी बह रहा था। प्रभावित लोगों को आसपास स्थित निजी अस्पताल ले जाया गया। इसकी बाद एंबुलेंस पहुंचती तो एक या दो नहीं आठ से दस लोग उस पर सवार होकर खुद को अस्पताल ले जाने को कहते। आसपास के अस्पतालों में ले जाए गए अधिकांश लोगों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। नैनी के एक निजी अस्पताल में अमोनिया के प्रभाव से बेहोश हुई बच्ची सान्या की हालत गंभीर बनी है जबकि छह को होश आ गया। यहां भर्ती किए गए अधिकांश लोगों को देर रात छुट्टी दे दी गई लेकिन वे अपने घर न जाकर दूसरे मोहल्लों में परिचितों के घर रुके।
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डीएम सुहास एल वाई के निर्देश पर वहां पहुंचे सीएमओ मेजर डॉ. जीएस बाजपेयी के मुताबिक छह फैक्ट्री कर्मियों में दो लोगों को सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वहीं चार अन्य प्रभावित लोगों को एसआरएन अस्पताल भेजा गया है। नैनी के निजी अस्पतालों में गैस रिसाव से प्रभावित लोगों का इलाज कराने का प्रबंध कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है। मौके पर चार एंबुलेंस के साथ पैरामेडिकल स्टाफ के साथ डॉक्टरों की दो टीमें मौके पर ही कैंप कर लोगों का उपचार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि आक्सीजन मास्क और सिलेंडर की व्यवस्था है।
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हल्की होने के कारण अमोनिया गैस का आक्सीजन में बहुत जलती घुलना सेहत के लिए घातक होता है। अमोनिया की तेज गंध के प्रभाव में ज्यादा देर रहने वाले के चेतना शून्य होने का खतरा सौ फीसदी रहता है। गैस रिसाव से बेचैनी, घबराहट की शिकायत हो तो तुरंत स्थान बदल देना उचित होता नहीं तो जान पर बन आती है।
एमएमए के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीबी अग्रवाल के मुताबिक अमोनिया गैस रिसाव किसी भी व्यक्ति के शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है। गैस की तीखी गंध सांसों से शरीर में पहुंचने की स्थिति में प्रभावित व्यक्ति बेहोश होता है। समय पर इलाज का न मिले तो यह स्थिति जानलेवा हो सकती है। उन्होंने बताया कि शुरुआती लक्षणों में आंखों मे जलन हो या सांस लेने में दिक्कत संग बेचैनी की शिकायत पर पानी का उपयोग गैस के प्रभाव को कम करता है। वहीं गैस रिसाव स्थल पर अमोनिया की गंध मिले तो जमीन पर लेटने वाले कम प्रभावित होते हैं। यह गैस आक्सीजन में घुलने के साथ ऊपर की ओर उड़ती है।