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तमाम दुश्मनों में आखिर कातिल कौन?
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
Updated Fri, 13 Jan 2017 01:50 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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प्रदेश भर में चर्चित डॉ. अश्विनी कुमार बंसल हत्याकांड का कत्ल किसने कराया और क्यों? यह सवाल बृहस्पतिवार आधी रात तक अनसुलझा रहा। स्पेशल टॉस्क फोर्स और क्राइम ब्रांच की टीम कई पहलुओं पर छानबीन कर रही है। डॉ.बंसल के हालिया विवादों को ध्यान में रखते हुए उनके दुश्मनों की टोह ली जा रही। पुलिस ने इलाहाबाद और आसपास के जिलों के कई पेशेवर शूटरों की लोकेशन पता की। कई संदिग्ध मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लगाकर निगरानी हो रही है।
पुलिस पर डॉ.बंसल के कातिलों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का भारी दबाव है। डॉक्टरों ने हड़ताल का एलान किया तो कारोबारियों ने भी बंदी की चेतावनी दी है। भाजपा समेत विरोधी दलों ने भी धरना-प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। शासन से भी संदेश अफसरों को संदेश मिला है कि घटना का खुलासा करने में पूरा जोर लगा दिया जाए ताकि कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं खड़ी हो सके।
यही वजह है कि आईजी जोन डॉ.केएस प्रताप कुमार, डीआईजी विजय यादव, एसएसपी शलभ माथुर आधी रात तक जांच कर रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के साथ मंथन करते रहे। तीनों अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तथा चश्मदीद कर्मचारियों से बात की। इसके साथ ही पुलिस ने हत्याकांड के अलग-अलग पहलुओं पर जांच शुरू की। डॉ.बंसल के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने यमुनापार में कई सौ बीघा जमीन खरीदी थी। जमीनों की खरीदारी को लेकर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। इसके अलावा कुछ व्यापारियों से भी विवाद था।
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लखनऊ के सीतापुर में महर्षि चिकित्सा विश्वविद्यालय में भी कुछ लोगों ने उनका कई करोड़ रुपये का विवाद बना था। डॉ.बंसल ने कुछ लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा भी सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराया था। पिछले साल पांच सितंबर की रात जार्जटाउन इलाके में अमरनाथ झा मार्ग स्थित निवास के करीब डॉ.बंसल की गाड़ी पर फायरिंग और बमबाजी की गई थी। उस घटना में बिल्डर संजीव अग्रवाल समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।
विवाद की जड़ में थी डॉक्टर के निवास से सटी जमीन, जिस पर बिल्डर ने अपार्टमेंट बनाया है। बाद में उसी अपार्टमेंट के पीछे थैले में बम मिलने पर भी डॉ.बंसल की ओर से केस दर्ज कराया गया था। हालांकि उन दोनों मुकदमे में पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। चर्चा है कि हाल ही में डॉ.बंसल का कुछ लोगों से एक और विवाद बन गया था। आईजी जोन का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि किसी गिरोह ने रंगदारी नहीं मिलने पर तो ऐसा नहीं किया।
डॉ.बंसल हत्याकांड की तहकीकात कर रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच इस ब्लाइंड मर्डर में रात एक बजे तक कोई क्लू नहीं खोज सकी थी। सिर्फ सीसीटीवी फुटेज हैं, जिसमें संदिग्ध शूटर भागते दिखे हैं मगर हुलिया नहीं नजर आया। ऐसे में जांच टीम ने जेल में बंद कई कुख्यात अपराधियों से सुराग मिलने की कोशिश शुरू की है। जेल में सक्रिय करीब एक दर्जन मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाया गया है। पहले भी कई बार वारदातों के सुराग पुलिस को जेल से ही मिले थे।
डॉ.एके बंसल के साथ ही उनकी पत्नी डॉ.वंदना बंसल कई हॉस्पिटल का संचालन करती हैं। जीवन ज्योति हॉस्पिटल के अलावा सिविल लाइंस में वंदना वूमेंस हॉस्पिटल और नैनी में भी क्लीनिक तथा नर्सिंग कॉलेज है। ऐसे में यह डॉक्टर दंपति और उनका परिवार अपराधी गिरोहों के निशाने पर रहा है। कई बार डॉ.बंसल को धमकी मिल चुकी थी। करीब आठ साल पहले बदमाशों ने उनके बेटे अर्पित के ट्रैफिक लाइन चौराहे के निकट कोचिंग के पास अपहरण की साजिश रची थी। हालांकि क्राइम ब्रांच ने सर्विलांस के जरिए भनक लगने पर पांच अपराधियों को गिरफ्तार कर साजिश बेनकाब कर दी थी। डॉ.बंसल के दो बेटे हैं अर्पित और हर्षित। दोनों डॉक्टर हैं। बताया गया कि बृहस्पतिवार को वे दोनों इलाहाबाद में ही थे। इस घटना से डॉ.वंदना और दोनों बेटों समेत रिश्तेदार मातम में डूबे हैं।
घटना के बाद जांच में जुटी पुलिस के सामने एक नाम उस बदमाश राजा पांडेय का आया, जिस पर बारा के थानेदार राजेंद्र द्विवेदी के कत्ल का आरोप है। उसे तीन महीने पहले गोली मार दी गई थी। उसका इलाज एसआरएन अस्पताल में चल रहा है। उस पर चार महीने पहले करछना पुलिस पर जानलेवा हमले का केस दर्ज है इसलिए वह इलाज के दौरान कस्टडी में भी है। कुछ दिन पहले उसका इलाज जीवन ज्योति अस्पताल में भी हुआ था। चर्चा रही कि उसने डॉक्टर को धमकाया था लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गोली से घायल राजा की जान तो डॉ.बंसल ने ही बचाई तो भला वह क्यों ऐसा करेगा।
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पुलिस पर डॉ.बंसल के कातिलों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का भारी दबाव है। डॉक्टरों ने हड़ताल का एलान किया तो कारोबारियों ने भी बंदी की चेतावनी दी है। भाजपा समेत विरोधी दलों ने भी धरना-प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। शासन से भी संदेश अफसरों को संदेश मिला है कि घटना का खुलासा करने में पूरा जोर लगा दिया जाए ताकि कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं खड़ी हो सके।
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यही वजह है कि आईजी जोन डॉ.केएस प्रताप कुमार, डीआईजी विजय यादव, एसएसपी शलभ माथुर आधी रात तक जांच कर रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच के साथ मंथन करते रहे। तीनों अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी तथा चश्मदीद कर्मचारियों से बात की। इसके साथ ही पुलिस ने हत्याकांड के अलग-अलग पहलुओं पर जांच शुरू की। डॉ.बंसल के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने यमुनापार में कई सौ बीघा जमीन खरीदी थी। जमीनों की खरीदारी को लेकर उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। इसके अलावा कुछ व्यापारियों से भी विवाद था।
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लखनऊ के सीतापुर में महर्षि चिकित्सा विश्वविद्यालय में भी कुछ लोगों ने उनका कई करोड़ रुपये का विवाद बना था। डॉ.बंसल ने कुछ लोगों पर धोखाधड़ी का मुकदमा भी सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराया था। पिछले साल पांच सितंबर की रात जार्जटाउन इलाके में अमरनाथ झा मार्ग स्थित निवास के करीब डॉ.बंसल की गाड़ी पर फायरिंग और बमबाजी की गई थी। उस घटना में बिल्डर संजीव अग्रवाल समेत चार लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था।
विवाद की जड़ में थी डॉक्टर के निवास से सटी जमीन, जिस पर बिल्डर ने अपार्टमेंट बनाया है। बाद में उसी अपार्टमेंट के पीछे थैले में बम मिलने पर भी डॉ.बंसल की ओर से केस दर्ज कराया गया था। हालांकि उन दोनों मुकदमे में पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी थी। चर्चा है कि हाल ही में डॉ.बंसल का कुछ लोगों से एक और विवाद बन गया था। आईजी जोन का कहना है कि सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि किसी गिरोह ने रंगदारी नहीं मिलने पर तो ऐसा नहीं किया।
डॉ.बंसल हत्याकांड की तहकीकात कर रही एसटीएफ और क्राइम ब्रांच इस ब्लाइंड मर्डर में रात एक बजे तक कोई क्लू नहीं खोज सकी थी। सिर्फ सीसीटीवी फुटेज हैं, जिसमें संदिग्ध शूटर भागते दिखे हैं मगर हुलिया नहीं नजर आया। ऐसे में जांच टीम ने जेल में बंद कई कुख्यात अपराधियों से सुराग मिलने की कोशिश शुरू की है। जेल में सक्रिय करीब एक दर्जन मोबाइल फोन को सर्विलांस पर लगाया गया है। पहले भी कई बार वारदातों के सुराग पुलिस को जेल से ही मिले थे।
डॉ.एके बंसल के साथ ही उनकी पत्नी डॉ.वंदना बंसल कई हॉस्पिटल का संचालन करती हैं। जीवन ज्योति हॉस्पिटल के अलावा सिविल लाइंस में वंदना वूमेंस हॉस्पिटल और नैनी में भी क्लीनिक तथा नर्सिंग कॉलेज है। ऐसे में यह डॉक्टर दंपति और उनका परिवार अपराधी गिरोहों के निशाने पर रहा है। कई बार डॉ.बंसल को धमकी मिल चुकी थी। करीब आठ साल पहले बदमाशों ने उनके बेटे अर्पित के ट्रैफिक लाइन चौराहे के निकट कोचिंग के पास अपहरण की साजिश रची थी। हालांकि क्राइम ब्रांच ने सर्विलांस के जरिए भनक लगने पर पांच अपराधियों को गिरफ्तार कर साजिश बेनकाब कर दी थी। डॉ.बंसल के दो बेटे हैं अर्पित और हर्षित। दोनों डॉक्टर हैं। बताया गया कि बृहस्पतिवार को वे दोनों इलाहाबाद में ही थे। इस घटना से डॉ.वंदना और दोनों बेटों समेत रिश्तेदार मातम में डूबे हैं।
घटना के बाद जांच में जुटी पुलिस के सामने एक नाम उस बदमाश राजा पांडेय का आया, जिस पर बारा के थानेदार राजेंद्र द्विवेदी के कत्ल का आरोप है। उसे तीन महीने पहले गोली मार दी गई थी। उसका इलाज एसआरएन अस्पताल में चल रहा है। उस पर चार महीने पहले करछना पुलिस पर जानलेवा हमले का केस दर्ज है इसलिए वह इलाज के दौरान कस्टडी में भी है। कुछ दिन पहले उसका इलाज जीवन ज्योति अस्पताल में भी हुआ था। चर्चा रही कि उसने डॉक्टर को धमकाया था लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गोली से घायल राजा की जान तो डॉ.बंसल ने ही बचाई तो भला वह क्यों ऐसा करेगा।