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बीए के छात्र ने खुद को गोली से उड़ाया
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 06 Nov 2015 02:30 AM IST
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इलाहाबाद। शहर के धूमनगंज इलाके में बृहस्पतिवार दोपहर बीए द्वितीय वर्ष के छात्र सुधीर तिवारी (22) ने गोली मारकर आत्महत्या कर ली। फायरिंग की आवाज सुनकर परिजनों ने खिड़की से झांककर देखा तो फर्श पर सुधीर का खून से लथपथ शव पड़ा था। फायरिंग और रोने की आवाज सुनकर पड़ोसी जुट गए। पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़ा और घटना की जानकारी ुधूमनगंज पुलिस को दी गई। पुलिस ने कमरे से तमंचा और खोखा बरामद कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सधीर की मौत से घर में कोहराम मचा हुआ है।
प्रतापगढ़ में बाघराय निवासी कृष्णकांत तिवारी रिटायर फौजी हैं। वह गाजियाबाद के एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। उनका परिवार धूमनगंज के महेंद्र नगर कॉलोनी में रहता है। कृष्णकांत दूध का कारोबार करते हैं। घर के बगल ही उनकी दूध की डेरी है। यहां पत्नी माया दो बेटों सोनू और सुधीर तिवारी और बहू के साथ रहती हैं। छोटा बेटा सुधीर तिवारी झलवा के एक प्राइवेट डिग्री कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर का छात्र था। बड़ा बेटा सोनू विवाहित है। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ डेरी का कारोबार संभालता है।
बृहस्पतिवार दोपहर सोनू सब्जी लेने ट्रांसपोर्टनगर गया था। घर में माया उनकी बहू और छोटा बेटा सुधीर तिवारी थे। लगभग डेढ़ बजे सुधीर अपने कमरे में गया। कुंडी अंदर से बंद कर ली। कुछ देर बाद सुधीर के कमरे से गोली की आवाज सुनकर मां और भाभी भागकर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से कमरे के अंदर का नजारा देखकर वे चीख पड़ी। पड़ोसियों ने आकर दरवाजा तोड़ा। कमरे में फर्श पर सुधीर का खून से लथपथ शव और वहीं एक तमंचा पड़ा था। खबर पाकर सोनू भी आ गया।
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कुछ देर में धूमनगंज पुलिस पहुंची और तमंचा कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सुधीर की मौत से घरवाले गम में डूबे है। मां माया तो रोते-रोेते बेसुध हैं। वहीं बेटे के मौत की जानकारी होने पर गाजियाबाद से कृष्णकांत भी चल चुके हैं। इंस्पेक्टर धूमनगंज महेंद्र सिंह देव के मुताबिक सुधीर मानसिक अवसाद से पीड़ित था। परिजनों से बातचीत में यह पता चला कि उसका लंबे समय से इलाज चल रहा था। कमरे से दवाईयां भी मिली हैं।
बीए सेकेंड ईयर के छात्र सुधीर तिवारी की खुदकु शी में एक बड़ा सवाल यह है कि उसके पास तमंचा कहां से आया। चौकी प्रभारी राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि घरवाले तमंचा के बारे में कुछ नहीं बता पाए। आशंका है कि सुधीर ने अपने किसी दोस्त या मोहल्ले के अराजक तत्व से तमंचा लिए रहा हो।
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प्रतापगढ़ में बाघराय निवासी कृष्णकांत तिवारी रिटायर फौजी हैं। वह गाजियाबाद के एक कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। उनका परिवार धूमनगंज के महेंद्र नगर कॉलोनी में रहता है। कृष्णकांत दूध का कारोबार करते हैं। घर के बगल ही उनकी दूध की डेरी है। यहां पत्नी माया दो बेटों सोनू और सुधीर तिवारी और बहू के साथ रहती हैं। छोटा बेटा सुधीर तिवारी झलवा के एक प्राइवेट डिग्री कॉलेज में बीए सेकेंड ईयर का छात्र था। बड़ा बेटा सोनू विवाहित है। वह प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ डेरी का कारोबार संभालता है।
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बृहस्पतिवार दोपहर सोनू सब्जी लेने ट्रांसपोर्टनगर गया था। घर में माया उनकी बहू और छोटा बेटा सुधीर तिवारी थे। लगभग डेढ़ बजे सुधीर अपने कमरे में गया। कुंडी अंदर से बंद कर ली। कुछ देर बाद सुधीर के कमरे से गोली की आवाज सुनकर मां और भाभी भागकर पहुंची। दरवाजा अंदर से बंद था। खिड़की से कमरे के अंदर का नजारा देखकर वे चीख पड़ी। पड़ोसियों ने आकर दरवाजा तोड़ा। कमरे में फर्श पर सुधीर का खून से लथपथ शव और वहीं एक तमंचा पड़ा था। खबर पाकर सोनू भी आ गया।
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कुछ देर में धूमनगंज पुलिस पहुंची और तमंचा कब्जे में लेकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। सुधीर की मौत से घरवाले गम में डूबे है। मां माया तो रोते-रोेते बेसुध हैं। वहीं बेटे के मौत की जानकारी होने पर गाजियाबाद से कृष्णकांत भी चल चुके हैं। इंस्पेक्टर धूमनगंज महेंद्र सिंह देव के मुताबिक सुधीर मानसिक अवसाद से पीड़ित था। परिजनों से बातचीत में यह पता चला कि उसका लंबे समय से इलाज चल रहा था। कमरे से दवाईयां भी मिली हैं।
बीए सेकेंड ईयर के छात्र सुधीर तिवारी की खुदकु शी में एक बड़ा सवाल यह है कि उसके पास तमंचा कहां से आया। चौकी प्रभारी राकेश कुमार तिवारी ने बताया कि घरवाले तमंचा के बारे में कुछ नहीं बता पाए। आशंका है कि सुधीर ने अपने किसी दोस्त या मोहल्ले के अराजक तत्व से तमंचा लिए रहा हो।