{"_id":"58a2057f4f1c1ba340d84433","slug":"atiq-shiats","type":"story","status":"publish","title_hn":"शियाट्स मामले में बदल सकता है जांच अधिकारी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
शियाट्स मामले में बदल सकता है जांच अधिकारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 15 Feb 2017 04:54 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनी स्थित शियाट्स के परिसर में घुसकर मारपीट और तोड़फोड़ करने के मामले में हाईकोर्ट पुलिस की विवेचना के तरीके से नाराज है। कोर्ट ने मौजूदा जांच अधिकारी की भूमिका पर नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई पर डीजीपी से एक योग्य अधिकारी का नाम बताने के लिए कहा है जिसे जांच सौंपी जा सके। अगली सुनवाई पर इस मामले के सभी आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री। उन पर दर्ज मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है। मामले पर 15 फरवरी को सुनवाई होगी।
शियाट्स के प्राक्टर रामकिशन सिंह ने सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए शियाट्स की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी द्वारा अभियुक्तों को भेजे गए नोटिस के बाबत भी जवाब मांगा है। पूछा है कि पुलिस द्वारा अभियुक्तों को नोटिस भेजे जाने का क्या तरीका है। क्या नोटिस धारा 161 सीआरपीसी के तहत दी गई है।
सुनवाई के दौरान अतीक की ओर से अधिवक्ता ने अर्जी देकर कहा कि अतीक अहमद अदालत में स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं। पीठ ने इस पर अर्जी पर संज्ञान लेने से इंकार कर दिया। पीठ ने कहा कि अगली तारीख पर यदि अधिवक्ता के जरिए कोई अर्जी आती है तो अदालत उस पर विचार करेगी। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में दो अभियुक्तोें को गिरफ्तार किया गया है। चूंकि सभी धाराएं सात वर्ष से कम अपराध वाली हैं इसलिए शेष अभियुक्तों को नोटिस भेजा गया है गिरफ्तारी नहीं की गई।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के कड़े रुख के कारण ही अतीक अहमद ने दो दिन पूर्व स्वयं थाने पर उपस्थित होकर गिरफ्तारी दी। इस समय वह नैनी जेल में बंद हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी।
विज्ञापन
शियाट्स के प्राक्टर रामकिशन सिंह ने सुरक्षा की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए शियाट्स की घटना पर स्वत: संज्ञान लिया। कोर्ट ने जांच अधिकारी द्वारा अभियुक्तों को भेजे गए नोटिस के बाबत भी जवाब मांगा है। पूछा है कि पुलिस द्वारा अभियुक्तों को नोटिस भेजे जाने का क्या तरीका है। क्या नोटिस धारा 161 सीआरपीसी के तहत दी गई है।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान अतीक की ओर से अधिवक्ता ने अर्जी देकर कहा कि अतीक अहमद अदालत में स्वयं उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना चाहते हैं। पीठ ने इस पर अर्जी पर संज्ञान लेने से इंकार कर दिया। पीठ ने कहा कि अगली तारीख पर यदि अधिवक्ता के जरिए कोई अर्जी आती है तो अदालत उस पर विचार करेगी। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि इस मामले में दो अभियुक्तोें को गिरफ्तार किया गया है। चूंकि सभी धाराएं सात वर्ष से कम अपराध वाली हैं इसलिए शेष अभियुक्तों को नोटिस भेजा गया है गिरफ्तारी नहीं की गई।
विज्ञापन
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के कड़े रुख के कारण ही अतीक अहमद ने दो दिन पूर्व स्वयं थाने पर उपस्थित होकर गिरफ्तारी दी। इस समय वह नैनी जेल में बंद हैं। इस मामले पर अगली सुनवाई 15 फरवरी को होगी।