अतीक के खिलाफ शिकायत में नहीं लिखा गया मुकदमा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरवारा धूमनगंज में रहने वाला प्रापर्टी डीलर अशरफ सिलना के ग्राम प्रधान गुलफुल का दामाद है। गुलफुल पूर्व सांसद अतीक का करीबी है और उनके साथ कई आपराधिक मुकदमों में आरोपी भी। अशरफ ने बृहस्पतिवार दोपहर सदर तहसील के भीतर से 100 नंबर पर फोन से बताया कि वह तारीख पर आया था तभी तहसील के बाहर प्रीतम नगर के कुद्दूस और राजेश सिंह समेत कई लोगों ने गाड़ी में खींचकर उसका अपहरण करने की कोशिश की। उससे कहा गया कि वह अतीक अहमद से फोन पर बात कर ले मगर उसने इनकार कर दिया तो उस पर असलहा तान दिया गया।
पुलिस के पहुंचने तक हमलावर फरार हो गए थे। अशरफ ने थाने जाकर दी तहरीर में यह भी लिखा कि कुछ दिन पहले अतीक अहमद ने उसे फोन पर धमकी दी थी कि कुद्दूस से दूर रहो। अब अतीक के ही इशारे पर उनके आदमी हत्या की नीयत से आए थे। बृहस्पतिवार दोपहर दी गई तहरीर पर पुलिस ने शुक्रवार रात तक कार्रवाई नहीं की। इस बाबत सीओ कर्नलगंज दुर्गा प्रसाद तिवारी ने कहा कि शिकायत नहीं मिली तो क्या किया जाए जबकि अशरफ का कहना था कि वह थाने में इंस्पेक्टर से मिलकर आया था। ऐसे में साफ है कि पुलिस दबाव में केस नहीं लिखना चाह रही।
पिछले तीन महीने के दौरान पूर्व सांसद अतीक अहमद के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। तीसरी शिकायत बृहस्पतिवार को कर्नलगंज थाने में की गई जिसे पुलिस ने दबा लिया। इससे पहले राजू पाल हत्याकांड के गवाह उमेश पाल को अदालत परिसर में धमकाने के मामले में कर्नलगंज थाने में अतीक अहमद समेत कई लोगों पर केस लिखा गया था। मगर कुछ नहीं हुआ। उसी दौरान बीस मार्च की सुबह झलवा में इंडियन आॉयल गेट के पास सूरजकली और उनके बेटे नरेंद्र को गोली मारने की घटना में भी अतीक और उनके करीबी कपिलदेव त्रिपाठी पर धूमनगंज थाने में केस लिखा गया था लेकिन उस मामले में भी पुलिस ने विवेचना में अतीक अहमद को क्लीन चिट दे दी।