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अब अशरफ की जमानत निरस्त कराने की तैयारी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 02 Jun 2017 01:56 AM IST
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atiq ahmed
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राजूपाल हत्याकांड में पूर्व सांसद अतीक अहमद की जमानत हाईकोर्ट से रद्द होने के बाद अब उनके छोटे भाई और पूर्व विधायक अशरफ की जमानत भी निरस्त कराने की तैयारी है। मृतक राजूपाल की पत्नी पूजा पाल ने अशरफ की जमानत रद्द करने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की है। अर्जी पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विपिन सिन्हा ने अशरफ को नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। मामले की अगली सुनवाई चार जुलाई को होगी।
अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि राजूपाल की हत्या में अशरफ भी शामिल रहा है। वह अतीक के साथ अन्य अपराधों में बराबरी का भागीदारी है। राजूपाल की हत्या वाले दिन वह घटनास्थल पर मौजूद था। अशरफ को हाईकोर्ट से 2006 में जमानत मिल गई थी। इसके बाद उसने जमानत शर्तों का उल्लंघन करते हुए गवाहों के अपहरण और साक्ष्यों को नष्ट करने में अतीक अहमद को बराबरी का सहयोग दिया। जमानत मिलने के बाद भी अशरफ पर कई आपराधिक वारदातों में शामिल होने के मुकदमे दर्ज हैं। वह अतीक के साथ तमाम मुकदमों में सहअभियुक्त है। उसके जेल से बाहर रहने पर याची की जान को खतरा है। पूजा पाल की ओर से अधिवक्ता मिथलेश तिवारी तथा प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोदकांत, एजीए विमलेंदु त्रिपाठी और अशरफ की ओर से अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी ने पक्ष रखा।
उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व बुधवार को हाईकोर्ट ने राजूपाल हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद अतीक की जमानत निरस्त कर दी है। कोर्ट ने जमानत निरस्त करते समय यह माना कि अतीक के लंबे आपराधिक इतिहास और जमानत पर रहने के दौरान भी किए गए अपराधों को देखते हुए उनको जेल से बाहर रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने अतीक को जमानत देने के पूर्व के आदेश को सही नहीं माना और कहा कि जमानत आदेश देते समय अभियुक्त के आपराधिक इतिहास पर ध्यान नहीं दिया गया।
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अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि राजूपाल की हत्या में अशरफ भी शामिल रहा है। वह अतीक के साथ अन्य अपराधों में बराबरी का भागीदारी है। राजूपाल की हत्या वाले दिन वह घटनास्थल पर मौजूद था। अशरफ को हाईकोर्ट से 2006 में जमानत मिल गई थी। इसके बाद उसने जमानत शर्तों का उल्लंघन करते हुए गवाहों के अपहरण और साक्ष्यों को नष्ट करने में अतीक अहमद को बराबरी का सहयोग दिया। जमानत मिलने के बाद भी अशरफ पर कई आपराधिक वारदातों में शामिल होने के मुकदमे दर्ज हैं। वह अतीक के साथ तमाम मुकदमों में सहअभियुक्त है। उसके जेल से बाहर रहने पर याची की जान को खतरा है। पूजा पाल की ओर से अधिवक्ता मिथलेश तिवारी तथा प्रदेश सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता विनोदकांत, एजीए विमलेंदु त्रिपाठी और अशरफ की ओर से अधिवक्ता सतीश त्रिवेदी ने पक्ष रखा।
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उल्लेखनीय है कि एक दिन पूर्व बुधवार को हाईकोर्ट ने राजूपाल हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद अतीक की जमानत निरस्त कर दी है। कोर्ट ने जमानत निरस्त करते समय यह माना कि अतीक के लंबे आपराधिक इतिहास और जमानत पर रहने के दौरान भी किए गए अपराधों को देखते हुए उनको जेल से बाहर रखना उचित नहीं है। कोर्ट ने अतीक को जमानत देने के पूर्व के आदेश को सही नहीं माना और कहा कि जमानत आदेश देते समय अभियुक्त के आपराधिक इतिहास पर ध्यान नहीं दिया गया।
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