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तीन सुपारी किलर हत्थे चढ़े
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 01 Apr 2016 01:43 AM IST
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शार्प शूटर
- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
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तकरीबन तीन महीने पहले सोरांव इलाके में घर के भीतर घुसकर सीआरपीएफ के रिटायर्ड सिपाही को गोलियों से छलनी करने वाले तीन शूटरों को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया है। वह लगभग साल भर हुए पहले अपने बेटे की हत्या की वारदात में गवाह था। नैनी जेल में बंद एक आरोपी को पैरवी और गवाही से कत्ल में सजा होने का खतरा सता रहा था, इसलिए उसने दो लाख रुपये में बदमाशों को कत्ल का ठेका दे दिया।
थरवई में उत्तम गिरी का चकिया गांव निवासी जबर सिंह यादव के बड़ बेटे कप्तान उर्फ मुन्ना (32) की 26 दिसंबर 2014 को हत्या कर दी गई थी। वह पिता जबर के साथ बाइक पर घर लौट रहा था तभी उसे गोली मारी गई थी। उस घटना में जबर ने अपने छोटे बेटे कुलदीप, भाई जय सिंह और भतीजे मंजीत के खिलाफ केस लिखाया था। घटना में मंजीत जेल में है। कत्ल के बाद जान पर खतरे को देखते हुए जबर सिंह अपनी विधवा बहू और उसके पांच बच्चों के साथ सोरांव में उसके मायके करौंदी गांव में मकान बनाकर रहने लगा था।
वह बेटे के कत्ल में चश्मदीद गवाह था। लगातार मजबूती से पैरवी भी कर रहा था। आठ जनवरी को उसे अदालत में गवाही देनी थी। मगर एक रोज पहले ही घर के भीतर घुसकर बदमाशों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया। फिर बदमाश फायरिंग करते भाग गए थे। बेटे के कत्ल के गवाह जबर सिंह की हत्या में उसके भाई और भतीजे पर ही आरोप लगाया गया था। पुलिस तब से जांच कर रही थी। एसएसपी केएस इमेनुएल ने बताया कि बुधवार रात क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय ने मुखबिर की सूचना पर सोरांव पुलिस के साथ लूसनपुर हाईवे पुलिया के पास स्कूटी सवार तीन बदमाशों को घेरा तो वे फायरिंग करने लगे।
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किसी तरह उन्हें दबोच लिया गया। उनके कब्जे से तीन तमंचे और कारतूस बरामद हुए। पकड़े गए बदमाशों में शिवकुटी में लाला की सरैया मोहल्ले का राजेश उर्फ माइकल तथा अरुण वर्मा और कर्नलगंज में ऊंटखाना का आकाश पासी है। पूछताछ में उन तीनों ने जबर सिंह के कत्ल का जुर्म कुबूल लिया। एसएसपी ने क्राइम ब्रांच प्रभारी के साथ उपनिरीक्षक वीरबहादुर सिंह, जीतेंद्र पाल सिंह, अवधेंद्र तिवारी, पवन सिंह, अभय सिंह, गुलाम साबिर, विनय राय, नवीन राय, इंद्रप्रताप सिंह, संतोष सिंह यादव, संजय सिंह, राजेश कुमार आदि को शाबासी देते हुए पुरस्कार की घोषणा की।
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थरवई में उत्तम गिरी का चकिया गांव निवासी जबर सिंह यादव के बड़ बेटे कप्तान उर्फ मुन्ना (32) की 26 दिसंबर 2014 को हत्या कर दी गई थी। वह पिता जबर के साथ बाइक पर घर लौट रहा था तभी उसे गोली मारी गई थी। उस घटना में जबर ने अपने छोटे बेटे कुलदीप, भाई जय सिंह और भतीजे मंजीत के खिलाफ केस लिखाया था। घटना में मंजीत जेल में है। कत्ल के बाद जान पर खतरे को देखते हुए जबर सिंह अपनी विधवा बहू और उसके पांच बच्चों के साथ सोरांव में उसके मायके करौंदी गांव में मकान बनाकर रहने लगा था।
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वह बेटे के कत्ल में चश्मदीद गवाह था। लगातार मजबूती से पैरवी भी कर रहा था। आठ जनवरी को उसे अदालत में गवाही देनी थी। मगर एक रोज पहले ही घर के भीतर घुसकर बदमाशों ने उसे गोलियों से छलनी कर दिया। फिर बदमाश फायरिंग करते भाग गए थे। बेटे के कत्ल के गवाह जबर सिंह की हत्या में उसके भाई और भतीजे पर ही आरोप लगाया गया था। पुलिस तब से जांच कर रही थी। एसएसपी केएस इमेनुएल ने बताया कि बुधवार रात क्राइम ब्रांच प्रभारी जेपी राय ने मुखबिर की सूचना पर सोरांव पुलिस के साथ लूसनपुर हाईवे पुलिया के पास स्कूटी सवार तीन बदमाशों को घेरा तो वे फायरिंग करने लगे।
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किसी तरह उन्हें दबोच लिया गया। उनके कब्जे से तीन तमंचे और कारतूस बरामद हुए। पकड़े गए बदमाशों में शिवकुटी में लाला की सरैया मोहल्ले का राजेश उर्फ माइकल तथा अरुण वर्मा और कर्नलगंज में ऊंटखाना का आकाश पासी है। पूछताछ में उन तीनों ने जबर सिंह के कत्ल का जुर्म कुबूल लिया। एसएसपी ने क्राइम ब्रांच प्रभारी के साथ उपनिरीक्षक वीरबहादुर सिंह, जीतेंद्र पाल सिंह, अवधेंद्र तिवारी, पवन सिंह, अभय सिंह, गुलाम साबिर, विनय राय, नवीन राय, इंद्रप्रताप सिंह, संतोष सिंह यादव, संजय सिंह, राजेश कुमार आदि को शाबासी देते हुए पुरस्कार की घोषणा की।
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