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परी अखाड़ा परिसर से महिला का अपहरण
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 16 Feb 2016 12:55 AM IST
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अरैल स्थित परी अखाड़ा परिसर से सोमवार रात एक महिला शिष्या का अपहरण हो गया। महिला अखाड़ा के मंदिर के सामने थी तभी कुछ लोगों ने उसे अचानक आकर पकड़ा और खींचकर बोलेरो में उठा ले गए। शोर मचा तो लोगों ने बोलेरो का पीछा किया लेकिन उसे रोका नहीं जा सका। अखाड़ा की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने नैनी थाने में शिकायत की लेकिन पारिवारिक मसला होने के कारण पुलिस ने कुछ किया ही नहीं।
परी अखाड़ा की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने बताया कि तीन महीने पहले वर्षा नामक इस 26 वर्षीय महिला को उसकी दो बहन अशोक और गुड़िया ही आकर छोड़ गई थीं। वह कोरांव की रहने वाली है। बहनों ने बताया कि वर्षा का ब्याह मिर्जापुर के गैपुरा खमरिया में फल विक्रेता रामपाल पटेल से किया गया था। उसके दो बच्चे हुए। मगर ससुराल में वर्षा को बेहद यातना दी गई। देवर गौरी पटेल ने भी उसे इस कदर पीटा कि वह जख्मी हो गई। उसकी आंखों के पास भी चोट थी। उत्पीड़न से त्रस्त होकर वह मायके आ गई थी।
वहीं से बहनों ने उसे महिला अखाड़ा पहुंचा दिया। दीक्षा के बाद उसका नाम लक्ष्मी रखा गया था। अखाड़ा प्रमुख के मुताबिक, लक्ष्मी यहां खुद और मायके वालों की राजी-खुशी से थी। फिर जाने क्या हुआ कि सोमवार रात करीब साढ़े सात बजे लक्ष्मी मंदिर के पास खड़ी थी तभी कुछ लोगों ने एकाएक उसे पकड़ा और कुछ दूर पर खड़ी बोलेरो में खींच ले गए। अखाड़ा में मौजूद लोगों के हरकत में आने तक में बोलेरो आगे बढ़ गई। लक्ष्मी को खींचने वालों में उसकी बहन, भाभी समेत कई पुरुष थे।
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परी अखाड़ा की प्रमुख त्रिकाल भवंता ने बताया कि तीन महीने पहले वर्षा नामक इस 26 वर्षीय महिला को उसकी दो बहन अशोक और गुड़िया ही आकर छोड़ गई थीं। वह कोरांव की रहने वाली है। बहनों ने बताया कि वर्षा का ब्याह मिर्जापुर के गैपुरा खमरिया में फल विक्रेता रामपाल पटेल से किया गया था। उसके दो बच्चे हुए। मगर ससुराल में वर्षा को बेहद यातना दी गई। देवर गौरी पटेल ने भी उसे इस कदर पीटा कि वह जख्मी हो गई। उसकी आंखों के पास भी चोट थी। उत्पीड़न से त्रस्त होकर वह मायके आ गई थी।
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वहीं से बहनों ने उसे महिला अखाड़ा पहुंचा दिया। दीक्षा के बाद उसका नाम लक्ष्मी रखा गया था। अखाड़ा प्रमुख के मुताबिक, लक्ष्मी यहां खुद और मायके वालों की राजी-खुशी से थी। फिर जाने क्या हुआ कि सोमवार रात करीब साढ़े सात बजे लक्ष्मी मंदिर के पास खड़ी थी तभी कुछ लोगों ने एकाएक उसे पकड़ा और कुछ दूर पर खड़ी बोलेरो में खींच ले गए। अखाड़ा में मौजूद लोगों के हरकत में आने तक में बोलेरो आगे बढ़ गई। लक्ष्मी को खींचने वालों में उसकी बहन, भाभी समेत कई पुरुष थे।
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