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उपनिदेशक उद्यान को चेक क्लोनिंग के जरिए लगाया 29 लाख का चूना
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 21 Jan 2018 01:50 AM IST
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इलाहाबाद में तैनात उपनिदेशक उद्यान को चेक क्लोनिंग केजरिए साइबर ठगों ने 29 लाख का चूना लगा दिया। उनकेबैंक ऑफ बड़ौदा स्थित खाते से ठगों ने तीन बार में कुल 29,10,700 रुपये निकाल लिए। इसकी जानकारी भुक्तभोगी अफसर को तब हुई जब उन्होंने अपने असिस्टेंट को 25 हजार का बियरर चेक देकर भुगतान के लिए बैंक में भेजा। फर्जीवाड़े की जानकारी पर उनकेहोश उड़ गए। बैंक अफसरों से बात करने केबाद उन्होंने सूचना पुलिस को दी। जिसकेबाद शुक्रवार देर रात झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
वीरेंद्र यादव पुत्र रामजीत यादव वर्तमान में उपनिदेशक उद्यान इलाहाबाद केपद पर कार्यरत हैं। वह झूंसी स्थित आवास विकास कॉलोनी योजना-2 में परिवार केसाथ रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र का बचत खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की झूंसी शाखा में है। उन्हें अपने सहायक जनार्दन सिंह को किसी काम केलिए 25000 रुपये देने थे। ऐसे में दो दिन पहले उन्होंने उपरोक्त राशि का बियरर चेक जारी कर जनार्दन को बैंक ऑफ बड़ौदा की झूंसी शाखा में भेजा।
बीते 28/11/17 को चेक संख्या 33 के जरिए 10 लाख रुपये का भुगतान किसी मकवाना ट्रेडर्स केनाम हुआ है। यह जानकारी मिलते ही वीरेंद्र केहोश उड़ गए। उन्होंने बैंक मैनेजर से संपर्क किया तो जो जानकारी मिली, वह और भी चौंकाने वाली थी। बैंक मैनेजर ने बताया कि उनकेखाते से एक नहीं बल्कि कुल तीन बार में 29 लाख से भी ज्यादा रकम निकाली गई। चेक संख्या 33 से 10 लाख का भुगतान तो हुआ ही, 28/11/17 को ही चेक संख्या 34 से किसी पंकज सिंह केनाम से 9,15,300 रुपये निकाले गए। इसकेबाद चेक संख्या 35 से 05/12/17 को 9,95,400 रुपये का भुगतान पंकज नाम केव्यक्ति को हुआ। बैंक अफसरों से पूरी जानकारी लेने केबाद भुुक्तभोगी ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। जिसकेबाद शुक्रवार देर रात एफआईआर दर्ज कर ली गई। झूंसी थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि भुक्तभोगी की तहरीर केआधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल अज्ञात केखिलाफ केस हुआ है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसकेअनुसार आगे की र्कारवाई की जाएगी।
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इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन चेक केजरिए रुपये की निकासी की गई, वह सभी डुप्लीकेट थे। वीरेंद्र का कहना है कि उपरोक्त सभी चेक की मूल कॉपी अब भी उनकेपास है। पुलिस का कहना है कि इससे साफ है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा चेक क्लोनिंग के जरिए हुआ। ठगों ने हूबहू मूल चेक जैसे दिखने वाले चेक बनाकर खाते से रुपयों का भुगतान करा लिया।
वीरेंद्र का आरोप है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा बैंककर्मियों की मिलीभगत से हुआ। उनका कहना है कि बैंक केकिसी अफसर या कर्मचारी ने ही उनकेचेक की क्लोनिंग कराई। पुलिस का भी कहना है कि बिना किसी भीतर केव्यक्ति की मिलीभगत केयह फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच-पड़ताल में यह भी पता चला है कि चेक का भुगतान मथुरा और राजस्थान केभरतपुर जिले स्थित शाखाओं में कराया गया। मामले में बैंककर्मियों से भी पूछताछ की जाएगी।
खाते से इतनी बड़ी रकम निकाले जाने के बाद वीरेंद्र केसामने सबसे बड़ा संकट यह खड़ा हो गया है कि वह अपनी बेटी केहाथ कैसे पीले करें। दरअसल अगले महीने की 28 तारीख को उनकी बेटी की शादी तय है। यह पूरी रकम उन्होंने बेटी की शादी केलिए ही जुटाकर रखे थे।
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वीरेंद्र यादव पुत्र रामजीत यादव वर्तमान में उपनिदेशक उद्यान इलाहाबाद केपद पर कार्यरत हैं। वह झूंसी स्थित आवास विकास कॉलोनी योजना-2 में परिवार केसाथ रहते हैं। पुलिस के मुताबिक, वीरेंद्र का बचत खाता बैंक ऑफ बड़ौदा की झूंसी शाखा में है। उन्हें अपने सहायक जनार्दन सिंह को किसी काम केलिए 25000 रुपये देने थे। ऐसे में दो दिन पहले उन्होंने उपरोक्त राशि का बियरर चेक जारी कर जनार्दन को बैंक ऑफ बड़ौदा की झूंसी शाखा में भेजा।
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बीते 28/11/17 को चेक संख्या 33 के जरिए 10 लाख रुपये का भुगतान किसी मकवाना ट्रेडर्स केनाम हुआ है। यह जानकारी मिलते ही वीरेंद्र केहोश उड़ गए। उन्होंने बैंक मैनेजर से संपर्क किया तो जो जानकारी मिली, वह और भी चौंकाने वाली थी। बैंक मैनेजर ने बताया कि उनकेखाते से एक नहीं बल्कि कुल तीन बार में 29 लाख से भी ज्यादा रकम निकाली गई। चेक संख्या 33 से 10 लाख का भुगतान तो हुआ ही, 28/11/17 को ही चेक संख्या 34 से किसी पंकज सिंह केनाम से 9,15,300 रुपये निकाले गए। इसकेबाद चेक संख्या 35 से 05/12/17 को 9,95,400 रुपये का भुगतान पंकज नाम केव्यक्ति को हुआ। बैंक अफसरों से पूरी जानकारी लेने केबाद भुुक्तभोगी ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। जिसकेबाद शुक्रवार देर रात एफआईआर दर्ज कर ली गई। झूंसी थाना प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि भुक्तभोगी की तहरीर केआधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल अज्ञात केखिलाफ केस हुआ है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसकेअनुसार आगे की र्कारवाई की जाएगी।
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इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिन चेक केजरिए रुपये की निकासी की गई, वह सभी डुप्लीकेट थे। वीरेंद्र का कहना है कि उपरोक्त सभी चेक की मूल कॉपी अब भी उनकेपास है। पुलिस का कहना है कि इससे साफ है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा चेक क्लोनिंग के जरिए हुआ। ठगों ने हूबहू मूल चेक जैसे दिखने वाले चेक बनाकर खाते से रुपयों का भुगतान करा लिया।
वीरेंद्र का आरोप है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा बैंककर्मियों की मिलीभगत से हुआ। उनका कहना है कि बैंक केकिसी अफसर या कर्मचारी ने ही उनकेचेक की क्लोनिंग कराई। पुलिस का भी कहना है कि बिना किसी भीतर केव्यक्ति की मिलीभगत केयह फर्जीवाड़ा संभव नहीं है। थाना प्रभारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच-पड़ताल में यह भी पता चला है कि चेक का भुगतान मथुरा और राजस्थान केभरतपुर जिले स्थित शाखाओं में कराया गया। मामले में बैंककर्मियों से भी पूछताछ की जाएगी।
खाते से इतनी बड़ी रकम निकाले जाने के बाद वीरेंद्र केसामने सबसे बड़ा संकट यह खड़ा हो गया है कि वह अपनी बेटी केहाथ कैसे पीले करें। दरअसल अगले महीने की 28 तारीख को उनकी बेटी की शादी तय है। यह पूरी रकम उन्होंने बेटी की शादी केलिए ही जुटाकर रखे थे।