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22.39 करोड़ निकालने में एक्सिस बैंक मैनेजर सहित 12 नपे
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 May 2017 02:05 AM IST
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सिविल लाइंस स्थित एक्सिस बैंक में एक शिक्षण संस्थान के खाते से 22.39 करोड़ रुपये निकालने के मामले में ब्रांच मैनेजर सहित 12 अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रबंधक जावेद अख्तर को रिवर्ट करबलिया भेज दिया गया है, जबकि अन्य 11 अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इस प्रकरण में बैंक की हाईपावर कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर इसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार दो अफसर और शिक्षण संस्थान के लेखाकार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए एसएसपी को तहरीर दे दी गई है।
जिले की एक शिक्षण संस्था का एक्सिस बैंक में खाता है। इस खाते से 2013 से लेकर 2016 के दौरान 370 चेक का उल्लेख करके लेखाकार ने आधा दर्जन नामों से 22.39 करोड़ निकाल कर दूसरे खातों में जमा करा दिए । बैंक की हाईपावर विजिलेंस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शिक्षण संस्थान के लेखाकार और उनके यहां के दो अधिकारियों की सीधे तौर पर मिलीभगत रही है। बाद में उन खातों से इस राशि को निकाल लिया गया। जबकि इन 370 चेक में से अधिकांश चेक बैंक में दिए ही नहीं गए, बल्कि उनके नंबरों का उल्लेख किया गया है।
बैंक प्रबंधक अनिल वाजयेपी ने 28 अप्रैल को हाईपावर विजिलेंस टीम की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए एसएसपी को तहरीर भेजी थी। जिसमें बैंक के दो अफसर और शिक्षण संस्था के लेखाकार के नाम का उल्लेख किया गया है। इस तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो बैंक के अफसर आज एसएसपी से भी मिले।
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लेखाकार पत्नी और रिश्तेदारों के अलावा कुछ अन्य फर्जी आईडी के आधार पर खाता खोलकर कई करोड़ रुपये जमा कराते रहे और कुछ दिनों बाद टुकड़ों में यह रकम निकाली जाती रही। यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। इसका उल्लेख बैंक की हाईपावर विजिलेंस जांच कमेटी की रिपोर्ट में किया है। बैंक की ओर से कुछ खातेदारों के पतों का सत्यापन कराया तो वहां पर उन नाम के लोग मिले ही नहीं। आसपास के लोगों ने बताया कि इस नाम के लोग रहते ही नहीं हैं। रजिस्टर्ड डाक से पत्र भी भेजे गए जो कि अधूरा पता तथा इन नामों के व्यक्तियों की जानकारी न होने का उल्लेख करके डाक विभाग ने बैंक में वापस भेज दिए गए।
बैंक के मुंबई कार्यालय को छह महीने पहले स्टाफ के खिलाफ शिकायत की गई थी। जिसमें कहा गया था कि बैंक के कुछ अधिकारी वेतन से अधिक अपने ऊपर खर्च कर रहे हैं। अल्प समय की नौकरी में उनके पास कीमती गाड़ी है तथा अन्य सुविधाएं ले रहे हैं। शिकायत में संकेत दिया था कि यह सब किसी शिक्षण संस्थान के खाते से करोड़ों रुपये का लेनदेन करके किया गया है। उसी शिकायत पर की गई जांच में यह खुलासा हुआ है।
‘बैंक अफसरों से 22.39 करोड़ की निकासी में फ्राड होने का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ में वह रिपोर्ट भी मांगी है, जिसमें इस तरह के गोलमाल का उल्लेख किया गया है। बैंक प्रबंधन को आश्वस्त किया है कि रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होगी।’ शलभ माथुर, एसएसपी
‘ बैंक में एक शिक्षण संस्था के खाते से रकम निकालने के मामले को प्रबंधक ने गंभीरता से लिया है। दोषी स्टाफ के खिलाफ अपने स्तर से प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है।’ धर्मेंद्र ठाकुर, पब्लिक रिलेशन आफीसर, एक्सिस बैंक
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जिले की एक शिक्षण संस्था का एक्सिस बैंक में खाता है। इस खाते से 2013 से लेकर 2016 के दौरान 370 चेक का उल्लेख करके लेखाकार ने आधा दर्जन नामों से 22.39 करोड़ निकाल कर दूसरे खातों में जमा करा दिए । बैंक की हाईपावर विजिलेंस रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि शिक्षण संस्थान के लेखाकार और उनके यहां के दो अधिकारियों की सीधे तौर पर मिलीभगत रही है। बाद में उन खातों से इस राशि को निकाल लिया गया। जबकि इन 370 चेक में से अधिकांश चेक बैंक में दिए ही नहीं गए, बल्कि उनके नंबरों का उल्लेख किया गया है।
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बैंक प्रबंधक अनिल वाजयेपी ने 28 अप्रैल को हाईपावर विजिलेंस टीम की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए एसएसपी को तहरीर भेजी थी। जिसमें बैंक के दो अफसर और शिक्षण संस्था के लेखाकार के नाम का उल्लेख किया गया है। इस तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई तो बैंक के अफसर आज एसएसपी से भी मिले।
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लेखाकार पत्नी और रिश्तेदारों के अलावा कुछ अन्य फर्जी आईडी के आधार पर खाता खोलकर कई करोड़ रुपये जमा कराते रहे और कुछ दिनों बाद टुकड़ों में यह रकम निकाली जाती रही। यह सिलसिला करीब तीन साल तक चलता रहा। इसका उल्लेख बैंक की हाईपावर विजिलेंस जांच कमेटी की रिपोर्ट में किया है। बैंक की ओर से कुछ खातेदारों के पतों का सत्यापन कराया तो वहां पर उन नाम के लोग मिले ही नहीं। आसपास के लोगों ने बताया कि इस नाम के लोग रहते ही नहीं हैं। रजिस्टर्ड डाक से पत्र भी भेजे गए जो कि अधूरा पता तथा इन नामों के व्यक्तियों की जानकारी न होने का उल्लेख करके डाक विभाग ने बैंक में वापस भेज दिए गए।
बैंक के मुंबई कार्यालय को छह महीने पहले स्टाफ के खिलाफ शिकायत की गई थी। जिसमें कहा गया था कि बैंक के कुछ अधिकारी वेतन से अधिक अपने ऊपर खर्च कर रहे हैं। अल्प समय की नौकरी में उनके पास कीमती गाड़ी है तथा अन्य सुविधाएं ले रहे हैं। शिकायत में संकेत दिया था कि यह सब किसी शिक्षण संस्थान के खाते से करोड़ों रुपये का लेनदेन करके किया गया है। उसी शिकायत पर की गई जांच में यह खुलासा हुआ है।
‘बैंक अफसरों से 22.39 करोड़ की निकासी में फ्राड होने का पूरा ब्योरा मांगा है। साथ में वह रिपोर्ट भी मांगी है, जिसमें इस तरह के गोलमाल का उल्लेख किया गया है। बैंक प्रबंधन को आश्वस्त किया है कि रिपोर्ट दर्ज कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी होगी।’ शलभ माथुर, एसएसपी
‘ बैंक में एक शिक्षण संस्था के खाते से रकम निकालने के मामले को प्रबंधक ने गंभीरता से लिया है। दोषी स्टाफ के खिलाफ अपने स्तर से प्रशासनिक कार्रवाई की जा चुकी है। जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है।’ धर्मेंद्र ठाकुर, पब्लिक रिलेशन आफीसर, एक्सिस बैंक