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हाईकोर्ट ने कहा : समन वारंट तामील कराने व दंडात्मक उपाय करने में पुलिस की विफलता चिंताजनक

Sat, 23 Aug 2025 04:00 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 23 Aug 2025 04:00 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समन वारंट तामील कराने और गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए दंडात्मक उपाय करने में पुलिस की विफलता पर चिंता जताई है।

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Court said: The failure of the police to serve the summons warrant and take punitive measures is worrying
अदालत। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने समन वारंट तामील कराने और गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए दंडात्मक उपाय करने में पुलिस की विफलता पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए जुर्माना सहित सख्त कार्रवाई की जाए। हड़ताल होने पर अदालती कार्यवाही न रुके। ट्रायल की प्रगति रिपोर्ट हर 15 दिन में दी जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने मुनीर की दूसरी जमानत अर्जी खारिज करते हुए दिया।

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मुजफ्फरनगर निवासी मुनीर पर थाना चरथावल में दुष्कर्म, पॉक्सो मामले में मुकदमा दर्ज है। फिलहाल वह जेल में है। पहली जमानत अर्जी खारिज होने के बाद उसने अब दूसरी जमानत अर्जी दाखिल की है। कोर्ट ने आरोपी की दूसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट को उचित समय-सीमा के भीतर उच्च न्यायालय के आदेश की प्राप्ति की तारीख से एक वर्ष के भीतर मुकदमे को तय करने का प्रयास करना चाहिए।
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मुकदमे की कार्यवाही में उपस्थित न होने वाले गवाहों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने पाया कि निस्तारण में देरी की मुख्य वजह समन की तामील न होने और गवाहों की उपस्थिति सुनिश्चित करने में पुलिस की विफलता है। भंवर सिंह उर्फ करमवीर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और जितेंद्र बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट को उपरोक्त आदेशों के अनुपालन की जांच का निर्देश भी दिया।

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