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सेना भर्ती घोटाले के आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज
Sun, 26 May 2019 12:41 AM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 26 May 2019 12:41 AM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1991 में आगरा में सेना भर्ती घोटाले के आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आरोपियों की ओर से सीबीआई कोर्ट गाजियाबाद द्वारा सुनाई गई सजा के खिलाफ अपील दाखिल कर जमानत पर छोड़े जाने की मांग की गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव ने दिया है।
भर्ती घोटाले के आरोपी ब्रिगेडियर जगजीत सिंह, सूबेदार मेजर हरिचंद, हवलदार क्लर्क बीरभान, नंद किशोर, परमजीत सिंह, रवींद्र कुमार, आशुतोष पांडेय, आजाद सिंह, प्रमोद कुमार, रामकृष्ण व राज कुमार गौतम के विरुद्ध आरोप को गंभीर मानते हुए जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है। सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश का कहना था कि सेना के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने आवास पर ले जाकर अनुचित लाभ लेकर परीक्षा की कापियां बदलीं और पास कराया। सेना के अधिकारियों का दायित्व था कि वे निष्पक्ष, ईमानदारी से परीक्षा कराते।
मालूम हो कि बीआरओ आगरा ने 26 मई1991 में भर्ती परीक्षा ली। और मेजर ने आवास पर 22 लोगों की कापियां बदल कर लिफाफा लखनऊ मुख्यालय भेज दिया। एक ही हैंडराइटिंग व समान 100 में 97 अंक पाने के कारण जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसमें परीक्षा कराने वाले सेना के अधिकारियों सहित लाभार्थियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 8 अभ्यर्थियों को घोटाले में भागीदार पाया गया। कोर्ट ने कहा कि बिना सेना के अधिकारियों की मिलीभगत के ऐसा घपला नहीं हो सकता था। कोर्ट ने कहा कि सेना वास्तविक हीरो है। अनुशासन है। जनता में सेना की अलग छवि है। यदि सहानुभूति दिखाई गई तो सेना के प्रति जनविश्वास में कमी आएगी। इनके अपराध गंभीर हैं। जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।
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भर्ती घोटाले के आरोपी ब्रिगेडियर जगजीत सिंह, सूबेदार मेजर हरिचंद, हवलदार क्लर्क बीरभान, नंद किशोर, परमजीत सिंह, रवींद्र कुमार, आशुतोष पांडेय, आजाद सिंह, प्रमोद कुमार, रामकृष्ण व राज कुमार गौतम के विरुद्ध आरोप को गंभीर मानते हुए जमानत पर रिहा करने से इंकार कर दिया है। सीबीआई के वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश का कहना था कि सेना के जिम्मेदार अधिकारियों ने अपने आवास पर ले जाकर अनुचित लाभ लेकर परीक्षा की कापियां बदलीं और पास कराया। सेना के अधिकारियों का दायित्व था कि वे निष्पक्ष, ईमानदारी से परीक्षा कराते।
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मालूम हो कि बीआरओ आगरा ने 26 मई1991 में भर्ती परीक्षा ली। और मेजर ने आवास पर 22 लोगों की कापियां बदल कर लिफाफा लखनऊ मुख्यालय भेज दिया। एक ही हैंडराइटिंग व समान 100 में 97 अंक पाने के कारण जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसमें परीक्षा कराने वाले सेना के अधिकारियों सहित लाभार्थियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। 8 अभ्यर्थियों को घोटाले में भागीदार पाया गया। कोर्ट ने कहा कि बिना सेना के अधिकारियों की मिलीभगत के ऐसा घपला नहीं हो सकता था। कोर्ट ने कहा कि सेना वास्तविक हीरो है। अनुशासन है। जनता में सेना की अलग छवि है। यदि सहानुभूति दिखाई गई तो सेना के प्रति जनविश्वास में कमी आएगी। इनके अपराध गंभीर हैं। जमानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।
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