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MNNIT : सड़क पर फर्राटा भरने लगी देश की पहली मानव रहित कार, अवरोधक दिखने पर रुकी और अपने से मुड़ी भी

Mon, 06 Nov 2023 06:05 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 06 Nov 2023 06:05 AM IST
सार

इस परियोजना को फिनिशिंग लाइन तक पहुंचाने के लिए अभी कुछ काम बाकी रह गया है। अगले छह महीने में यह मानव रहित कार सड़कों पर दौड़ती नजर आएगी।मानव रहित पांच सीटों वाली कार के दूसरे चरण के सफल परीक्षण को लेकर एमएनएनआईटी के टेक्नोक्रेट बेहद उत्साहित हैं।

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country's first unmanned car started speeding on the road, stopped and even turned on its own when it saw
एमएनएनआईटी में छात्रों की ओर से तैयार मानव रहित कार। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

देश की पहली मानव रहित कार का बुधवार को एमएनएनआईटी परिसर की सड़कों पर सफल परीक्षण किया गया। परिसर की सड़कों पर 30 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दो सौ मीटर से अधिक दूरी इस कार ने तय की। इस दौरान मानव रहित कार अवरोधक मिलने पर न सिर्फ रुकी, बल्कि अपने आप ब्रेक लेने और छोड़ने के साथ ही रास्ता भी बदलती रही। तिराहों, चौराहों के टर्निंग प्वाइंट पर खुद मुड़कर यह कार अपने निर्धारित स्थल पर पहुंच गई।

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हालांकि इस परियोजना को फिनिशिंग लाइन तक पहुंचाने के लिए अभी कुछ काम बाकी रह गया है। अगले छह महीने में यह मानव रहित कार सड़कों पर दौड़ती नजर आएगी।मानव रहित पांच सीटों वाली कार के दूसरे चरण के सफल परीक्षण को लेकर एमएनएनआईटी के टेक्नोक्रेट बेहद उत्साहित हैं। वर्ष भर पहले यह कार इसी परिसर में सिर्फ 30 मीटर ही चल सकी थी। स्टीयरिंग चेन सिस्टम पर आधारित थी। कोडिंग और प्रोग्रामिंग के बाद अब अमेरिका की कार्निगी मेलॉन यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर विजन विभाग के शोध छात्र भुवन जाम की मदद से इसकी दूसरी बाधाओं को पार कर लिया गया है।

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भुवन की मदद से मैकेनिकल डिजाइन, इलेक्ट्रिकल, कंप्यूटर कोडिंग और विजन पर इस परियोजना से जुड़े 19 छात्रों की टीम ने काम किया। स्टीयरिंग अब चेन रहित बनाने में सफलता मिल गई है। इस टीम के मैकेनिकल हेड आयुष गौर हैं। इलेक्ट्रिकल के प्रभारी शशांक सिंह और कंप्यूटर विजन के हेड अनादि गर्ग हैं। पुरा छात्र सम्मेलन के दूसरे और आखिरी दिन दोपहर बाद एमएनएनआईटी के बहुउद्देश्यीय भवन परिसर से निकल कर दो सौ मीटर तक फर्राटा भरने के बाद इस मानव रहित कार को पूरी तरह सड़कों पर चलने के लिए फिट पाया गया।

अनादि गर्ग ने बताया कि इस कार का अब तीसरा और आखिरी चरण आरंभ होगा, जो छह महीने चलेगा। एमएनएनआईटी के प्रोफेसर समीर और प्रो. जितेंद्र गंगवार निर्देशन में बीटेक छात्रों की टीम ने मिलकर इस कार को तैयार किया है। इस कार के लिए फंडिंग और मार्गदर्शन एमएनएनआईटी के ही साल 1995 बैच के छात्र रहे आरआरडी गो क्रिएटिव के वाइस प्रेसीडेंट रोहित गर्ग और सड़क एवं परिवहन मंत्रालय नई दिल्ली में अधीक्षण अभियंता के पद पर तैनात राजेश कुमार ने किया है। कार्ट-95 के नाम से इस मानव रहित कार परियोजना पर 15 लाख रुपये लागत आई है।


अमेरिका की कार्निगी मेलॉन यूनिवर्सिटी की मदद से माव रहित कार की स्टीयरिंग और विजन की बाधाओं को दूर करने मेंम सफलता मिल गई है। इस कार को अब जहां भी जाने के लिए कोडिंग के माध्यम से कहा जाएगा, वहां वह अपने आप रास्ता ढूंढते हुए पहुंच जाएगी।  - आयुष गौर, परियोजना के सिविल वर्क हेड।

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