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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Conversion case: Used to write name and address in diary, then used to trick and convert

धर्मांतरण मामला : डायरी में लिखते थे नाम-पता, फिर बरगलाकर कराते थे धर्म परिवर्तन

Wed, 18 Jan 2023 06:23 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 18 Jan 2023 06:23 AM IST
सार

माघ मेले में पकड़े गए धर्मांतरण रैकैट के सदस्य संपर्क में आने वाले हर शख्स का रिकॉर्ड रखते थे। वह किताबें लेने वालों का नाम-पता डायरी में दर्ज करते थे। फिर इसे सरगना महमूद हसन गाजी के जरिये धर्मांतरण रैकेट के अन्य सदस्यों के पास भेजा जाता था।

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Conversion case: Used to write name and address in diary, then used to trick and convert
Prayagraj News : पुलिस के हत्थे चढ़े धर्मांतरण के आरोपी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माघ मेले में पकड़े गए धर्मांतरण रैकैट के सदस्य संपर्क में आने वाले हर शख्स का रिकॉर्ड रखते थे। वह किताबें लेने वालों का नाम-पता डायरी में दर्ज करते थे। फिर इसे सरगना महमूद हसन गाजी के जरिये धर्मांतरण रैकेट के अन्य सदस्यों के पास भेजा जाता था। इसी रिकॉर्ड के जरिये रैकेट के अन्य सदस्य फिर संबंधित व्यक्तियाें से संपर्क कर उन्हें धर्मांतरण के लिए बरगलाते थे।

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पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से यह डायरी बरामद की है। इस डायरी में 100 से ज्यादा लोगों के नाम मिले हैं। यह डायरी मोनिश व समीर के पास से बरामद हुई। पुलिस अफसरों के मुताबिक, पूछताछ में दोनों ने बताया कि गाजी का निर्देश था कि जिन भी लोगों को किताबें बेची या बांटी जाएं, उन सभी के नाम व पता इस डायरी में दर्ज किए जाएं। मोबाइल नंबर भी लिए जाएं।

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इसके बाद डायरी में दर्ज रिकॉर्ड को वह गाजी को दे देते थे। उधर गाजी ने कबूल किया है कि उक्त रिकॉर्ड को वह अपने अन्य साथियों को देता था। जो पहले मोबाइल नंबर के जरिये लोगाें से संपर्क करते थे। फिर कुछ समय तक उनसे मेलजोल बढ़ाकर उन्हें धर्मांतरण के लिए बरगलाते थे।सूत्रों का कहना है कि इस डायरी में 100 से ज्यादा लोगों के नाम मिले हैं। इनमें से अब तक कितने लोगों से रैकेट के सदस्य संपर्क कर चुके हैं, यह विस्तृत जांच पड़ताल के बाद ही पता चलेगा। हालांकि पूछताछ के बाद इतना तय है कि यह रैकेट बेहद योजनाबद्ध तरीके से अपने मकसद को अंजाम देने में लगा हुआ था।

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किताबें लेने वालों की तस्वीर भी खींचते थे आरोपी
एडीसीपी अपराध सतीश चंद्र ने बताया कि पूछताछ में एक और खुलासा हुआ है। पता चला है कि मोनिश व समीर किताबें लेने वालों की तस्वीरें भी खींचते थे। इस संबंध में जब उनसे पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया कि गाजी ने उन्हें ऐसा करने के लिए कहा था। वह यह तस्वीरें गाजी को भेजा करते थे। उधर, पूछताछ में गाजी ने बताया कि इन तस्वीरों को वह अपने ऊपर के लोगों को भेजा करता था। इसके बाद ही उसे उनकी ओर से रुपये भेजे जाते थे।

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शहर के साथ ही दिल्ली में छपती थी किताबेंसरगना से पूछताछ में यह बात भी सामने आई है कि किताबें शहर के साथ ही दिल्ली में छपवाई जाती थीं। खास बात यह है कि किताबें अनाधिकृत प्रिंटिंग प्रेस में छपवाई जाती थीं। यही वजह है कि जो 204 किताबें आरोपियों के कब्जे से बरामद हुई हैं, उनके मुद्रक या प्रकाशक के नाम नहीं हैं। पुलिस उन प्रिंटिंग प्रेस संचालकों का भी पता लगा रही है। अफसरों का कहना है कि चिह्नित करने के बाद इस संबंध में उनसे भी पूछताछ की जाएगी।

बिना पैसे लिए किताबें देता था गाजी

मोनिश व समीर ने पूछताछ में पुलिस को बताया है कि जो किताबें वह मेला क्षेत्र और धार्मिक स्थलों के आसपास बांटते थे, वह उन्हें फ्री में मिलती थीं। किताबें सरगना गाजी उपलब्ध कराता था और वह इसके लिए रुपये नहीं लेता था। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दोनों अपने को निर्दोष बताते रहे और यह कहते रहे कि वह यह काम गाजी के कहने पर करते थे। मौका पाकर वह किताबें बेच भी देते थे और इससे मिलने वाले रुपये रख लेते थे।

खाते में मिले हैं लेनदेन के सबूत

पुलिस अफसरों ने यह भी बताया कि गाजी के खाते में अबूधाबी से रुपयों के लेनदेन की बात सामने आई है। फिलहाल उसने बताया है कि वह इन रुपयों को प्रचार प्रसार में खर्च करता था। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल जो भी लेनदेन सामने आए हैं, वह छोटी रकम से ही संबंधित हैं। आशंका यह भी जताई जा रही है कि रकम बड़ी होने पर गाजी के जांच एजेंसियों के रडार पर आने के डर से ही ऐसा किया जा रहा था।

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