माघ मेले में धर्मांतरण मामला : आशीष को मोनिश, नरेश को बना दिया समीर
मदरसा शिक्षक महमूद हसन गाजी लंबे समय से धर्मांतरण में लगा हुआ था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। यहां तक कि साथ गिरफ्तार रैकेट के दोनों सदस्यों का भी उसने ही धर्म परिवर्तन कराया था।
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मदरसा शिक्षक महमूद हसन गाजी लंबे समय से धर्मांतरण में लगा हुआ था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। यहां तक कि साथ गिरफ्तार रैकेट के दोनों सदस्यों का भी उसने ही धर्म परिवर्तन कराया था। उसने आशीष को मो. मोनिश जबकि नरेश को समीर बना दिया था। मोनिश ने पूछताछ में बताया कि गाजी के संपर्क में आने के बाद ही करीब दो साल पहले उसने इस्लाम स्वीकार कर लिया था। उसने बताया कि वह मुंबई में रहता था। उसका फूफा सुभाष कुमार गुप्ता मूल रूप से फतेहपुर का रहने वाला है और फिलहाल करेली में रहकर वैन चलाता है। वह करेली में जीटीबी नगर में किराये पर रहता है और गाजी का पड़ोसी है।
कई साल पहले गाजी के संपर्क में आने के बाद ही उसने धर्म परिवर्तन कर लिया था और सुभाष से मो. सईद बन गया था। अफसरों के मुताबिक, बकौल मोनिश वह अपने फूफा के घर आता जाता रहता था और उसके ही जरिए गाजी के संपर्क में आया। गाजी ने उसे इस्लाम कबूलने के लिए कहा। जिस पर करीब दो साल पहले उसने धर्म परिवर्तन कर लिया। इसी तरह मोनिश ने बताया कि वह कई सालों से गाजी के संपर्क में था। वह कपड़े सिलने का काम करता था। 12-13 साल पहले उसने धर्मांतरण कर लिया था। उसने मुस्लिम महिला से ही शादी भी की।
दोनों के पास मिले दो-दो आधार कार्ड
पुलिस ने बताया कि मोनिश व समीर दोनों के कब्जे से दो-दो आधार कार्ड बरामद हुए हैं। इनमें से एक में उनका पूर्व जबकि दूसरे में वर्तमान नाम है। अफसरों का कहना है कि जांच में यह बात सामने आई है कि किताबें बांटने के दौरान अगर किसी को शक होता था तो वह अपना पूर्व नाम का आधार कार्ड दिखाते थे। जबकि मुस्लिम इलाकों में जाने पर वर्तमान नाम वाले आधार कार्ड का इस्तेमाल करते थे।
शुरुआत से ही थे मेले में
पुलिस की पूछताछ में मोनिश व समीर ने यह भी बताया कि दोनों शुरुआत से ही माघ मेले में किताबें बांटने का काम कर रहे थे। वह घूम-घूमकर ठेले पर किताबें बेचा करते थे। पकड़े जाने के दौरान वह लेटे हनुमान मंदिर से आगे महाबीर मार्ग पर किताबें बांट रहे थे।