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Upbhokta Ayog : रुपये लेने के बाद भी फ्लैट न देना अन्याय, ब्याज सहित रुपये लौटाए कंपनी
Mon, 22 Sep 2025 06:03 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 22 Sep 2025 06:03 PM IST
सार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कहा कि ग्राहक से रुपये लेकर समय पर फ्लैट न देना और बिना अनुमति आवंटन रद्द करना अन्याय है। आयोग ने इस टिप्पणी संग विराज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को उपभोक्ता से लिए गए पांच लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया।
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अदालत।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कहा कि ग्राहक से रुपये लेकर समय पर फ्लैट न देना और बिना अनुमति आवंटन रद्द करना अन्याय है। आयोग ने इस टिप्पणी संग विराज कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड लखनऊ को उपभोक्ता से लिए गए पांच लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। यह फैसला आयोग के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहिम व सदस्य प्रकाश चंद्र त्रिपाठी ने दिया।
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तेलियरंगज के मेहंदौरी निवासी कौशल किशोर सिंह ने मई 2014 को विराज कंस्ट्रक्शन की ग्रीन सिटी, लखनऊ में लोटस कोर्ट प्रोजेक्ट के तहत एक फ्लैट बुक किया था। 2017 तक उस पर कब्जा देने की बात कही गई थी। इस मद में बिल्डर कंपनी को परिवादी ने 5,11,987 रुपये का भुगतान किया। बाद में कहा गया कि 2022 तक फ्लैट मिल जाएगा। पता किया तो जानकारी हुई कि उपभोक्ता के फ्लैट का निर्माण अभी शुरू ही नहीं गया था। इसके बाद बिल्डर कंपनी ने तीन मार्च 2022 को एकतरफा कार्रवाई करते हुए परिवादी के फ्लैट का आवंटन रद्द कर दिया। इसे परिवादी ने आयोग में चुनौती दी।
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उपभोक्ता आयोग ने पाया कि कंपनी ने परिवादी से रुपये लेकर फ्लैट न देकर अनुचित व्यापारिक व्यवहार किया है। आयोग ने परिवादी की ओर से भुगतान की गई पूरी राशि 5,11,987 रुपये आठ प्रतिशत ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। साथ ही मानसिक व आर्थिक हर्जाना 50 हजार रुपये व वाद व्यय के रूप में पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया। कंपनी को आदेश के दो महीने के भीतर रुपयों का भुगतान करना होगा।
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