फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Constant humiliation can also amount to abetment of suicide: High Court

लगातार अपमान भी आत्महत्या के लिए उकसावा हो सकता है : हाईकोर्ट

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2026 02:39 AM IST
विज्ञापन
Constant humiliation can also amount to abetment of suicide: High Court
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार इस तरह अपमानित और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाए कि उसकी पारिवारिक जिंदगी और सामाजिक सम्मान प्रभावित हो, तो ऐसी परिस्थितियां आत्महत्या के लिए उकसावे (दुष्प्रेरण) के दायरे में आ सकती हैं।
विज्ञापन

कोर्ट ने कहा कि आत्महत्या के लिए उकसावे का आरोप तय करने के लिए यह आवश्यक नहीं है कि आरोपी घटना से ठीक पहले मृतक के संपर्क में रहा हो। कोर्ट ने बरेली की विशेष एससी/एसटी अदालत के उस आदेश को सही ठहराया। जिसमें आरोपी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी गई थी। यह आदेश न्यायमूर्ति संतोष राय की अदालत ने बरेली निवासी चंद्रजीत सिंह की याचिका पर दिया।
विज्ञापन

आरोपी के खिलाफ आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण और एससी/एसटी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज है। अभियोजन के अनुसार मृतक सोमराज की शादी 2017 में सह-आरोपी प्रिया उर्फ डॉली से हुई थी। आरोप है कि प्रिया के चंद्रजीत सिंह और एक अन्य व्यक्ति से अवैध संबंध थे। जिससे पति-पत्नी के बीच अक्सर विवाद होता था। शिकायत के मुताबिक, समझाने के बावजूद आरोपी लगातार मृतक को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे, जिससे वह गहरे तनाव में आ गया। 18 जून 2018 को सोमराज अपने कमरे में फंदे से लटका मिला। घटनास्थल से मिले हस्तलिखित सुसाइड नोट में उसने अपनी पत्नी, चंद्रजीत और गुलशन को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया था। बाद में फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) ने सुसाइड नोट की लिखावट की पुष्टि भी कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

याची के अधिवक्ता ने दलील दी गई कि घटना से दो-तीन दिन पहले उसका मृतक से कोई संपर्क नहीं था। इसलिए आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण का आरोप नहीं बनता। कोर्ट ने कहा कि सुसाइड नोट इस मामले का महत्वपूर्ण साक्ष्य है। ऐसे में आरोपों की सत्यता, आरोपी की मंशा और आत्महत्या से उसके संबंध का अंतिम परीक्षण केवल ट्रायल के दौरान ही किया जा सकता है। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है और आरोपी की आपराधिक अपील खारिज कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed