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सम्मोहित करता रहा लोक-शिल्प का संगम
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 18 Mar 2017 02:13 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के शिल्प हाट में शुक्रवार को लघु भारत सिमट आया। दस दिनी राष्ट्रीय शिल्प मेले की दस्तक के साथ मुक्ताकाशी मंच पर देश की समृद्ध बहुरंगी लोक संस्कृतियों की अद्भुत, अलौलिक छवियां दिखीं तो इलाहाबाद हाट में शिल्प के एक से बढ़कर एक नायाब नमूनों ने हुनर और हौसले की मिसाल पेश की। लोक और शिल्प का संगम सभी को सम्मोहित करता रहा।
मुक्ताकाशी मंच पर काशी के रामजनम जोशी के शंख वादन से शुरुआत के बाद सुपरिचित कलाकार रवि शंकर और सहयोगी कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संगम, फ्यूजन बैंड से मंच सजाया। बेहतर संयोजन और प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। इसी क्रम में इंफाल के आईबोमचा एवं दल ने मणिपुर का लोकनृत्य, सुनीता कुमारी एवं दल ने हरियाणा का लोकनृत्य और संतू राम ने मध्यप्रदेश का ककसार नृत्य प्रस्तुत कर समां बांधा।
बतौर मुख्य अतिथि उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य परिचालन प्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने केंद्र की पहल की सराहना की। कहा, केंद्र परिसर में मिनी इंडिया की झलक है। देश की लोक संस्कृतियां निराली हैं, ये हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की परिचायक हैं। केंद्र निदेशक गौरवकृष्ण बंसल ने अतिथियों का स्वागत करतेे हुए मेले के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में रिटायर्ड आईपीएस केके बंसल सहित अनेक विशिष्टजन मौजूद थे। आरंभ में दीप जलाकर मेले का उद्घाटन किया गया। खास यह कि अबकी डिजिटल इंडिया की तर्ज पर पहली बार शिल्प मेले की सांस्कृतिक संध्या का सीधा प्रसारण भी किया गया।
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शहर के सांस्कृतिक कैलेंडर में शिद्दत के साथ शामिल राष्ट्रीय शिल्प मेला वैसे तो दिसंबर में प्रस्तावित था लेकिन नोटबंदी की वजह से शिल्पकार मेले में आने का साहस नहीं जुटा सके। ऐसे में मेला स्थगित किया गया। इसके बाद माघ मेले में ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ और फिर चुनावी बिगुल के कारण अब मार्च से पहले मेले को मौका मिला।
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मुक्ताकाशी मंच पर काशी के रामजनम जोशी के शंख वादन से शुरुआत के बाद सुपरिचित कलाकार रवि शंकर और सहयोगी कलाकारों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के संगम, फ्यूजन बैंड से मंच सजाया। बेहतर संयोजन और प्रस्तुति ने दर्शकों को बांधे रखा। इसी क्रम में इंफाल के आईबोमचा एवं दल ने मणिपुर का लोकनृत्य, सुनीता कुमारी एवं दल ने हरियाणा का लोकनृत्य और संतू राम ने मध्यप्रदेश का ककसार नृत्य प्रस्तुत कर समां बांधा।
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बतौर मुख्य अतिथि उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य परिचालन प्रबंधक दिलीप कुमार सिंह ने केंद्र की पहल की सराहना की। कहा, केंद्र परिसर में मिनी इंडिया की झलक है। देश की लोक संस्कृतियां निराली हैं, ये हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की परिचायक हैं। केंद्र निदेशक गौरवकृष्ण बंसल ने अतिथियों का स्वागत करतेे हुए मेले के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में रिटायर्ड आईपीएस केके बंसल सहित अनेक विशिष्टजन मौजूद थे। आरंभ में दीप जलाकर मेले का उद्घाटन किया गया। खास यह कि अबकी डिजिटल इंडिया की तर्ज पर पहली बार शिल्प मेले की सांस्कृतिक संध्या का सीधा प्रसारण भी किया गया।
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शहर के सांस्कृतिक कैलेंडर में शिद्दत के साथ शामिल राष्ट्रीय शिल्प मेला वैसे तो दिसंबर में प्रस्तावित था लेकिन नोटबंदी की वजह से शिल्पकार मेले में आने का साहस नहीं जुटा सके। ऐसे में मेला स्थगित किया गया। इसके बाद माघ मेले में ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’ और फिर चुनावी बिगुल के कारण अब मार्च से पहले मेले को मौका मिला।