रेलवे केंद्रीय चिकित्सालय का हाल : महिला वार्ड में भर्ती किए जा रहे पुरुष मरीज, नालियां चोक, मच्छरों की भरमार
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के केंद्रीय चिकित्सालय के महिला सर्जिकल वार्ड में महिलाओं के साथ पुरुष मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। इससे वहां एडमिट महिलाएं खुद को असहज महसूस करती हैं। वार्ड के शौचालय का दरवाजा भी टूटा हुआ है। ऐसे में महिलाओं को खासी दिक्कत होती है।
विस्तार
उत्तर मध्य रेलवे के सबसे बड़े चिकित्सालय का हाल इन दिनों बेहाल है। चिकित्सालय के विस्तार का कार्य जोर-शोर से चल रहा है, लेकिन वर्तमान में यहां की अव्यवस्थाओं से मरीज और तीमारदार परेशान हैं।
अस्पताल के महिला सर्जिकल वार्ड में महिलाओं के साथ पुरुष मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। इससे वहां एडमिट महिलाएं खुद को असहज महसूस करती हैं। वार्ड के शौचालय का दरवाजा भी टूटा हुआ है। ऐसे में महिलाओं को खासी दिक्कत होती है। तीमारदारों ने बताया कि अस्पताल की पुरानी इमारत के बाहर नालियां चोक होने से शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है।
इतना ही नहीं, पुरुष मेडिकल वार्ड में बेडों की चादर भी काफी पुरानी हैं। अधिकांश में उत्तर मध्य रेलवे 2018 या 2019 ही लिखा हुआ है।तीमारदारों के लिए यहां स्टूल भी नहीं है। अस्पताल में आरओ नंबर वन/वाटर कूलर भी खराब है। वहीं, कुछ लोगों ने एसी की कूलिंग ठीक से नहीं होने की बात भी कही। यहां बेड संख्या-21 का गद्दा (मैट्रेस) भी फटा मिला।
अस्पताल के स्टाफ के लिए चेंजिंग रूम और कॉमन रूम भी न होने की बात सामने आई। रिसेप्शन/पूछताछ केंद्र न होने की वजह से भी लोगों को दिक्कत होती है। अगर किसी के पास मोबाइल न हो तो यह पता करना मुश्किल हो जाएगा कि कौन-सा मरीज किस वार्ड में भर्ती है। रेलवे अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक रोजाना सैकड़ों मरीजों को मरीज देखते हैं।
मेंस यूनियन ने भी रविवार को थीं कमियां उजागर
नाॅर्थ सेंट्रल रेलवे मेंस यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी रविवार को चिकित्सालय का निरीक्षण कर कमियां उजागर की थीं। मंडल मंत्री डीएस यादव, सईद अहमद, नागेंद्र बहादुर सिंह ने कमियों की सूची बनाकर चिकित्सा निदेशक को देने की बात कही है।
मंडल मंत्री ने बताया कि एचडीयू यूनिट में बेडों की चादर ड्यूटी पर कार्यरत कर्मचारियों द्वारा न बदलकर मरीज से जुड़े लोगों को दी जाती है। शौचालय में इंडियन कमोड के चारों तरफ की फर्श टूटी पाई गई। उसमें गंदगी के साथ कीड़े भी दिखे। अस्पताल की सफाई भी संतोषजनक नहीं है। यहां छह मरीज पर एक कर्मचारी होना चाहिए, लेकिन यह अनुपात 16 मरीज पर एक कर्मचारी का है।
पिछले एक वर्ष में केंद्रीय चिकित्सालय में साढ़े पांच करोड़ रुपये से ज्यादा के काम कराए गए हैं। अस्पताल और अच्छी सुविधाओं को देने की ओर अग्रसर है। कई समस्याओं का समाधान किया गया है, जो रह गई हैं उसे भी जल्द दूर किया जाएगा। - हिमांशु शेखर उपाध्याय, सीपीआरओ, एनसीआर