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प्रयागराज : पिछली नियुक्ति रद्द होने की बात छिपाना सेवा से बर्खास्तगी का आधार नहीं

Mon, 21 Sep 2026 04:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 21 Sep 2026 04:17 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुरानी नियुक्ति रद्द होने की जानकारी न देना सेवा समाप्ति का आधार नहीं हो सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने संतकबीरनगर के बीएसए की ओर से जारी सहायक अध्यापक अनिल कुमार की सेवा समाप्ति के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है।

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Concealing the fact of a previous appointment's cancellation is not grounds for dismissal from service
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुरानी नियुक्ति रद्द होने की जानकारी न देना सेवा समाप्ति का आधार नहीं हो सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने संतकबीरनगर के बीएसए की ओर से जारी सहायक अध्यापक अनिल कुमार की सेवा समाप्ति के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दिया है। अनिल कुमार 2015 में अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए थे। 2018 में शिकायत पर जांच की गई तो उनकी स्पेशल बीटीसी भर्ती में बीएड की डिग्री फर्जी पाई गई थी। इसके चलते 2010 में उनकी वह नियुक्ति रद्द कर दी गई थी और एफआईआर दर्ज की गई थी। विभाग ने इस तथ्य को छिपाने का आरोप लगा 20 अप्रैल 2019 को उनकी मौजूदा सेवा समाप्त कर दी थी, जिसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2015 की भर्ती में लगाए गए सभी शैक्षणिक दस्तावेज पूरी तरह से असली और जांच में सही पाए गए हैं। पुरानी नियुक्ति का रद्द होना कोई आधिकारिक बर्खास्तगी नहीं थी। इसके अलावा आवेदन पत्र में पुरानी नियुक्ति रद्द होने या आपराधिक मामले का ब्योरा देने के लिए कोई स्पष्ट कॉलम भी नहीं था। इसलिए यह नहीं का जा सकता कि याची ने जानकारी छुपाई। 
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कोर्ट ने कहा- आवेदन में स्पष्ट रूप जानकारी नहीं मांगी गई तो तथ्य छिपाने का आरोप सिद्ध नहीं होता

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि नियुक्ति रद्द किए जाने को सेवा से बर्खास्तगी के बराबर नहीं माना जा सकता। ऐसे में कोर्ट ने सर्वोच्च अदालत के अवतार सिंह बनाम भारत संघ फैसले का हवाला दिया। कहा कि जब तक आवेदन में किसी जानकारी को स्पष्ट रूप से नहीं मांगा गया हो, तब तक अभ्यर्थी पर तथ्य छिपाने का आरोप सिद्ध नहीं होता। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान नियुक्ति पूरी तरह से वैध शैक्षणिक योग्यताओं पर आधारित है और पुरानी घटना का मौजूदा चयन से कोई सीधा संबंध नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने 2019 के बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया।

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