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‘पापा मुझे माफ करना’ लिखकर छात्रा फांसी पर झूली

Mon, 04 Nov 2019 12:37 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 04 Nov 2019 12:37 AM IST
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Competitive students hanged due to success stress
प्रतियोगी परीक्षाओं की कर रही थी तैयारी, गाजियाबाद में हुई थी शादी, लगाई फांसी
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चयन न होने से परेशान होकर उठाया आत्मघाती कदम
प्रयागराज। धूमनगंज के कालिंदीपुरम में रहने वाली प्रतियोगी छात्रा विनीता वर्मा (29) ने फांसी लगाकर जान दे दी। कई वर्षों से तैयारी करने के बावजूद चयन न होने से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने खुदकुशी की वजह लिखी है। बेटी की मौत से परिवार में कोहराम है।
कालिंदीपुरम के ओमप्रकाश सभासद नगर के रहने वाले रामप्रसाद वर्मा जनरल मर्चेंट की दुकान चलाते हैं। विनीता उनके चार बच्चों में सबसे छोटी थी। पिछले कई सालों से वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटी थी। इसी साल फरवरी में उसकी शादी गाजियाबाद निवासी सत्येंद्र वर्मा से कर दी गई, जो निजी कंपनी में इंजीनियर है। करीब एक महीने पहले परीक्षा देने के लिए विनीता मायके आई। रविवार को उसकी विदाई होनी थी, ऐसे में पति उसे लेने आया। पुलिस के मुताबिक, करीब 11.30 बजे घर के लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। पति किसी काम से बाहर गया था। इसी दौरान विनीता भी पैकिंग करने की बात कहकर अपने कमरे में चली गई। बहुत देर तक दिखाई नहीं देने पर परिजन कमरे में पहुंचे तो वह फांसी पर लटकी मिली। सूचना पर पति व अन्य परिजन भी पहुंच गए। जानकारी मिली तो पुलिस पहुंची। जांच पड़ताल के दौरान कमरे से ही सुसाइड नोट मिला। जिसके मुताबिक, वह चयन न होने से परेशान थी और इसी बात पर उसने आत्मघाती कदम उठा लिया।
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क्या लिखा सुसाइड नोट में
पापा मुझे माफ करना। कई सालों से कड़ी मेहनत करने के बावजूद चयन न हो पाने से मैं काफी निराश हूं। आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी। आसपास के लोगों के मुताबिक, बातचीत में परिजनों ने बताया कि घटना से कुछ देर पहले विनीता सबके साथ थी लेकिन, उसकी बातों से किसी को भी अनुमान नहीं हुआ कि उसके मन में क्या चल रहा है। यहां तक सुबह छठ पूजा के लिए भी वह गई थी और वहां से आने के बाद सभी को प्रसाद भी बांटा।
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11 महीनों में हताशा के फंदे पर झूले सात युवा
-सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की कर रहे थे तैयारीसफलता नहीं मिलने पर उठाया आत्मघाती कदम
प्रयागराज। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता न मिलने पर आत्मघाती कदम उठाने वाली धूमनगंज की विनीता अकेली नहीं। शहर में उसके जैसे कई और भी प्रतियोगी छात्र-छात्राएं रहे, जो निराश होकर हताश के फंदे पर झूल गए। यहां पिछले 11 महीनों के भीतर सात युवाओं ने फांसी लगाकर जान दे दी।
22 अक्तूबर : कर्नलगंज स्थित गर्ल्स हॉस्टल में रहकर यूजीसी नेट की तैयारी करने वाली कॉलेज प्रबंधक की पत्नी प्रियंका मिश्रा (37) का शव फांसी पर लटका मिला था। देवरिया की रहने वाली प्रियंका छह महीने से यहां रहकर तैयारी कर रही थी।
24 सितंबर : दारागंज की श्याम नगर कॉलोनी में रहने वाले देवरिया पथरदेवा के विष्णुपुर निवासी केशव तिवारी (23) ने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी। वह एसएससी की तैयारी कर रहा था।
11 अगस्त : ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के सामने लॉज में रहने वाले प्रतियोगी छात्र सुशील यादव (26) ने रात में पंखे से लटकर खुदकुशी कर ली थी। इटावा का सुशील पांच वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।
27 जून : सुल्तानपुर का ऋषभ उपाध्याय रसूलाबाद मुहल्ले में सुबह साढ़े 11 बजे के करीब फांसी पर लटका मिला था। पुलिस ने बताया था कि नौकरी न मिलने से वह परेशान रहता था।
30 जनवरी : आजमगढ़ के रजनीकांत यादव उर्फ गोलू (18) पुत्र कैलाश यादव ने अल्लापुर स्थित किराये के कमरे में फांसी लगा ली थी। पड़ोसी छात्रों ने देखा रोशनदान से देखा कि वह फांसी पर लटका था।

21 जनवरी : यह घटना कटरा में हुई थी। जहां किराए पर रहकर आईटीआई की पढ़ाई करने वाली कौशाम्बी निवासी छात्रा पल्लवी ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। उसके पिता राजू पशुपालन विभाग में कर्मचारी हैं। उसने दुपट्टे से बने फंदे से फांसी लगाई थी।
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