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हाईकोर्ट : कोल्ड स्टोरेज चलाने वाली कंपनी को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की याचिका

Sun, 25 Feb 2024 05:32 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 25 Feb 2024 05:32 PM IST
सार

मामले में मेसर्स नीरज पोटैटो प्रिजर्वेशन एंड फूड प्रोडक्ट्स प्रा.लि. लिमिटेड शिवराजपुर, कानपुर नगर में कोल्ड स्टोरेज चलाते हैं। दो किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण किया था। इस दौरान याची कंपनी से दो किसानों ने 9.3.2018 को 4,09,022/- रुपये का ऋण लिया, लेकिन वापस नहीं किया।

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Company running cold storage did not get relief, court rejected the petition
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

आलू भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज का संचालन करने वाली कंपनी ने दो किसानों से ऋण वसूली के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। कोर्ट ने कंपनी को एमएसएमईडी अधिनियम के तहत वित्तीय सेवाओं की श्रेणी में पंजीकृत नहीं माना और याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की कोर्ट ने उक्त फैसला सुनाया।

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मामले में मेसर्स नीरज पोटैटो प्रिजर्वेशन एंड फूड प्रोडक्ट्स प्रा.लि. लिमिटेड शिवराजपुर, कानपुर नगर में कोल्ड स्टोरेज चलाते हैं। दो किसानों ने कोल्ड स्टोरेज में आलू का भंडारण किया था। इस दौरान याची कंपनी से दो किसानों ने 9.3.2018 को 4,09,022/- रुपये का ऋण लिया, लेकिन वापस नहीं किया।
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याची कंपनी ने खुद को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 (एमएसएमईडी अधिनियम) के तहत पंजीकृत होने का दावा किया। साथ ही मीडियम इंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल, कानपुर नगर में वसूली के लिए दावा किया। एमएसएमईडी अधिनियम के तहत 18% प्रति वर्ष की दर से ब्याज के साथ कुल 6,35,873 रुपये का दावा किया गया था। काउंसिल का निर्णय 25.11.2022 को आया। इसके विरोध में याची कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई।

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याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने कहा, यदि लागू आदेश को रद्द नहीं किया गया, तो गलत मिसाल होगी, क्योंकि यदि किसान ऋण लेने के बाद वापस नहीं करता है, तो याचिकाकर्ता के पास इसकी वसूली के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं होगा। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने याचिका का पुरजोर विरोध किया। कहा, याचिकाकर्ता को एमएसएमईडी अधिनियम के तहत किसी भी वित्तीय सेवाओं के लिए पंजीकृत नहीं किया गया है।

कोर्ट ने कहा,ऋण वितरण के समय अर्थात 9.3.2018 को याची कंपनी एमएसएमईडी अधिनियम के तहत वित्तीय सेवाओं की श्रेणी में पंजीकृत नहीं थी। इस प्रकार याचिकाकर्ता इसके तहत किसी भी राहत का हकदार नहीं है। कोर्ट ने याचिका को निराधार मानते हुए खारिज कर दिया।

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