कामर्शियल कोर्ट में होगा वाणिज्यिक विवादों का निस्तारण
बड़े वाणिज्यिक विवादों के लिए अब सिविल कोर्ट के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। देश के आर्थिक विकास को गति देने के इरादे से देश भर में अलग कामर्शियल कोर्ट बनाई जा रही है। इनमें एक करोड़ रुपये से अधिक के विवाद सुने जाएंगे तथा छह माह में निस्तारण कर दिया जाएगा। अभी तक ऐसे मामले सिविल कोर्टों में दाखिल होते थे जहां मुकदमों की अत्यधिक संख्या होने के कारण वादी को फैसले के लिए वर्षों इंतजार करना पड़ता था। कामर्शियल कोर्ट के फैसलों को अपीलेट डिविजन में चुनौती दी जा सकेगी। अपीलेट डिविजन हाईकोर्ट में स्थापित किया जाएगा।
कामर्शियल कोर्ट जिला अदालतों में ही स्थापित की जाएंगी। प्रदेश सरकार मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से इन पीठों का गठन करेंगे। कामर्शियल कोर्ट के गठन हेतु द कामर्शियल कोर्ट्स, कामर्शियल डिविजन एंड कामर्शियल अपीलेट डिविजन ऑफ हाईकोर्ट्स बिल 2015 लोक सभा और राज्य सभा से पारित हो चुका है। कामर्शियल कोर्ट के फैसलों के खिलाफ अपील हाईकोर्ट में हो सकेगी। मुकदमों के शीघ्र निस्तारण के लिए बिल में समयबद्ध फैसले का प्रावधान किया गया है। यदि कोई पक्ष अनावश्यक विलंब करता है तो कामर्शियल कोर्ट उस पर तीन हजार रुपये का जुर्माना लगा सकेगी।
कामर्शियल कोर्ट में मुख्यत: वाणिज्यिक विवाद बैंकिंग, बीमा, संविदा, बौद्धिक संपदा, पार्टनरशिप, एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट आदि के विवादों को सुनने का अधिकार होगा। यहां ऋण वसूली अधिकरण के फैसले के खिलाफ भी याचिका दाखिल हो सकेगी। शर्त यह होगी कि विवाद एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का होना चाहिए। इससे कम मूल्य के विवादों की सुनवाई पूर्व की तरह सिविल अदालतों में ही होगी।