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सिर्फ डिग्री, मेडल देने तक सीमित न रहें विश्वविद्यालय: राज्यपाल आनंदी बेन

Thu, 04 Mar 2021 08:56 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 Mar 2021 08:56 PM IST
सार

  • कहा, भगवान राम के दर्शन से ज्यादा गरीब बच्चों की मदद में है आत्मसंतुष्टि

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College to come to adopt Anganwadi centers: Governor Anandi Ben
prayagraj news : आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों को बिस्किट का वितरण करतीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। - फोटो : prayagraj

विस्तार

भगवान राम के दर्शन से ज्यादा आत्मसंतुष्टि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले गरीब बच्चों की सेवा में मिलती है। यह बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने मेडल और उपाधि पाने वाले शिक्षार्थियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यहां से एक लक्ष्य निर्धारित करके निकलें। जहां भी जाएं सबको साथ लेकर चलें और समाज की जो भी समस्याएं हैं, उसे दूर करने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहें।

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prayagraj news : आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे का अन्नप्राशन करातीं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल। - फोटो : prayagraj

उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि वहां गरीब बच्चे आते हैं। अगर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय और सरकारी एवं निजी कॉलेज एक-एक आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद ले लें तो पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प हो जाएगा। राज्यपाल ने बताया कि लखनऊ में यह कवायद शुरू की गई। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर तकरीबन 55 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसमें बच्चों की शैक्षिक सामग्री, खेल उपकरण आदि शामिल हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेने वाले एक विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों से कहा कि केंद्रों में खुद जाएं और वहां की स्थिति देखें। आपको पता चलेगा कि भगवान राम के दर्शन में जो आत्म संतोष मिलता है, एक आंगनबाड़ी केंद्र को 55 हजार रुपये का संसाधन देने में उससे ज्यादा आत्म संतोष मिलेगा। 

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राज्यपाल आनंदी बेन पटेल - फोटो : amar ujala
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री देने तक सीमित न रहें। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने जो भी गांव गोद लिए हैं, यह सुनिश्चित करें कि वहां रहने वाला हर बच्चा प्राइमरी तक की पढ़ाई के लिए स्कूल जाए, तभी नई शिक्षा नीति के तहत 50 फीसदी युवाओं को वर्ष 2030 तक उच्च शिक्षा से जोड़ा जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दहेज जैसी सामाजिक कुप्रथा का उन्मूलन अति आवश्यक है। उपाधि पाने वाली छात्राओं का आह्वान किया कि वे सब मिलकर इस तरह की कुरीतियों को दूर भागाएं। उन्होंने कहा कि छात्र विश्वविद्यालयों के भवन और चहारदीवारी से बाहर निकलें। अगर कोई छात्र संगीत या स्पोर्ट्स में रुचि लेता है तो वह गरीब बच्चों को इसी की ट्रेनिंग दे। समाज के विकास में उसका कुछ न कुछ योगदान जरूर हो। शिक्षार्थियों से संकल्प लेने को कहा कि जहां भी जाएं, एक अच्छा वातावरण बनाएं।
 

एकेटीयू के संस्थान आंगनबाड़ी केंद्रों को लेंगे गोद, हुई शुरुआत

डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के संबद्ध कालेज आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेंगे और उसमें सभी सुविधाएं मुहैया कराएंगे। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। आंगनबाड़ी केंद्र में आईं राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय से प्रदेश में करीब 800 संस्थान जुड़े हैं। यदि सभी संस्थान पांच-पांच आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेते हैं तो चार हजार केंद्रों में सभी सुविधाएं होंगी। इसी क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर विनय कुमार पाठक ने बताया कि इंस्टीट्यूशनल सोशल रिस्पांसबिलिटी फंड की स्वीकृति की गई है। इसके अंतर्गत एक करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसी क्रम में प्रयागराज में युनाइटेड ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन ने बख्तियारी समेत 11 आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लिया है। संस्थान की ओर से बख्तियारी केंद्र को आवश्यक वस्तुएं भी उपलब्ध कराईं गईं।
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