सिर्फ डिग्री, मेडल देने तक सीमित न रहें विश्वविद्यालय: राज्यपाल आनंदी बेन
- कहा, भगवान राम के दर्शन से ज्यादा गरीब बच्चों की मदद में है आत्मसंतुष्टि
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भगवान राम के दर्शन से ज्यादा आत्मसंतुष्टि आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले गरीब बच्चों की सेवा में मिलती है। यह बात राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने मेडल और उपाधि पाने वाले शिक्षार्थियों को समाज सेवा के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यहां से एक लक्ष्य निर्धारित करके निकलें। जहां भी जाएं सबको साथ लेकर चलें और समाज की जो भी समस्याएं हैं, उसे दूर करने के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहें।
उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि वहां गरीब बच्चे आते हैं। अगर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय और सरकारी एवं निजी कॉलेज एक-एक आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद ले लें तो पूरे प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों का कायाकल्प हो जाएगा। राज्यपाल ने बताया कि लखनऊ में यह कवायद शुरू की गई। एक आंगनबाड़ी केंद्र पर तकरीबन 55 हजार रुपये का खर्च आ रहा है। इसमें बच्चों की शैक्षिक सामग्री, खेल उपकरण आदि शामिल हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेने वाले एक विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार और कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों से कहा कि केंद्रों में खुद जाएं और वहां की स्थिति देखें। आपको पता चलेगा कि भगवान राम के दर्शन में जो आत्म संतोष मिलता है, एक आंगनबाड़ी केंद्र को 55 हजार रुपये का संसाधन देने में उससे ज्यादा आत्म संतोष मिलेगा।