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संस्कृति पर कुठाराघात है पानी का बाजारीकरण
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Coca cola and Pepsi
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। स्वराज विद्यापीठ की ओर से आयोजित स्वराज महोत्सव का पहला दिन पानी के नाम केंद्रित रहा। वक्ताओं ने कहा, जल के प्रति सामुदायिक भावना की समझ हमारे स्वावलंबन का हिस्सा है। वहीं आज कंपनियों की ओर से पानी को बोतल में बंद करके भ्रम फैलाया जा रहा है कि इसके अलावा मिलने वाला पानी अशुद्ध है । पानी व इसके स्रोतों पर कंपनियों का कब्जा बढ़ता जा रहा है। पानी पर कब्जा अर्थात जीवन पर कब्जा। पानी का बाजारीकरण देश की संस्कृति पर कुठाराघात है।
शुक्रवार को ‘जल है तो हम हैं’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता लोकसमिति के नंद लाल मास्टर ने कहा, तीसरा विश्वयुद्ध बम, गोलों और बारूद से नहीं पानी के लिए लड़ा जाएगा। कोल्ड ड्रिंक्स कंपनियां पानी का अनर्गल दोहन कर रही हैं। बतौर अध्यक्ष प्रो.बिमल कुमार ने कहा, आधुनिक विकास का वर्तमान मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के अनर्गल दोहन व प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर टिका है। संचालक डॉ.कृष्ण स्वरूप आनन्दी ने कहा कि जल पर किसी कंपनी, किसी व्यक्ति, किसी सरकार का नहीं बल्कि सबका समान रूप से अधिकार है। पानी के संरक्षण एवं संचयन की आवश्यकता है। पानी बिक्त्रस्ी या व्यापार की वस्तु नहीं है।
लोकसमिति के साथियों ने ‘पर्वत की चिट्ठी ले जाना तू सागर की ओर। नदी तू बहती रहना, नदी तू बहती रहना’ गीत प्रस्तुत किया। इससे पहले बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामानों के होलिका दहन से स्वराज महोत्सव की शुरुआत हुई। स्वराज विद्यापीठ में हुए कार्यक्त्रस्म में प्रो.रमाचरण त्रिपाठी, डॉ राम प्रकाश सिंह, प्रो.रवींद्र शुक्ल, प्रो.रामाज्ञा राय, सुमन शर्मा मौजूद थीं।
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स्वराज महोत्सव में आज
स्वराज महोत्सव के तहत अरैल में त्रिवेणी पुष्प के निकट पौधरोपण सुबह 11 बजे।
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शुक्रवार को ‘जल है तो हम हैं’ विषयक संगोष्ठी में मुख्य वक्ता लोकसमिति के नंद लाल मास्टर ने कहा, तीसरा विश्वयुद्ध बम, गोलों और बारूद से नहीं पानी के लिए लड़ा जाएगा। कोल्ड ड्रिंक्स कंपनियां पानी का अनर्गल दोहन कर रही हैं। बतौर अध्यक्ष प्रो.बिमल कुमार ने कहा, आधुनिक विकास का वर्तमान मॉडल प्राकृतिक संसाधनों के अनर्गल दोहन व प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर टिका है। संचालक डॉ.कृष्ण स्वरूप आनन्दी ने कहा कि जल पर किसी कंपनी, किसी व्यक्ति, किसी सरकार का नहीं बल्कि सबका समान रूप से अधिकार है। पानी के संरक्षण एवं संचयन की आवश्यकता है। पानी बिक्त्रस्ी या व्यापार की वस्तु नहीं है।
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लोकसमिति के साथियों ने ‘पर्वत की चिट्ठी ले जाना तू सागर की ओर। नदी तू बहती रहना, नदी तू बहती रहना’ गीत प्रस्तुत किया। इससे पहले बहुराष्ट्रीय कंपनियों के सामानों के होलिका दहन से स्वराज महोत्सव की शुरुआत हुई। स्वराज विद्यापीठ में हुए कार्यक्त्रस्म में प्रो.रमाचरण त्रिपाठी, डॉ राम प्रकाश सिंह, प्रो.रवींद्र शुक्ल, प्रो.रामाज्ञा राय, सुमन शर्मा मौजूद थीं।
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स्वराज महोत्सव में आज
स्वराज महोत्सव के तहत अरैल में त्रिवेणी पुष्प के निकट पौधरोपण सुबह 11 बजे।