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Prayagraj News: सीएम के बयान से सात लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों में उम्मीद
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प्रतियोगी छात्रों की मांगों का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी संज्ञान लिया है। लखनऊ में उन्होंने साफ किया कि छात्रों को मौका मिलना चाहिए, इसके लिए एनसीटीई को पत्र भेजा जाय। एक तरह से छात्रों के आंदोलन के सामने सरकार भी बैकफुट होती दिख रही है।
अनशन के करीब 18 दिन बाद मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश भर के सात लाख से ज्यादा प्रतियोगी छात्रों में उम्मीद जगी है। टीजीटी-पीजीटी की भर्ती प्रक्रिया पुरानी नियमावली से कराई जा सकती है या फिर कोई और भी संशोधन होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रतियोगी छात्र मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भी लिखित में आदेश चाहते हैं।
भारत सरकार के अंतर्गत एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) शिक्षकों की योग्यता तय करती है। प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की भर्ती के लिए क्या योग्यता होगी, इसका निर्धारण एनसीटीई ही करती है।
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राज्य सरकार उसी गाइडलाइन के हिसाब से अपने यहां मानक तय करती है। यही कारण रहा कि इस बार टीजीटी पीजीटी की भर्ती में टीईटी व बीएड की अनिवार्यता लागू कर दी गई। बदलाव से तैयारी करने वाले छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई।
सपा सांसद को डीसीपी ने रोका
देर शाम सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। वह प्रतियोगी छात्रों के बीच में जाना चाहते थे लेकिन डीसीपी सिटी सागर जैन ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। उन्हाेंने सांसद का हाथ पकड़कर बाहर जाने को कहा तो सांसद बिफर गए। उन्होंने कहा, वह छात्रों की बात सुनने आए हैं, एक जनप्रतिनिधि को लोगों से मिलने के लिए रोका जा रहा है। बाद में गेट के बाहर ही धरने पर बैठे छात्रों से उन्होंने वार्ता की। उन्होंने कहा, मैं आपके मांगों के समर्थन में हूं। इस दौरान निदेशालय के अंदर से लेकर बाहर तक बड़ी संख्या में फोर्स व पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे।
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अनशन के करीब 18 दिन बाद मुख्यमंत्री ने उनकी मांगों का संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश भर के सात लाख से ज्यादा प्रतियोगी छात्रों में उम्मीद जगी है। टीजीटी-पीजीटी की भर्ती प्रक्रिया पुरानी नियमावली से कराई जा सकती है या फिर कोई और भी संशोधन होने की उम्मीद है। हालांकि, प्रतियोगी छात्र मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद भी लिखित में आदेश चाहते हैं।
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भारत सरकार के अंतर्गत एनसीटीई (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन) शिक्षकों की योग्यता तय करती है। प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर शिक्षकों की भर्ती के लिए क्या योग्यता होगी, इसका निर्धारण एनसीटीई ही करती है।
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राज्य सरकार उसी गाइडलाइन के हिसाब से अपने यहां मानक तय करती है। यही कारण रहा कि इस बार टीजीटी पीजीटी की भर्ती में टीईटी व बीएड की अनिवार्यता लागू कर दी गई। बदलाव से तैयारी करने वाले छात्रों की नाराजगी और बढ़ गई।
सपा सांसद को डीसीपी ने रोका
देर शाम सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज शिक्षा निदेशालय पहुंचे थे। वह प्रतियोगी छात्रों के बीच में जाना चाहते थे लेकिन डीसीपी सिटी सागर जैन ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। उन्हाेंने सांसद का हाथ पकड़कर बाहर जाने को कहा तो सांसद बिफर गए। उन्होंने कहा, वह छात्रों की बात सुनने आए हैं, एक जनप्रतिनिधि को लोगों से मिलने के लिए रोका जा रहा है। बाद में गेट के बाहर ही धरने पर बैठे छात्रों से उन्होंने वार्ता की। उन्होंने कहा, मैं आपके मांगों के समर्थन में हूं। इस दौरान निदेशालय के अंदर से लेकर बाहर तक बड़ी संख्या में फोर्स व पुलिस के आला अधिकारी मौजूद रहे।