450 साल बाद मूल अक्षयवट आम लोगों के लिए खुला, किले में की गई सरस्वती प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा
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संगम तट पर अकबर के किले में स्थित मूल अक्षयवट का फाटक बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम जनता के लिए खोलवा दिया। करीब 450 वर्ष बाद पहली बार किले में आम लोगों के लिए मूल अक्षयवट के दर्शन की शुरुआत हुई। सीएम ने मुख्य प्रवेश द्वार पर लगे शिलापट का अनावरण करने के बाद सबसे पहले भीतर प्रवेश किया। उन्होंने पवित्र मूल अक्षयवट की जड़ों की परिक्रमा की। इसके बाद सरस्वती कूप पर मंत्रोच्चार के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा की। प्रतिमा का अनावरण किया। सीएम ने पातालपुरी में देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों की प्रतिमाओं के भी दर्शन किए।
मुख्यमंत्री ने मूल अक्षयवट की परिक्रमा और मां सरस्वती की पूजा के बाद इन क्षणों को सनातनधर्मियों के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने मूल अक्षयवट खोलने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण और सेना का आभार जताया। कहा कि पीएम ने देश के करोड़ों सनातनधर्मियों की आस्था का सम्मान करते हुए मूल अक्षयवट को खोलने की घोषणा की थी। अब देश के सनातनधर्मी त्रिवेणी की पावन धारा में डुबकी लगाने के साथ ही मूल अक्षयवट का भी दर्शन कर सकेंगे।
सीएम ने बताया कि पीएम की प्रेरणा से ही यह संभव हो सका है। उन्होंने बताया कि अभी तक गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में डुबकी लगाने वाले मां सरस्वती की धारा के बारे में पूछते थे। अब वह सरस्वती कूप पर मां सरस्वती की भव्य प्रतिमा की पूजा और परिक्रमा कर सकते हैं। मां सरस्वती की प्रतिमा को भी दर्शन के लिए खोल दिया गया है। इससे पहले सीएम पातालपुरी मंदिर भी गए। वहां महंत रवींद्र नाथ योगेशवर योगी, मुकेश नाथ योगी के अलावा हेमेंद्र नाथ ने उनको माला पहनाई। सीएम ने पातालपुरी के मंहत से वहां की सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
मूल अक्षयवट में दर्शन के लिए लगी कतार
सीएम योगी आदित्यनाथ के एलान के बाद बृहस्पतिवार को मूल अक्षयवट में दर्शन के लिए आम श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई। देर शाम तक बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं ने मूल अक्षयवट में हाजिरी लगाई। कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच मूल अक्षयवट के साथ ही सरस्वती कूप में भी दर्शन शुरू हो गया है।
अक्षय पुण्यदायी है अद्वितीय अक्षयवट
मूल जड़ की तीन शाखाओं में विष्णु, ब्रह्मा, महेश, सिर्फ प्रयाग में भगवान विष्णु के दो चरण कमल तीर्थराज प्रयागराज के संगम क्षेत्र में अद्भुत, अद्वितीय, आलौकिक अक्षयवट भी है, जिसके दर्शन मात्र से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि सृष्टि के प्रलय के समय भगवान विष्णु ने अक्षयवट पर आसन लगाकर पुन: नई सृष्टि की रचना की थी। इसके आधार में स्वयं भगवान विष्णु का वास है। प्रयाग महात्म्य के अध्याय 72 के अनुसार, ‘प्रयागं वैष्णवं क्षेत्रं बैकुंठाधिकं मम, वृक्षोक्षयवटस्त्रत्र मदाधारो विराजते’ अर्थात प्रयाग मेरा क्षेत्र है,वह मेरे लिए बैकुंठ से भी अधिक प्रिय है क्योंकि वहीं अक्षयवट है, जिसके आधार में मैं विराजता हूं। वस्तुत: अक्षयवट को ब्रह्मांड का स्वरूप माना गया है, ऐसे में इसकी परिक्रमा से संपूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा का फल मिलता है।