{"_id":"5a356fb44f1c1b9f678c1c12","slug":"closed-date-should-be-closed-president-covind","type":"story","status":"publish","title_hn":"बंद होनी चाहिए तारीख पर तारीख: राष्ट्रपति कोविंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बंद होनी चाहिए तारीख पर तारीख: राष्ट्रपति कोविंद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 17 Dec 2017 01:28 AM IST
विज्ञापन
इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट के विस्तार के क्रम में न्यायग्राम की आधारशिला रखने हाईकोर्ट आए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को कहा कि मुकदमों में अनावश्यक स्थगन (एडजर्नमेंट) की परंपरा बंद होनी चाहिए। आम आदमी को त्वरित न्याय दिलाने का यही एक तरीका है। उन्होंने कहा कि अदालतों में स्थानीय भाषा में बहस करने का चलन बढ़ना चाहिए, ताकि आम आदमी को अपने मुकदमे की सही जानकारी हो सके।
राष्ट्रपति ने कहा कि अदालती फैसलों के हिंदी और स्थानीय भाषा में अनुवाद की सुविधा भी होनी चाहिए, जिससे कि वादकारी अपने पक्ष या विपक्ष में हुए फैसले को आसानी से समझ सके। उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां फैसलों का हिंदी में अनुवाद उपलब्ध कराया जाता है। कुछ अन्य उच्च न्यायालय भी ऐसा कर रहे हैं। इससे वादकारी को अपने वकील पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कहा कि देरी से मिला न्याय अन्याय के समान है, इसलिए तारीख पर तारीख (एडजर्नमेंट) से बचना चाहिए। न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर न्यायिक ढांचे को और मजबूत बनाया जा सकता है। अदालतों में जजों की कमी है और देश में तीन करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं और इसमें से 40 लाख सिर्फ उच्च न्यायालयों के हैं। छह लाख मुकदमे दस वर्ष से अधिक पुराने हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी और देश की प्रथम महिला सविता कोविंद भी मौजूद थीं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास समारोह के मौके पर कहा कि सरकार ने लोक हित की तमाम योजनाएं प्रारंभ की हैं, मगर कई बार इनको लेकर दाखिल होनी वाली जनहित याचिकाओं में यह योजनाएं त्रिशूल पर लटक जाती हैं। कई लोग सिर्फ मीडिया में बने रहने और लोकप्रियता के लिए जनहित याचिकाएं दाखिल करते हैं, जिससे जनता के हित की योजनाएं बाधित होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आम आदमी को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
विज्ञापन
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि न्यायग्राम का निर्माण समयसीमा के भीतर पूरा हो इसके लिए रिव्यू कमेटी बनाई जाए। उम्मीद जताई कि ज्यूडिशियल एकेडमी बनने से प्रदेश में न्यायप्रणाली बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण ने न्यायिक अधिकारियों के निरंतर प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि बदलते वक्त और प्रौद्योगिकी की प्रगति से कानून की चुनौतियां भी बढ़ी हैं, इससे निपटने के लिए न्यायिक अधिकारियों को जागरूक करना जरूरी है।
जस्टिस आरके अग्रवाल ने कहा कि कानून का दायरा बढ़ा है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों की गुणवत्ता में विकास आवश्यक है।
इसमें न्यायिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। इसी क्रम में मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले ने राष्ट्रपति और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मुकदमों का बोझ कम करने की दिशा में सूबे की न्यायपालिका में कई उल्लेखनीय काम किए हैं। ई-कोर्ट की स्थापना और पेपर लेस फाइलिंग के साथ मुकदमों के डिजिटाइजेशन की दिशा में हमने उल्लेखनीय काम किए हैं। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच पर हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी, एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके जैन भी मौजूद थे। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्जवलन और राष्ट्रगान के साथ हुई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने समारोह स्थल से बटन दबाकर न्यायग्राम के शिलापट्ट का अनावरण किया।
विज्ञापन
राष्ट्रपति ने कहा कि अदालती फैसलों के हिंदी और स्थानीय भाषा में अनुवाद की सुविधा भी होनी चाहिए, जिससे कि वादकारी अपने पक्ष या विपक्ष में हुए फैसले को आसानी से समझ सके। उन्होंने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां फैसलों का हिंदी में अनुवाद उपलब्ध कराया जाता है। कुछ अन्य उच्च न्यायालय भी ऐसा कर रहे हैं। इससे वादकारी को अपने वकील पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। कहा कि देरी से मिला न्याय अन्याय के समान है, इसलिए तारीख पर तारीख (एडजर्नमेंट) से बचना चाहिए। न्यायपालिका के समक्ष चुनौतियों का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी और अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर न्यायिक ढांचे को और मजबूत बनाया जा सकता है। अदालतों में जजों की कमी है और देश में तीन करोड़ से अधिक मुकदमे लंबित हैं और इसमें से 40 लाख सिर्फ उच्च न्यायालयों के हैं। छह लाख मुकदमे दस वर्ष से अधिक पुराने हैं। कार्यक्रम में राष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी और देश की प्रथम महिला सविता कोविंद भी मौजूद थीं।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिलान्यास समारोह के मौके पर कहा कि सरकार ने लोक हित की तमाम योजनाएं प्रारंभ की हैं, मगर कई बार इनको लेकर दाखिल होनी वाली जनहित याचिकाओं में यह योजनाएं त्रिशूल पर लटक जाती हैं। कई लोग सिर्फ मीडिया में बने रहने और लोकप्रियता के लिए जनहित याचिकाएं दाखिल करते हैं, जिससे जनता के हित की योजनाएं बाधित होती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार आम आदमी को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
विज्ञापन
राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि न्यायग्राम का निर्माण समयसीमा के भीतर पूरा हो इसके लिए रिव्यू कमेटी बनाई जाए। उम्मीद जताई कि ज्यूडिशियल एकेडमी बनने से प्रदेश में न्यायप्रणाली बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जस्टिस अशोक भूषण ने न्यायिक अधिकारियों के निरंतर प्रशिक्षण पर जोर देते हुए कहा कि बदलते वक्त और प्रौद्योगिकी की प्रगति से कानून की चुनौतियां भी बढ़ी हैं, इससे निपटने के लिए न्यायिक अधिकारियों को जागरूक करना जरूरी है।
जस्टिस आरके अग्रवाल ने कहा कि कानून का दायरा बढ़ा है, इसलिए न्यायिक अधिकारियों की गुणवत्ता में विकास आवश्यक है।
इसमें न्यायिक शिक्षा का बड़ा महत्व है। इसी क्रम में मुख्य न्यायाधीश डीबी भोसले ने राष्ट्रपति और अन्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि मुकदमों का बोझ कम करने की दिशा में सूबे की न्यायपालिका में कई उल्लेखनीय काम किए हैं। ई-कोर्ट की स्थापना और पेपर लेस फाइलिंग के साथ मुकदमों के डिजिटाइजेशन की दिशा में हमने उल्लेखनीय काम किए हैं। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। मंच पर हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष अनिल तिवारी, एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पीके जैन भी मौजूद थे। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्जवलन और राष्ट्रगान के साथ हुई। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने समारोह स्थल से बटन दबाकर न्यायग्राम के शिलापट्ट का अनावरण किया।