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Prayagraj News: टावरों का जंजाल कम कर इंटरनेट स्पीड बढ़ाने का दावा

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 26 Aug 2025 02:50 AM IST
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Claims to increase internet speed by reducing the mess of towers
डॉ संदीप कुमार सिंह ईसीई विभाग एमएनएनआईटी - फोटो : संवाद
मोबाइल टावर से निकलने वालीं हानिकारक तरंगों के प्रभाव को कम किया जा सकेगा। कारण कि दो की जगह एक ही टावर से संबंधित क्षेत्र में उपभोक्ताओं को बेहतर इंटरनेट सुविधा मिलेगी। यह दावा है एमएनएनआईटी के असिस्टेंट प्रोफेसर संदीप कुमार सिंह का। इनका शोध आईट्रिपलई इंटरनेट ऑफ थिंग्स जर्नल में प्रकाशित हो चुका है।
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एमएनएनआईटी के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग (ईसीई) विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर और एनएसवाईएसयू ताइवान में कार्य कर चुके संदीप कुमार सिंह ने बताया कि वे ऐसा एल्गोरिदम और डिवाइस तैयार कर रहे हैं जो 6-जी तकनीक में सहायक होगा। साथ ही उर्जा की भी बचत करेगा।
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प्रोजेक्ट का उद्देश्य होलोग्राफिक री-कॉन्फिगरेबल सरफेस (एचआरआईएस) और रेट-स्प्लिटिंग मल्टीपल एक्सेस (आरएसएमए) तकनीक को मिलाकर 6-जी के लिए एक नई संचार प्रणाली विकसित करना है। इसके तहत तैयार की गई डिवाइस को ऊंची इमारतों या टावरों पर लगाकर कवरेज और नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) ने प्रोजेक्ट के लिए 70 लाख रुपये की मंजूरी दी है। संवाद
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95 फीसदी तक बिजली की होगी बचत
वर्तमान में कवरेज बढ़ाने के लिए जो रिले उपयोग होते हैं, वे एक्टिव डिवाइस हैं। इनमें कई आरएफ चेन (जैसे एम्पलीफायर, फिल्टर, मिक्सर आदि) होते हैं। इसके कारण इनकी डिजाइन जटिल होती है। इससे बिजली की खपत भी अधिक होती है। एक सामान्य रिले सिस्टम को काम करने के लिए 10 वॉट तक बिजली की आवश्यकता पड़ सकती है। वहीं, एचआरआईएस एक पैसिव डिवाइस है। यह स्वयं सिग्नल उत्पन्न नहीं करती बल्कि उसे परावर्तित और नियंत्रित करती है। इसे केवल नियंत्रण सिग्नल के लिए ऊर्जा चाहिए जो कुछ मिलीवॉट से लेकर एक वॉट से भी कम हो सकती है। ऐसे में पारंपरिक रिले की तुलना में इस डिवाइस से लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक बिजली की बचत होगी।



आरएसएमए आधारित मल्टीपल एक्सेस एल्गोरिदम और एचआरआईएस प्रोटोटाइप विकसित कर रहे हैं। एचआरआईएस को ऊंची इमारतों या टावरों पर लगाया जा सकता है। यह बिजली की ज्यादा खपत किए बिना सिग्नल को नियंत्रित करके लोगों तक हाई-स्पीड और स्थिर कनेक्शन पहुंचाने में मददगार साबित होगा। - डॉ. संदीप कुमार सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, ईसीई विभाग, एमएनएनआईटी
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