सीजेआई बोले : न्याय में मध्यस्थता की भूमिका पुराने जमाने से उपयोगी, नई तकनीकि से भी रूबरू हों अधिवक्ता
उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोग भी अपने काम को जनता के बीच रखें, जिससे कि यह सवाल न खड़ा हो सके इन्हें बहुत ज्यादा छुट्टी मिलती है। उन्होंने अधिवक्ताओं को डिजिटलाइज प्लेटफार्म पर काम करने और उसे व्यवहार में लाने की जरूरत बताई।
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भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के कन्वेंशन सेंटर में नवनिर्मित मध्यस्थता केंद्र और हाईकोर्ट परिसर स्थित जजेज लाइब्रेरी का उद्घाटन किया। सीजेआई ने कहा कि न्याय व्यस्था में मध्यस्थता की भूमिका पुराने जमाने से ही है। ब्रिटिश शासन के दौर में भी न्यायिक व्यवस्था में भी कानूनी विवादों के निस्तारण करने में उपयोगी रही है। आशा है कि मध्यस्थता केंद्र मुकदमों के बोझ को कम करने में सहायक होगा। जटिल मुद्दे भी मध्यस्थता के जरिए सुलझाए जा सकेंगे।
सीजेआई चंद्रचूड़ ने यह भी कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस मध्यस्थता केंद्र को प्रयागराज मध्यस्थता केंद्र के नाम से जाना जाएगा। उन्होंने मध्यस्थता में बार के रोल को भी रेखांकित किया। कहा कि वादों के निस्तारण में वह भी अपनी भूमिका निभाएं। वरिष्ठ अधिवक्ता भी अपना पूरा सहयोग दें।
सीजेआई ने जिला न्यायालयों में लंबित आपराधिक मुकदमों का भी जिक्र किया। कहा कि आपराधिक मामलों की सुनवाई करते समय जमानत देने में किसी तरह का दबाव न महसूस करें। उन्होंने जिला न्यायलयों के काम करने के तरीके में भी बदलाव की जरूरत बताई। इसके साथ ही जिला न्यायालयों में बुनियादी सुविधाओं के विकास की भी जरूरत बताई। सीजेआई ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को भी गुजरात और बिहार हाईकोर्ट की तरह सुनवाई का सीधा प्रसारण करने का सुझाव दिया।
डिजिटलाइ प्लेटफार्म पर काम करने की बताई जरूरत
उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था से जुड़े लोग भी अपने काम को जनता के बीच रखें, जिससे कि यह सवाल न खड़ा हो सके इन्हें बहुत ज्यादा छुट्टी मिलती है। उन्होंने अधिवक्ताओं को डिजिटलाइज प्लेटफार्म पर काम करने और उसे व्यवहार में लाने की जरूरत बताई। कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता भी इसके साथ जुड़े जिससे न्यायिक व्यवस्था को और जनउपयोगी बनाया जा सके। कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्थल, न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा, न्यायमूर्ति राजेश बिंदल ने भी अपने विचार रखे।