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तीन तलाक पर मिलीजुली प्रतिक्रिया, समर्थन में भी आए मुफ्ती

Thu, 20 Sep 2018 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Thu, 20 Sep 2018 01:48 AM IST
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City Kazi said, do exercises on Sharai
तीन तलाक बिल - फोटो : SELF
केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से बुधवार को तीन तलाक मुद्दे पर अध्यादेश की राह पकड़ने के बाद यह मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। देश की सर्वोच्च अदालत के फैसले के बाद उलेमा ने कुरान और हदीस की रोशनी में ही इसे लाने और अमल करने की बात कही थी। अब अध्यादेश के कदम के बाद उलेमा ने मिली-जुली राय जाहिर की है।
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शहर काजी मुफ्ती शफीक अहमद शरीफी का कहना है कि जब तीन तलाक का मुद्दा उठा था, तब मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की पहल पर देश भर में इसके खिलाफ मुहिम चलाई गई थी। लाखों मुसलमानों के दस्तख्वत से सरकार के सामने अपना पक्ष रखा गया था। इसमें बड़ी संख्या में अवाम के लोग शामिल थे। बहरहाल अध्यादेश की राह पर आने के हुकूमत ही मंशा वही जाने।
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मेरा अब भी मानना है कि कुरान और हदीस में तमाम घरेलू (आयली) मसलों का हल मौजूद है, लिहाजा मुसलमान उस पर अमल करें। जिन्हें अल्लाह और रसूल से मोहब्बत है, वह खुदा और रसूल के कानून पर अमल करेंगे। वैसे भी एक मजलिस में तीन तलाक देने से जरूर एतराज करें। जब कभी मियां-बीबी में निबाह न करने की सूरत पैदा हो तो सिर्फ एक ही तलाक देना बेहतरीन तरीका है। इसमें इस बात की गुंजाइश रहेगी कि इद्दत गुजरने के बाद मियां-बीबी फिर साथ रहना चाहें तो सिर्फ निकाह कर लेना ही काफी रहेगा, इसमें हलाला की जरूरत नहीं पड़ेगी। इसीलिए एक तलाक को तलाके आसन और तलाके सुन्नत कहते हैं।
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ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला शाखा की शहर अध्यक्ष शाहिना परवीन खान ने दो टूक कहा कि यह अध्यादेश महिलाओं के हक में नहीं है। सरकार इसे बहुत जल्दबाजी में लेकर आई है, इसमें महिलाओं के लिए फायदा नहीं है।
इस्लामिक एजुकेशनल ऐंड रिसर्च आर्गनाइजेशन की महिला शाखा की अध्यक्ष और तकवा इस्लामिक स्कूल की प्रिंसिपल असमा शम्स कहती हैं, एक साथ तीन तलाक दे देना दस्तूर से लेकर तमाम दीनी रवायतों के खिलाफ है। लेकिन, संसद में कानून से पहले मुस्लिम स्कॉलर्स का पैनल बनाया जाना चाहिए जो आपसी सहमति से कानून का मसौदा तय करे। अगर सरकार दखल करती है तो फिर पर्सनल लॉ का मकसद ही बेमानी हो जाता है।

वहीं जामा मस्जिद वसीयाबाद के इमाम व खतीब मुफ्ती सैफुर्रहमान ने सरकार के फैसले को सही ठहराया है। कहा, जहां तक शरीयत गुंजाइश देती है, वहां तक सरकार के इस फैसले का समर्थन करेंगे। सरकार ने मुल्क के हक में बेहतर समझ कर ही ऐसा किया होगा। तमाम मुसलमानों से गुजारिश है कि इसके खिलाफ किसी भी तरह का प्रदर्शन न करें।
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