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High Court : बिजली विभाग की लापरवाही से दोनों हाथ गंवाने वाले बच्चे को मिलेगा 26.65 लाख का मुआवजा

Thu, 16 Apr 2026 06:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Apr 2026 06:50 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बचपन में बिजली विभाग की लापरवाही के चलते दोनों हाथ गंवाने वाले पीड़ितो को बड़ी राहत दी है।

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Child who lost both hands due to negligence of electricity department will get compensation of Rs 26.65 lakh
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बचपन में बिजली विभाग की लापरवाही के चलते दोनों हाथ गंवाने वाले पीड़ितो को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद (यूपीपीसीएल) पीड़ित को26.65 लाख रुपये का मुआवजा दे। यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकलपीठ ने पप्पू की प्रथम अपील पर दिया है।

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आगरा के नगला पदी स्थित प्राइमरी स्कूल के पास एक मार्च 1997 को सात साल की उम्र में याची पप्पू खेल रहा था। वहीं पर एक 11 हजार वोल्ट का खुले में ट्रांसफार्मर रखा हुआ था। इस ट्रांसफार्मर के चारों ओर कोई फेंसिंग या सुरक्षा घेरा नहीं था। पप्पू अचानक ट्रांसफार्मर की चपेट में आ गया। करंट के कारण बच्चे के दोनों हाथ गंभीर रूप से झुलस गया और डॉक्टरों को उसकी जान बचाने के लिए कंधे के नीचे से दोनों हाथ काटने पड़े।
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पीड़ित ने अपने पिता के माध्यम से मुआवजे के लिए वाद दायर किया था, जिसे वर्ष 2005 में ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि यह हादसा बच्चे की अपनी लापरवाही के कारण हुआ। इसके खिलाफ पीड़ित ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दायर की। हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह गलत ठहराया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 7 साल के बच्चे से तर्कसंगत सोच या सावधानी की उम्मीद नहीं की जा सकती और उस पर लापरवाही का आरोप नहीं लगाया जा सकता।

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कोर्ट ने अपने फैसले में कठोर दायित्व के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि बिजली एक खतरनाक वस्तु है और इसकी आपूर्ति करने वाली संस्था की यह जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करे। विभाग यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि बच्चा खुद ट्रांसफार्मर के पास गया था। हाईकोर्ट ने 26.65 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि यह राशि किसी राष्ट्रीयकृत बैंक या पोस्ट ऑफिस में एफडी की जाए, जिससे याची को मासिक ब्याज मिलता रहे और उसका जीवनयापन हो सके। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भी निर्देश दिया है कि वह पीड़ित को इस डिक्री का लाभ दिलाने में पूरी मदद करे।

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