Prayagraj : आग से झुलसकर मासूम की मौत, गृहस्थी जलने से भरण पोषण का संकट
कोरांव थाना क्षेत्र के भौंरहा गांव में शॉट सर्किट के कारण बुधवार शाम को अचानक छप्पर और घर में लगी आग से झुलसे मासूम की मौत के बाद बृहस्पतिवार को उसके परिजनों ने शहर के गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
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कोरांव थाना क्षेत्र के भौंरहा गांव में शॉट सर्किट के कारण बुधवार शाम को अचानक छप्पर और घर में लगी आग से झुलसे मासूम की मौत के बाद बृहस्पतिवार को उसके परिजनों ने शहर के गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। वहीं आग में पूरी गृहस्थी जल जाने के कारण परिवार के सामने भरण पोषण का संकट पैदा हो गया है।
बता दे कि बुधवार शाम को शॉर्ट सर्किट से छप्पर में आग पकड़ लिया। धुएं का गुबार व लपटें देख जब गांव के लोग एकत्रित हुए तो पूरे मड़हे में आग फैल चुकी थी। मड़हे के बाद ठीक पीछे स्थित पक्के घर में आग फैल गई। जिस छप्पर में शॉर्ट सर्किट से आग लगी उसके नीचे एक आठ साल का मासूम चंद्रशेखर पुत्र ज्ञानी लाल सो रहा था। वह छप्पर की लपटों से बचने के लिए पीछे पक्के घर के कमरे में घुस गया। आग छप्पर के बाद सीधे पक्के घर में फैल गई और आग से बचने के लिए मासूम पक्के घर में घुस गया।
इससे वह बुरी तरह से झुलस गया। उसे उपचार के लिए सीएचसी कोरांव लाया गया। चिकित्सकों ने उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। देर रात उपचार के दौरान चंद्रशेखर ने दम तोड़ दिया। मासूम के पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोगों ने शहर के गंगा घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया। थाना प्रभारी राकेश कुमार वर्मा से ने बताया कि मासूम चंद्रशेखर के शव को पोस्टमार्टम के लिए चीर घर भेज दिया गया है। परिजनों ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद प्रयागराज में ही गंगा घाट पर चंद्रशेखर का दाह संस्कार कर दिया गया।
गृहस्थी जलने से परिवार के सामने भरण पोषण का संकट
बुधवार को आग के कारण गृहस्थी का पूरा सामान जलकर राख हो गया। इससे घर में खाने के भी लाले पड़ गए हैं। ज्ञानी लाल के घर में रखे कपड़े, बर्तन, अनाज, चारपाई, आदि गृहस्थी के पूरे सामान जलकर राख हो गए हैं। परिवार के पास शरीर पर जितने कपड़े थे उतना ही शेष बचा है, बाकी सब आग में खाक हो गया है। बृहस्पतिवार को जब पीड़ित ज्ञानी लाल के घर जाकर पड़ताल की गई तो पता चला कि उसके घर में खाने के भी लाले पड़ गए हैं। कुछ अधजले सरसों, गेहूं व चावल सब एक में मिक्स दिखा। जिसे बचाने की कोशिश तो की गई लेकिन वह पूरी तरह से खाने योग्य नहीं था। ऐसे में पीड़ित परिवार के बेटे की जहां झुलस कर कर मौत हो गई, वहीं घर में खाने के लिए दाने भी नहीं बचे हैं। जिससे पूरा परिवार सदमे में था।
रोती बिलखती रही मां, परिजनों में छाया रहा मातम
आठ वर्षीय मासूम की मौत के बाद दूसरे दिन बृहस्पतिवार को मृतक चंद्रशेखर की मां अनुरा देवी जहां विलक-बिलख कर रो रही थी और बेटे को सामने लाने की बात कह रही थी। वही चंद्रशेखर का बड़ा भाई सिद्धार्थ बड़ी बहनों में सरोज देवी, सुनीता, दीपिका, खुशबू भी दहाड़े मार कर रो रहे थे। घर का मंजर ही कुछ ऐसा दिख रहा था कि घर में कोई भी चीज आग के आगोश में आने से बच नहीं पाया था। सब कुछ जलकर राख हो गया था। मंजर भयावह था। जो कोई भी पहुंचता था हादसा देखकर सब की आंखें नम हो जाती थी। मृतक दो भाई व चार बहनों में सबसे छोटा था। परिवार के लोगों ने बताया कि सबसे छोटा होने के कारण वह सबका दुलारा था।