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इविवि में छात्रनेता ने की आत्मदाह की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Tue, 28 Jun 2016 02:13 AM IST
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प्रवेश परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में इविवि कुलपति कार्यालय पर प्रदर्शन करते छात्र-छात्राएं , इस दौरान एक छात्र ने मिट्टी का तेल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर एक बार फिर परिसर का माहौल गरमा गया है। सोमवार को कुलपति दफ्तर पर धरना-प्रदर्शन के दौरान छात्रनेता मानस शर्मा ने आत्मदाह की कोशिश की। उसने शरीर पर मिट्टी का तेल छिड़क लिया था। वहां मौजूद अन्य छात्रों तथा पुलिस ने उसे तत्काल दबोच लिया। छात्रों के तीव्र विरोध के बावजूद पुलिस मानस को पुलिस लाइन ले गई। कानूनी प्रक्रिया के बाद उसे शाम को छोड़ दिया गया। छात्रसंघ पदाधिकारियों समेत कई अन्य छात्र नेताओं ने मांग नहीं माने जाने पर सामूहिक आत्मदाह की चेतावनी दी है।
विश्वविद्यालय की शोध (क्रेट) और परास्नातक (पीजीएटी) प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता तथा नकल की शिकायत है। इससे नाराज छात्र-छात्रा परीक्षा निरस्त करा दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वे प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को बर्खास्त करने की भी मांग कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार छात्र-छात्राओं का छात्रसंघ भवन पर जमावड़ा सोमवार को हुआ। उन्हाेंने सामूहिक आत्मदाह की भी चेतावनी दी थी। वहां से विद्यार्थी नारेबाजी करते हुए कुलपति दफ्तर पहुंचे। छात्र कुलपति से वार्ता की मांग कर रहे थे, लेकिन वह मौजूद नहीं थे। वित्त समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए कुलपति दिल्ली गए हैं। छात्रों के धरना-प्रदर्शन और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ वार्ता को लेकर गतिरोध बना हुआ था कि मानस ने पहले से रखा मिट्टी का तेल खुद पर डाल लिया। इससे वहां अफरातफरी मच गई। छात्राें और वहां पहले से मौजूद फोर्स ने उसे दबोच लिया।
इसके बाद छात्र-छात्राओं का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। उनका यह भी कहना था कि छात्रों को आत्मदाह के लिए उकसाने के आरोप में कुलपति के खिलाफ मुकदमा लिखा जाए। विश्वविद्यालय के अफसरों ने आश्वासन दिया कि 29 को कुलपति के लौटने पर उनसे वार्ता कराने की कोशिश की जाएगी। जिला प्रशासन के अफसरों ने भी आश्वासन दिया कि 29 को उनकी कुलपति से वार्ता कराई जाएगी। हालांकि, वार्ता में कौन शामिल रहेगा इस पर कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रनेताओं को लिखित में दिया गया कि परास्नातक प्रवेश परीक्षा में पेपर 10.30 बजे के बाद वायरल हुआ था। तब तक सभी अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र परिसर में प्रवेश कर चुके थे। इसलिए पेपर आउट होने की बात गलत है। अफसरों की ओर से यह भी बताया गया कि क्रेट में नकल की जांच के लिए हाई पावर जांच कमेटी बनाई गई है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अफसरों के आश्वासन तथा मानस को जमानत मिलने के बाद छात्रों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की, लेकिन छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने चेतावनी दी कि यदि मांग नहीं मानी गई तो अन्य छात्रों से पहले वह आत्मदाह करेंगी। अन्य पदाधिकारियों तथा छात्र नेताओं ने आत्मदाह की चेतावनी दी है। छात्र नेता विवेकानंद पाठक का कहना था कि विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा मजाक बनकर रह गई। इसे निरस्त कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो तेज आंदोलन होगा। प्रदर्शन करने वालों में छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, श्रवण जायसवाल, जितेंद्र शुक्ला, अजीत यादव, चंदन सिंह, गौरव त्रिपाठी, हरिनाम सिंह, जिया कौनैन रिजवी, शादाब, श्याम कृष्ण, मो.जाबिर रजा, सद्दाम अी, सौरभ पांडेय आदि शामिल रहे।
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विश्वविद्यालय की शोध (क्रेट) और परास्नातक (पीजीएटी) प्रवेश परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता तथा नकल की शिकायत है। इससे नाराज छात्र-छात्रा परीक्षा निरस्त करा दोषी लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वे प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक को बर्खास्त करने की भी मांग कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार छात्र-छात्राओं का छात्रसंघ भवन पर जमावड़ा सोमवार को हुआ। उन्हाेंने सामूहिक आत्मदाह की भी चेतावनी दी थी। वहां से विद्यार्थी नारेबाजी करते हुए कुलपति दफ्तर पहुंचे। छात्र कुलपति से वार्ता की मांग कर रहे थे, लेकिन वह मौजूद नहीं थे। वित्त समिति की बैठक की अध्यक्षता करने के लिए कुलपति दिल्ली गए हैं। छात्रों के धरना-प्रदर्शन और विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ वार्ता को लेकर गतिरोध बना हुआ था कि मानस ने पहले से रखा मिट्टी का तेल खुद पर डाल लिया। इससे वहां अफरातफरी मच गई। छात्राें और वहां पहले से मौजूद फोर्स ने उसे दबोच लिया।
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इसके बाद छात्र-छात्राओं का गुस्सा और बढ़ गया। उन्होंने आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। उनका यह भी कहना था कि छात्रों को आत्मदाह के लिए उकसाने के आरोप में कुलपति के खिलाफ मुकदमा लिखा जाए। विश्वविद्यालय के अफसरों ने आश्वासन दिया कि 29 को कुलपति के लौटने पर उनसे वार्ता कराने की कोशिश की जाएगी। जिला प्रशासन के अफसरों ने भी आश्वासन दिया कि 29 को उनकी कुलपति से वार्ता कराई जाएगी। हालांकि, वार्ता में कौन शामिल रहेगा इस पर कोई आश्वासन नहीं दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से छात्रनेताओं को लिखित में दिया गया कि परास्नातक प्रवेश परीक्षा में पेपर 10.30 बजे के बाद वायरल हुआ था। तब तक सभी अभ्यर्थी परीक्षा केंद्र परिसर में प्रवेश कर चुके थे। इसलिए पेपर आउट होने की बात गलत है। अफसरों की ओर से यह भी बताया गया कि क्रेट में नकल की जांच के लिए हाई पावर जांच कमेटी बनाई गई है। उसकी रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अफसरों के आश्वासन तथा मानस को जमानत मिलने के बाद छात्रों ने धरना समाप्त करने की घोषणा की, लेकिन छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह ने चेतावनी दी कि यदि मांग नहीं मानी गई तो अन्य छात्रों से पहले वह आत्मदाह करेंगी। अन्य पदाधिकारियों तथा छात्र नेताओं ने आत्मदाह की चेतावनी दी है। छात्र नेता विवेकानंद पाठक का कहना था कि विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा मजाक बनकर रह गई। इसे निरस्त कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई तो तेज आंदोलन होगा। प्रदर्शन करने वालों में छात्रसंघ उपाध्यक्ष विक्रांत सिंह, महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू, श्रवण जायसवाल, जितेंद्र शुक्ला, अजीत यादव, चंदन सिंह, गौरव त्रिपाठी, हरिनाम सिंह, जिया कौनैन रिजवी, शादाब, श्याम कृष्ण, मो.जाबिर रजा, सद्दाम अी, सौरभ पांडेय आदि शामिल रहे।