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Chandrayaan 3 : संगमनगरी की गलियों में खेली दिशी भारत को चांद पर पहुंचाने में बनी मददगार, शहर के लोग गदगद

Fri, 25 Aug 2023 01:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 25 Aug 2023 01:55 PM IST
सार

सूबेदारगंंज की रेलवे कॉलोनी में रहने वाले चीफ विजिलेंस ऑफिसर (स्टोर) इंद्रजीत कटियार की पुत्री दिशी की रुचि बचपन से ही विज्ञान के क्षेत्र में रही। हंडिया के जूनियर हाईस्कूल में शिक्षिका के तौर पर तैनात मां विनीता कटियार बेटी की इस कामयाबी पर गौरवान्वित हैं।

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Chandrayaan 3: Dishi played in the streets of Sangamnagari became helpful in taking India to the moon
दिशी कटियार। इसरो वैज्ञानिक। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

संगमनगरी की गलियों में खेलने वाली दिशी कटियार चंद्रयान-3 को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने में मददगार बनी हैं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ट्रैकिंग एवं टेलीमेट्री कमांड नेटवर्क में तैनात दिशी अंतिम क्षणों तक चंद्रयान की ट्रैकिंग में शामिल रहीं। बेटी की इस उपलब्धि पर माता-पिता ही नहीं, पूरे शहरवासियों का कलेजा सौ गज चौड़ा हो गया है।

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सूबेदारगंंज की रेलवे कॉलोनी में रहने वाले चीफ विजिलेंस ऑफिसर (स्टोर) इंद्रजीत कटियार की पुत्री दिशी की रुचि बचपन से ही विज्ञान के क्षेत्र में रही। हंडिया के जूनियर हाईस्कूल में शिक्षिका के तौर पर तैनात मां विनीता कटियार बेटी की इस कामयाबी पर गौरवान्वित हैं। चंद्रयान-3 की ट्रैकिंग टीम में शामिल बेटी दिशी से उनकी बात मिशन की सफलता के बाद अभी तक नहीं हो सकी है।
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पिता भी अपनी इकलौती बेेटी से बात करने और उसे और आगे बढ़ने के लिए उत्साहित करने के लिए बेताब हैं, लेकिन दिशी के पास फोन न होने की वजह से अभी तक संपर्क नहीं हो सका है। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में दिशी के मिशन मून को लेकर कई अहम जानकारियां दीं। बताया कि इलेक्ट्रानिक एंड टेलिकम्युनिकेशन में विशेषज्ञता हासिल करने वाली दिशी इसरो में चयनित होने के बाद मार्च 2022 में चंद्रयान-3 का हिस्सा बनी थी।

Chandrayaan 3: Dishi played in the streets of Sangamnagari became helpful in taking India to the moon
इसरो की वैज्ञानिक दिशी कटियार। - फोटो : अमर उजाला।

मिशन मून को लेकर थी बेहद रोमांचित और आश्वान्वित

वह कमांड सेंटर में चंद्रयान की ट्रैकिंग टीम में शामिल रही। पिता ने बताया कि दिन भर फोन अलग रखवा लिया जाता है, इसलिए काम के समय बात संभव नहीं हो पाती। लैंडिंग के दो दिन पहले तक बात हुई थी, तब वह मिशन मून को लेकर बेहद रोमांचित और आशान्वित थी। पिता इंद्रजीत ने बताया कि दिशी को बचपन से ही विज्ञान की किताबें पढ़ने और नई चीजेें खोजने का शौक रहा है।

तीसरी से छठवीं कक्षा तक दिशी ने जीएचएस से पढ़ाई की। इसके बाद 12वीं तक की शिक्षा डीपीएस स्कूल नैनी से हुई। एनआईटी दुर्गापुर से उसने वर्ष 2019 में बीटेक किया। वह बताते हैं कि चंद्रयान की सफल लैंडिंग होने तक वह अपनी पत्नी के साथ नियमित भगवान से दुआएं करते रहे, ताकि बेटी के सपने साकार हो सकें। अंतत: वह दिन आ ही गया। दिशी कटियार मिशन आदित्य एल-वन को ट्रैक करने वाली टीम में भी शामिल हैं।

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