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थाली से गायब होने लगी चना दाल
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 24 Jul 2016 02:23 AM IST
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दाल की हो रही तस्करी
- फोटो : PTI
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अरहर दाल के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली चना दाल भी थाली से गायब होने लगी है। एक पखवाड़े में चना दाल का भाव थोक बाजार में 2000 प्रति क्लिंटल तक बढ़ गया। नतीजा है कि फुटकर बाजार में चना दाल की कीमत में 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम तक बढ़ोतरी हो गई है। चीनी और गुड़ की कीमतों में भी इजाफा हो रहा है। इसकी वजह से मिठाई, चाय और अन्य मीठी चीजों का स्वाद भी बिगड़ने लगा है। थोक व्यापारी चना दाल की कीमत कम होने के पीछे कम फसल को कारण बता रहे हैं, जबकि चीनी की कीमत में बढ़ोतरी के लिए मिल मालिकों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
पिछले वर्ष अरहर दाल की कीमत फुटकर बाजार में 200 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई। बाद में केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और अरहर का बफर स्टॉक किया तो कीमत पर कुछ हद तक नियंत्रण लगा। काफी समय से अरहर दाल की कीमत 130-140 रुपये प्रति किलोग्राम पर टिकी हुई है, लेकिन अब अरहर दाल के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चना की दाल की कीमत में भारी उछाल आया है। तकरीबन 15 दिन पहले तक मुट्ठीगंज थोक मंडी में 8000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही चना दाल वर्तमान में 10000 हजार रुपये के स्तर पर पहुंच गई है, जबकि फुटकर बाजार में प्रति किलोग्राम 85 रुपये से बढ़कर 100-110 रुपये पर पहुंच गई है।
चीनी का भाव भी लगातार बढ़ रहा है। करीब सप्ताह भर पहले तक थोक बाजार में 3800 रुपये प्रति क्विंटल बिकी चीनी का भाव वर्तमान में 3900-3950 रुपये तक पहुंच गया है। इसकी वजह से फुटकर बाजार में चीनी 40 से बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है। यही नहीं थोक बाजार में गुड़ 3900 से 4100 रुपये क्विंटल और फुटकर में 48-50 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है।
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गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि पिछले वर्ष तक जिले के लेडियारी, खीरी, जारी समेत अतर्रा और राजापुर में चने की अच्छी फसल हुई लेकिन इस बार पैदावार काफी कम हुई। वर्तमान में यहां महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से चना दाल आ रही है। वहां भी इसकी पैदावार कम बताई जा रही है। इसकी वजह से दाम बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि मिल मालिकों की मनमानी के कारण चीनी के भाव में इजाफा हो रहा है। फुटकर व्यापारी राजीव जायसवाल का कहना है कि कीमतें बढ़ने की वजह से चना दाल, चीनी और गुड़ की बिक्री पर असर पड़ रहा है।
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पिछले वर्ष अरहर दाल की कीमत फुटकर बाजार में 200 रुपये प्रति किलोग्राम के पार पहुंच गई। बाद में केंद्र सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया और अरहर का बफर स्टॉक किया तो कीमत पर कुछ हद तक नियंत्रण लगा। काफी समय से अरहर दाल की कीमत 130-140 रुपये प्रति किलोग्राम पर टिकी हुई है, लेकिन अब अरहर दाल के बाद सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली चना की दाल की कीमत में भारी उछाल आया है। तकरीबन 15 दिन पहले तक मुट्ठीगंज थोक मंडी में 8000 रुपये प्रति क्विंटल के भाव बिक रही चना दाल वर्तमान में 10000 हजार रुपये के स्तर पर पहुंच गई है, जबकि फुटकर बाजार में प्रति किलोग्राम 85 रुपये से बढ़कर 100-110 रुपये पर पहुंच गई है।
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चीनी का भाव भी लगातार बढ़ रहा है। करीब सप्ताह भर पहले तक थोक बाजार में 3800 रुपये प्रति क्विंटल बिकी चीनी का भाव वर्तमान में 3900-3950 रुपये तक पहुंच गया है। इसकी वजह से फुटकर बाजार में चीनी 40 से बढ़कर 42 रुपये प्रति किलो तक बेची जा रही है। यही नहीं थोक बाजार में गुड़ 3900 से 4100 रुपये क्विंटल और फुटकर में 48-50 रुपये प्रतिकिलो तक पहुंच गया है।
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गल्ला तिलहन व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतीश चंद्र केसरवानी का कहना है कि पिछले वर्ष तक जिले के लेडियारी, खीरी, जारी समेत अतर्रा और राजापुर में चने की अच्छी फसल हुई लेकिन इस बार पैदावार काफी कम हुई। वर्तमान में यहां महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से चना दाल आ रही है। वहां भी इसकी पैदावार कम बताई जा रही है। इसकी वजह से दाम बढ़ रहे हैं। उनका कहना है कि मिल मालिकों की मनमानी के कारण चीनी के भाव में इजाफा हो रहा है। फुटकर व्यापारी राजीव जायसवाल का कहना है कि कीमतें बढ़ने की वजह से चना दाल, चीनी और गुड़ की बिक्री पर असर पड़ रहा है।