प्रयागराज। पुलिस, पीएसी और अग्निशमन विभाग में 41610 कांस्टेबलों की भर्ती में रिक्त रह गए 3294 पदों पर नियुक्ति के समय मेरिट का ध्यान नहीं रखने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचीगण का कहना है कि अधिक अंक प्राप्त करने के बावजूद उनको फायर विभाग में नियुक्ति दी गई जबकि, मेरिट में उनसे नीचे रहे अभ्यर्थियों को सिविल पुलिस में नियुक्ति दी जा रही है। मंजीत सिंह और दर्जनों अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति जेजे मुनीर ने पुलिस भर्ती बोर्ड और प्रदेश सरकार से इस मामले में जानकारी मांगी है। कोर्ट ने सिविल पुलिस में चयनित 516 अभ्यर्थियों को भी नोटिस जारी कर अपना पक्ष रखने के लिए कहा है।
याचीगण के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि कांस्टेबल भर्ती पूरी होने के बाद एक्स सर्विस मैन और फ्रीडम फाइटर कोटे आदि के कुल मिला 3294 पद रिक्त रह गए थे। इसे लेकर अभ्यर्थी सुप्रीमकोर्ट चले गए। सुप्रीमकोर्ट ने रिक्त पदों को मेरिट के आधार पर भरने का निर्देश दिया। इस आदेश के पालन में भर्ती बोर्ड ने 11 नवंबर 2019 को कट ऑफ मेरिट जारी की। इस कट ऑफ मेरिट को याचिका में चुनौती दी गई है। कहा गया कि याचीगण के अंक कट ऑफ मेरिट से अधिक हैं इसके बावजूद उनको फायर विभाग में नियुक्ति दी गई जबकि कम अंक वालों को सिविल पुलिस में नियुक्ति दी जा रही है जबकि, सुप्रीमकोर्ट ने मेरिट के आधार पर चयन का आदेश दिया था। याचिका पर अगली सुनवाई 20 फरवरी 2020 को होगी।