अटूट प्रेम : 35 वर्षों से हिंदू-मुस्लिम परिवार संग मना रहे राखी का त्योहार
नैनी की पीएसी कॉलोनी में रजा तथा गुप्ता परिवार जहां बीते 37 वर्षों से एक साथ पर्व मना रहे हैं, वहीं करेली के इश्तियाक खान और उनकी पत्नी भी पर्व का हिस्सा बनी हुई हैं।
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संगमनगरी में भाई-बहन के अटूट प्रेम के पर्व रक्षाबंधन पर प्रेम, सौहार्द और मजहब का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। अलग-अलग मजहब के होने के बावजूद कई परिवार संग मिलकर राखी का त्योहार परस्पर प्रेम के साथ निभा रहे हैं। रेशम का धागा इन रिश्तों को आपस में जोड़ने का काम कर रहा है।
नैनी की पीएसी कॉलोनी में रजा तथा गुप्ता परिवार जहां बीते 37 वर्षों से एक साथ पर्व मना रहे हैं, वहीं करेली के इश्तियाक खान और उनकी पत्नी भी पर्व का हिस्सा बनी हुई हैं। पीएसी कॉलोनी के अजीज आलम को उनकी पड़ोसी स्व. गोमती दुबे ने 37 बरस पहले राखी बांधने की शुरूआत की थी।
दोनों एक दूसरे के नए-नए पड़ोसी बने थे, ऐसे में इन दोनों के बीच भाई-बहन का रिश्ता परवान चढ़ा। गोमती दुबे ने अजीज आलम को राखी बांध कर भाई-बहन के अटूट रिश्ते पर मुहर लगाई, तबसे हर वर्ष वह रक्षाबंधन पर अजीज आलम को राखी बांधती रहीं।
उन्ही के नक्शेकदम पर उनकी बेटी सरिता दुबे ने रईस के बेटे आकिब तथा अहसन को बचपन से ही राखी बांधना शुरू किया। तबसे लेकर अब तक सरिता हर वर्ष राखी बांधती आ रही हैं। इतना ही नहीं यह परंपरा तीसरी पीढ़ी तक आ पहुंची है। अब सरिता की भतीजी नेहा दुबे अजीज के पोते अयान को राखी बांधती है। वहीं अहसन के नौ वर्षीय बेटे आरिब रजा को इस वर्ष नेहा पहली बार राखी बांधेगी।
इसी तरह पेशे से कारोबारी करेली के इश्तियाक खान के दोस्त की बीवी नेहा मिश्रा नैनी की रहने वाली हैं और वह इश्तियाक खान को अपना भाई मानती हैं। वह शादी के बाद से ही इश्तियाक को राखी बांधती आ रही हैं। इश्तियाक की पत्नी नसरीन बेगम भी मोहत्सिमगंज में रहने वाले पति के दोस्त चिंरजीव कुमार को राखी बांधती हैं।
इश्तियाक का कहना है कि भाई-बहन का यह त्योहार किसी एक समुदाय का नहीं बल्कि भाई और बहन का त्योहार है। इस पर्व को हर भाई बहन को उत्साह के साथ मनाना चाहिए। वहीं करेली की आब्दा बानो भी बिहार के जगदीशपुर में रहने वाले भाई शिव कुमार को राखी बांधती हैं। उनका कहना है कि स्कूल के दिनों से ही वह शिव को राखी बांधती रही हैं। इस बार भी डाक के जरिये राखी भेजी है।