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एक्सक्लूसिवः बीएचयू के पूर्व वीसी को सीबीआई ने किया तलब, कोलकाता में हुआ केस दर्ज
Tue, 08 Jan 2019 01:28 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 08 Jan 2019 01:28 AM IST
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बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी
- फोटो : अमर उजाला
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सीबीआई ने सिक्किम विश्वविद्यालय से जुड़े एक घोटाले की जांच रिपोर्ट पर शक जाहिर करते हुए बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी को तलब किया है। मामला चार साल पहले 2015 में सिक्किम यूनिवर्सिटी में हुई वित्तीय अनियमितता की जांच के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से गठित एक समिति से जुड़ा है।
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उस दौरान बीएचयू के पूर्व वीसी मानव संसाधन मंत्रालय की इस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के सदस्य बनाए गए थे। तब इस समिति ने मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट में सिक्किम विश्व विद्यालय के तत्कालीन कुलपति एमपी लामा समेत अन्य आरोपियों को क्लीन चिट दे दी थी, लेकिन सीबीआई उस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं है। अब इस मामले सीबीआई प्रो. त्रिपाठी से पूछताछ कर सकती है।
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सिक्किम उच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने प्रो. त्रिपाठी के खिलाफ कोलकाता में यह मामला दर्ज किया है। सीबीआई सिक्किम विश्व विद्यालय के तत्कालीन कुलपति रहे एमपी लामा के कार्यकाल के दौरान हुई कथित वित्तीय अनियमिताओं का परीक्षण कर रही है। उच्चपदस्थ सूत्रों के अनुसार सिक्किम यूनिवर्सिटी से दूरस्थ शिक्षा की संबद्धता और यूपी समेत अन्य राज्यों में इसके केंद्रों के संचालन से मामला जुड़ा है। इस केंद्र का प्रधान कार्यालय प्रयागराज की जिस समिति के भवन में संचालित है, उसका संबंध प्रो त्रिपाठी से जुड़ा है। तब दूरस्थ शिक्षा केंद्रों की आड़ में बड़े पैमाने पर स्नातक स्तर की डिग्रियां बांटने का खेल हुआ था।
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शिकायत के बाद मानव संसाधन मंत्रालय ने जिस फैक्ट फाइंडिंग कमेटी से इस अनियमितता की जांच कराई, उसके सदस्य के रूप में बीएचयू के तत्कालीन वीसी रहे प्रों त्रिपाठी नामित थे। सीबीआई ने इस इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को नोटिस जारी किया। इस मामले में प्रो. त्रिपाठी को बीती 18 दिसंबर 2018 को सीबीआई की एंटी करप्शन शाखा के एसपी के समक्ष पेश होना था, लेकिन वह गए नहीं। प्रो. त्रिपाठी ने अमर उजाला से बातचीत में सीबीआई का नोटिस मिलने की पुष्टि की।
उनका कहना था कि जिस दिन सीबीआई ने बुलाया था, उसी दिन दोपहर के समय उनको नोटिस मिला, ऐसे में कोलकाता जाना संभव नहीं था। उनका कहना है कि अगर सीबीआई उनकी जांच से संतुष्ट नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह दोषी हैं। किसी दूसरी समिति से परीक्षण करा लिया जाए।