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सीबीआई ने खोलने शुरू किए राज, टीए और पे-शीट में भी मिली गड़बड़ी
Wed, 07 Jul 2021 10:36 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 07 Jul 2021 10:36 PM IST
सार
- आरोपी एपीओ बुधवार को डीआरएम ऑफिस से हुआ रिलीव
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सांकेतिक चित्र
- फोटो : Social Media
विस्तार
मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के कार्मिक विभाग में पिछले सप्ताह हुई सीबीआई रेड के बाद अब तमाम अन्य तरह की गड़बड़ियां सामने आने लगी हैं। इस मामले में सीबीआई द्वारा आरोपित एपीओ लवकुश के खिलाफ केस दर्ज करने के बाद मालूम चला है कि जून 2019 में टीए, पे-शीट आदि में भी फर्जीवाड़ा किया। वहीं दूसरी ओर आरोपी एपीओ बुधवार को डीआरएम ऑफिस से उत्तर मध्य रेलवे मुख्यालय के लिए रिलीव कर दिया गया।
सीबीआई ने तकरीबन एक करोड़ रुपये के गबन मामले में कुछ नए तथ्य खोजे हैं। बताया जा रहा है कि कार्मिक विभाग के एपीओ एवं उनके कुछ सहयोगियों ने जन 2019 में पे शीट पर फर्जीवाड़ा किया। टीए के जाली दस्तावेज बनाने के साथ उसे पास होने के लिए आगे भेज दिया गया। इस दौरान असिस्टेंट लोको पॉयलट नरेश सिंह एवं कुछ अन्य के मूल वेतन में हेरफेर कर संदिग्ध बैंक खातों में रकम भेजी गई।
यह सभी फर्जी दस्तावेज सीबीआई ने बरामद कर लिए हैं। क्योंकि रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की गई, इस वजह से सीबीआई को इससे संबंधित साक्ष्य मिलने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेखा विभाग के भी कुछ लोगों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए हैं। क्योंकि अगर रकम फर्जी तरीके से भेजी गई तो लेखा विभाग के संबंधित अफसर या कर्मचारी ने इसे चेक क्यों नहीं किया। चर्चा है कि लेखा विभाग के संबंधित लोगों से भी सीबीआई जल्द ही पूछताछ कर सकती है। ब्यूरो
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सीबीआई ने तकरीबन एक करोड़ रुपये के गबन मामले में कुछ नए तथ्य खोजे हैं। बताया जा रहा है कि कार्मिक विभाग के एपीओ एवं उनके कुछ सहयोगियों ने जन 2019 में पे शीट पर फर्जीवाड़ा किया। टीए के जाली दस्तावेज बनाने के साथ उसे पास होने के लिए आगे भेज दिया गया। इस दौरान असिस्टेंट लोको पॉयलट नरेश सिंह एवं कुछ अन्य के मूल वेतन में हेरफेर कर संदिग्ध बैंक खातों में रकम भेजी गई।
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यह सभी फर्जी दस्तावेज सीबीआई ने बरामद कर लिए हैं। क्योंकि रकम ऑनलाइन ट्रांसफर की गई, इस वजह से सीबीआई को इससे संबंधित साक्ष्य मिलने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। लेखा विभाग के भी कुछ लोगों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए हैं। क्योंकि अगर रकम फर्जी तरीके से भेजी गई तो लेखा विभाग के संबंधित अफसर या कर्मचारी ने इसे चेक क्यों नहीं किया। चर्चा है कि लेखा विभाग के संबंधित लोगों से भी सीबीआई जल्द ही पूछताछ कर सकती है। ब्यूरो
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