डिजिटल पेमेंट : प्रयागराज के गांवों में बढ़ रहा कैशलेस ट्रांजेक्शन का क्रेज, गुमटी और ठेला वाले भी उठा रहे लाभ
प्रयागराज में सरकार के डिजिटल कैशलेस ट्रांजेक्शन को ग्रामीण बढ़ावा दे रहे है। नोटबंदी के पहले शहर में डेबिट कार्ड, गूगल पे, पेटीएम व अन्य डिजिटल एप का चलन लगभग शून्य था। नगद भुगतान से ही खरीद-फरोख्त होता रहा है।
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यूपीआई क्यूआर कोड के जरिये डिजिटल पेमेंट का क्रेज जिले में तेजी से बढ़ रहा है। बड़े दुकानों के अलावा ठेला और गुमटी के दुकानदार तक क्यूआर कोड के माध्यम से पेमेंट ले रहे हैं। इससे जेब में नकदी रखने की समस्या का संकट दूर हो गया है। बस जेब में स्मार्ट फोन हो तो पांच रुपये से लेकर चाहे जितने तक का सामान ऑनलाइन भुगतान के माध्यम से खरीदा जा सकता है।
प्रयागराज में सरकार के डिजिटल कैशलेस ट्रांजेक्शन को ग्रामीण बढ़ावा दे रहे है। नोटबंदी के पहले शहर में डेबिट कार्ड, गूगल पे, पेटीएम व अन्य डिजिटल एप का चलन लगभग शून्य था। नगद भुगतान से ही खरीद-फरोख्त होता रहा है, लेकिन कोरोना की विभीषिका ने शहरवासियों को कैशलेस ट्रांजेक्शन के प्रति जागरूक किया है। शहर के अमूमन हर दूसरे बड़े शॉप में पीओएस (पाइंट आफ सेल) मशीनें लगाई गई हैं। और तो और सड़क किनारे धंधा करने वाले छोटे व्यवसायी, पान ठेला, इडली-डोसा ठेला के संचालक भी 10 रुपये तक की न्यूनतम राशि गूगल पे, भीम, पेटीएम जैसे एप के जरिए ले रहे हैं।
कैश की समस्या का हुआ समाधान
आनलाइन पेमेंट तथा कैशलेस लेनदेन बरसों पहले से देश के बड़े नगरों में होता रहा है, लेकिन शहर में नगद लेन-देन की ही परपंरा चल रही थी। पेट्रोल पंप, बड़े होटल तथा अन्य व्यावसायिक फमों में नगदी व चेक के जरिए ही भुगतान किया जाता रहा। वर्ष 2016 में नोटबंदी के बाद बैंको में लंबी कतारें देखी गई। इसके बाद आरबीआई के निर्देश पर राष्ट्रीयकृत बैंकों द्वारा कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया गया। केंद्र सरकार के प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान के तहत कैशलेस मुहिम को बढ़ावा देने के लिए जिला के हर पंचायत के लोगों को डिजिटल साक्षरता प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कोरोना काल के बाद डिजिटल पेमेंट का क्रेज बढ़ा
कोरोना की वीभीषिका ने देश-दुनिया में व्यापक प्रभाव डाला। देश भर में कई चरणों में लाकडाउन लागू रहा। इससे नगर भी अछूता नहीं रहा। लिहाजा प्रयागराज के छोटे-छोटे व्यवसायियों ने भी पेटीएम के अलावा अन्य मोबाइल वालेट का इस्तेमाल शुरू किया ताकि उनके ग्राहकी पर असर न हो। ग्रामीण क्षेत्रों में भी युवा डिजटिल वॉलेट का इस्तेमाल करते देखे जा रहे हैं।
एक सर्वे के मुताबिक जिले का गंगापार इलाका हो या फिर यमुनापार, गांव के लोग अब डिजिटल कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देते हुए नजर आ रहे हैं। जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र के कौड़िहार दासापुर गांव की बात करें तो वहां पर अधिकतर दुकानों में क्यूआरकोड लगा हुआ है। वहां के ग्रामीण डिजिटल पेमेंट करते हुए नजर आए। गांव के ही रहने वाले आशीष त्रिपाठी ने बताया कि बीते 2 सालों से गाँव मे डिजिटल कैशलेस ट्रांजेक्शन का क्रेज बढ़ा है। लोग अपने स्मार्टफोन मे ऐप डाउन करने के बाद वह डिजिटल ट्रांजेक्शन कर रहे हैं।
एटीएम पर लाइन लगाने से मिली निजात
पान की दुकान हो, किराने की दुकान हो या फिर इलेक्ट्रॉनिक की दुकान हो अधिकतर लोगों ने ऑनलाइन पेमेंट करना शुरू कर दिया है। सरायइनायत थाना क्षेत्र के करनपुर गांव के निवासी अखिलेंद्र यादव का कहना है कि उनकी गांव में ही इलेक्ट्रिकल्स की दुकान है और उन्होंने भी ऑनलाइन पेमेंट के लिए क्यूआर कोड लगाया हुआ है। अधिकतर लोग जो सामान खरीदने आ रहे हैं वह अब ऑनलाइन पेमेंट कर रहे हैं जिससे उनको कई लाभ होता है एक तो वह कैशलेस रहते हैं और बार बार बैंक या फिर एटीएम से पैसे निकालने का झंझट भी नहीं रहता है। इसी कड़ी में फरीदपुर गाव के रहने वाले अनूप मिश्रा की किराने की दुकान है और वहां पर भी अधिकतर लोग डिजिटल ट्रांजेक्शन का सहारा ले रहे हैं।