प्रयागराज : दो करोड़ की ठगी के आरोपी पर सामूहिक दुष्कर्म का भी केस, बीमा कंपनी की महिला एजेंट ने कराई FIR
निजी बीमा कंपनी एजेंट का काम करने वाली युवती ने यह केस दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है। मूल रूप से आवास विकास काॅलोनी झूंसी निवासी पीड़िता किराये के कमरे में कैंट क्षेत्र में रहती है।
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रेलवे स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर दो करोड़ की ठगी करने के आरोपी अजहर अनीस उस्मानी पर कैंट थाने में सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज किया गया है। इसमें उसके भाई अजमल व दो बहनोई भी नामजद हुए हैं। निजी बीमा कंपनी एजेंट का काम करने वाली युवती ने यह केस दर्ज कराया है। पुलिस जांच में जुटी है। मूल रूप से आवास विकास काॅलोनी झूंसी निवासी पीड़िता किराये के कमरे में कैंट क्षेत्र में रहती है।
वह निजी कंपनी में बीमा एजेंट है। उसने पुलिस को तहरीर देकर बताया है कि काम के सिलसिले में ही उसकी मुलाकात अजहर अनीस उस्मानी निवासी मुमताज महल खुल्दाबाद से हुई। जिसने उससे मेलजोल बढ़ाया और शादी का झांसा देकर राजरूपपुर स्थित फ्लैट पर ले जाकर दुष्कर्म किया। इसके बाद उसके भाई अजमल, बहनोई मो. काजी जाहिद व बहनोई के भाई मो. आशिफ ने भी दुष्कर्म किया। घटना 14 अक्टूबर 2022 से सात नवंबर 2022 तक हुई। पीड़िता की तहरीर पर कैंट पुलिस ने चारों पर सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कर लिया है। कैंट इंस्पेक्टर रुकुमपाल सिंह ने बताया कि जांच की जा रही है।
जेल में है मुख्य आराेपी, भाई फरार
मुख्य आरोपी अजहर वर्तमान में जेल में जबकि उसका भाई अजमल फरार है। जार्जटाउन में पिछले साल नवंबर में रेलवे स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर 1.95 करोड़ रुपये हड़पने के आरोप में दर्ज मामले में गिरफ्तार कर उसे जेल भेजा गया था। इस मामले में उसके भाई के अलावा पत्नी फरीना आरिफ भी फरार चल रहे हैं। जार्जटाउन पुलिस पिछले नौ महीनों से उनकी तलाश में जुटी है।
84.5 लाख की ठगी में भी नामजद हैं आरोपी
सामूहिक दुष्कर्म में नामजद अजहर व उसका बहनोई काजी जाहिद 84.5 लाख हड़पने के एक और मामले में भी नामजद हुआ है। इस मामले में उसकी पत्नी व जार्जटाउन के केस में जेल भेजा जा चुका उसका सहयोगी रेलवे अस्पताल का डॉक्टर परवेज अहमद भी आरोपी बनाए गए हैं। करेली निवासी उमैर खान का आरोप है कि उक्त चारों ने रेलवे स्क्रैप व रेलवे अस्पताल की दवाओं का ठेका दिलाने के नाम पर रकम हड़प ली। साथ ही रेलवे मंत्रालय की मुहर व दस्तखत वाला टेंडर ऑर्डर भी थमा दिया। बाद में एनसीआर कार्यालय जाने पर पता चला कि आदेश फर्जी है।