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करोड़ों की ठगी का मामला : डाक एजेंट ने निवेशकों को दिया फर्जी पासबुक और खाता नंबर

Fri, 21 Jun 2024 01:46 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 21 Jun 2024 01:46 PM IST
सार

एजेंट ने झूठ बोलकर लोगों से निवेश करवाया। दारागंज बक्सी खुर्द के सचिन चाैरसिया ने कहा कि एजेंट निखिल और उसकी बहन नीति ने उसको बताया कि 7.50 लाख रुपये जमा करोगे तो पांच वर्ष में 14.30 लाख हो जाएंगे।

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Case of fraud worth crores: Postal agent gave fake passbook and account number to investors
गबन। - फोटो : Istock

विस्तार

डाक विभाग की योजनाओं में लोग एजेंट के जरिये निवेश करते हैं। इसके लिए एजेंट का भरोसेमंद होना जरूरी है। लेकिन, दारागंज डाकघर के एजेंट निखिल श्रीवास्तव ने लोगों के भरोसे पर कुठाराघात किया है। उसके निधन के बाद लोग अब शिकायत कर रहे हैं। ऐसे लोगों के पैसे भी अब मिलने मुश्किल हैं। क्योंकि, इनके खाते का रिकॉर्ड डाकघर के पास नहीं है।

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एजेंट ने झूठ बोलकर लोगों से निवेश करवाया। दारागंज बक्सी खुर्द के सचिन चाैरसिया ने कहा कि एजेंट निखिल और उसकी बहन नीति ने उसको बताया कि 7.50 लाख रुपये जमा करोगे तो पांच वर्ष में 14.30 लाख हो जाएंगे। उनके झांसे में आकर 14 अक्तूबर 2020 को 7.5 लाख रुपये निवेश कर दिए। निखिल की तबीयत गंभीर होने पर उसके घर पासबुक लेने गए तो उसने नहीं दिया। बोला, ठीक होने के बाद डाकघर में चलकर इंट्री करवा दूंगा। अप्रैल में निधन के बाद कई बार उसके घर गए तो पत्नी गाैरी श्रीवास्तव ने पासबुक दी। उसे डाकघर में चेक करवाया तो पासबुक और खाता फर्जी था।
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ऐसे ही जनक लली से 7.90 लाख रुपये का फिक्स डिपोजिट करवाया था। दारागंज की रंजना चाैरसिया ने 18 लाख रुपये, संगीता ने दो लाख रुपये, सीमा ने दो लाख, शिवबाबू चाैरसिया ने छह लाख, बलराम यादव ने 3.55 लाख, आशीष कुमार ने तीन लाख, सुषमा वैश्य ने 1.87 लाख, प्रदीप यादव ने 1.20 लाख, निर्मला देवी ने 3.63 लाख, कृष्णा महेंद्रू ने 7.5 लाख रुपये एजेंट के जरिये निवेश किया था। इन सभी ने लिखित शिकायत की है, लेकिन पासबुक और खाता फर्जी होने के कारण इनकी धनराशि डूब गई।

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डाकघर में निखिल की चलती थी मनमानी

दारागंज डाकघर में निखिल की मनमानी चलती थी। वह डाकघर में विभागीय कर्मचारियों की तरह बैठता था और कागजात व मुहर आदि का प्रयोग करता था। अफसरों के बीच उसकी पैठ इतनी थी कि वह कर्मचारियों का तबादला करवा देता था। उसके लेनदेन में जिसने पूछताछ की, उसका तबादला निश्चित था। 2018 में निखिल में खाते में हेराफेरी की। तत्कालीन कर्मचारी मान सिंह ने उसकी गड़बड़ी पकड़ी। उसने इसकी जानकारी पोस्ट मास्टर को दी।

गड़बड़ी पकड़ना मान सिंह के लिए उल्टा पड़ गया। उसे वहां से शंकरगढ़ डाकघर भेज दिया गया। ऐसे ही पिछले वर्ष कर्मचारी आशीष द्विवेदी ने निखिल की गड़बड़ी पकड़ी थी। उसका तबादला दांदूपुर डाकघर करवा दिया था। वह किसी तरह लौटकर दारागंज आए तो उनको सस्पेंड करवा दिया। उसकी दबंगई इतनी कि लेनदेन में कोई आपत्ति नहीं करता था। पोस्टमास्टर और अफसरों में पैठ होने के कारण वह नियमित डाकघर में बैठता था। खातेदारों के बिना आए ही वह उनके खाते से पैसे निकाल लेता था।

छपवाई नकली पासबुक

डाकघर से कुछ खाली पासबुक निखिल उठा ले गया और उसमें फर्जी अकाउंट नंबर डालकर दे दिया। पासबुक में प्रिंटिंग सिदि्ध साइबर कैफे से करवाता था। उसने कई पासबुक साइबर कैफे से बनवाई और ग्राहकों को दे दिया। बाहर से बनवाई गई पासबुक और डाकघर की पासबुक में मामूली अंतर होता है। डाक विभाग के कर्मचारी देखे तो पकड़ लिए। डाकघर में पासबुक की इंट्री के अक्षर उभरे रहते हैं, जिससे कि दिव्यांग भी उसे छूकर जान सके। निखिल ने कंप्यूटर से पासबुक पर इंट्री करवाकर लोगों को दे दिया था।

तीन वर्ष में जमा कराए थे 80 करोड़

नीति श्रीवास्तव की एजेंसी दिसंबर 2018 में खुली थी। तीन वर्ष बाद दिसंबर 2021 में वह रीन्यू हुई। तीन वर्ष में उसने 80.10 करोड़ रुपये डाकघर में निवेश करवाए थे। उसे कमीशन के रूप में 40.05 लाख रुपये मिले थे। इतनी अच्छी एजेंसी चलने के बावजूद नीति और उसके भाई निखिल ने फर्जीवाड़ा किया।

बचत विभाग ने लेनदेन पर लगाई रोक

एजेंट डाकखाने में काम करते हैं,लेकिन उनको बचत विभाग से एजेंसी दी जाती है। निधि की एजेंसी में वंदना कुशवाहा और नवल सिंह गारंटर हैं। निधि श्रीवास्तव के खिलाफ बचत विभाग को छह मई को शिकायत मिली। बचत विभाग के सहायक निदेशक रविंद्र प्रताप यादव ने बताया कि शिकायत मिलते ही निधि श्रीवास्तव को नोटिस जारी किया गया। उसने अपना पक्ष रखा, लेकिन विभाग उससे सहमत नहीं है। इसलिए दारागंज पोस्टमास्टर को आठ मई को पत्र भेजकर एजेंट के लेनदेन पर रोक लगा दी गई। इस मामले में अब तक 15 शिकायतें आ चुकी है। एजेंट के खिलाफ डाक विभाग को मुकदमा दर्ज कराना चाहिए।

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