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गाजीपुर के कोचिंग संस्थानों से तलाशते थे अभ्यर्थी

Tue, 21 Jan 2020 12:42 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2020 12:42 AM IST
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Candidates used to search from coaching institutes in Ghazipur
Candidates used to search from coaching institutes in Ghazipur
लखनऊ के जोनल रिक्रूटमेंट आफिस का बाबू भी वांटेड
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प्रयागराज। सेना में भर्ती करने वाले गिरोह के पकड़े जाने के बाद पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। सेना के लखनऊ स्थित जोनल रिक्रूटमेंट आफिस का बाबू भी गिरोह में शामिल था। वह पैसे लेकर सरगना अजय उर्फ मुलायम सिंह यादव को गोपनीय दस्तावेज उपलब्ध कराता था। एसटीएफ ने एफआईआर में अजय यादव के साथ बाबू समेत कई अन्य को भी वांटेड घोषित किया है। गिरोह ने कई अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम लिए हैं। उनके दावों की तहकीकात मिलिट्री इंटेलिजेंस की मदद से की जा रही है।
पकड़े गए गिरोह का पूरा संचालन कौशाम्बी के सैनी इलाके के शाखा गांव का रहने वाला अजय यादव उर्फ मुलायम सिंह यादव करता है। अजय इन दिनों जोधपुर में तैनात है। कुशीनगर का रहने वाला मनीष यादव उसका ममेरा भाई है। मनीष के माध्यम से तीन साल पहले उसने कुछ लड़कों को सेना में भर्ती कराके काफी पैसा कमाया। इसके बाद मनीष अपने साथी त्रिपतिनाथ सरोज के साथ अभ्यर्थियों की तलाश करने लग गए। इसी बीच अजय ने सेना में कार्यरत प्रदीप यादव और संजय पांडेय को भी अपने साथ शामिल किया। सभी मिलकर सेना में भर्ती के इच्छुक लड़कों को खोजते और 60 हजार में मेडिकल परीक्षा व ढाई लाख में पूरी भर्ती का आश्वासन देते। उन लड़कों के शैक्षिक प्रमाणपत्रों को व्हाट्सएप के माध्यम से अजय यादव को भेज दिया जाता। अजय के कहने पर लखनऊ स्थित जोनल रिक्रूटमेंट आफिस के बाबू को पैसा पहुंचाया जाता था। मनीष और प्रदीप ने दो बार खुद रिक्रूटमेंट आफिस के बाबू को 25 लाख रुपये पहुंचाए थे।
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डिप्टी एसपी नवेंदु सिंह ने बताया कि पकड़े गए चारों से लंबी पूछताछ की गई। उनके व्हाट्सएप नंबरों में तमाम ऐसे पदनाम लिखे थे, जिसे डिकोड करने के लिए मिलिट्री इंटेलिजेंस की मदद ली गई। अब तक की जानकारी से पता चला है कि अजय यादव का संबंध मिलिट्री हास्पिटल इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी और मेरठ इत्यादि जगहों पर भी है। तमाम कर्मचारियों, अधिकारियों के नाम भी गिरोह ने लिए हैं। सबकी तहकीकात की जा रही है। वाराणसी का संजय श्रीवास्तव और दो भूतपूर्व सैनिक ऋषि गुप्ता और ज्ञानचंद्र गुप्ता भी इसी रैकेट के सक्रिय सदस्य हैं। अभ्यर्थियों से मिले पैसों में सबका अलग अलग प्रतिशत होता था। अजय यादव ही काम के हिसाब से पैसे बांटता था।
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गाजीपुर के कोचिंग सेंटरों से तलाशते थे अभ्यर्थी
प्रयागराज। गिरोह के लोगों को जब बाहर अभ्यर्थी नहीं मिलते थे, तो वे गाजीपुर के नीलकंठ कोचिंग और बक्सू बाबा एकेडमी जाकर छात्रों से बताते थे कि मात्र ढाई लाख रुपयों में सेना में भर्ती करा दिया जाएगा। लड़कों को उन अभ्यर्थियों की सूची भी दिखाई जाती जिनका सेलेक्शन गिरोह ने कराया है।
पकड़े गए आरोपी
1-प्रदीप सिंह यादव, फायर इंजन ड्राइवर, सीओडी छिवकी निवासी महमूदपुर गाजीपुर
2-संजय कुमार पांडेय, नायक, 6 महार रेजीमेंट (लेह में तैनात) निवासी रामकोला कुशीनगर
3-मनीष यादव, रामकोला कुशीनगर
4-त्रिपतिनाथ सरोज, सिकरारा, जौनपुर
वांटेड
1-अजय यादव उर्फ मुलायम सिंह यादव (सेना में जोधपुर में तैनात) निवासी सैनी, कौशाम्बी
2-जोनल रिक्रूटमेंट आफिस लखनऊ में बाबू
3-संजय कुमार श्रीवास्तव, वाराणसी
4-ऋषि कुमार गुप्ता, भूतपूर्व सैनिक निवासी मऊ
5-ज्ञानचंद्र गुप्ता, भूतपूर्व सैनिक निवासी मऊ
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