एप कालिंग: कम पैसे में करें दूर देश में बात
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय जेके इंस्टीट्यूट के पूर्व प्रमुख एवं यूपीटेक के निदेशक
प्रोफेसर केके भूटानी का कहना है कि व्हाट्स एप केजरिए यूजर बिना किसी शुल्क के चैटिंग के साथ कालिंग का लाभ उठा रहे हैं। एंड्रायड के जरिए यह सुविधा यूजर को फ्री में दी गई है। ऐसे में दूर संचार कंपनियों की ओर से रोड़े अटकाना बेमानी है।
वहीं एप कालिंग पर रोक लगाने की मांग करने वाले संगठन सीओएआई का कहना है कि अरबों रुपये खर्च करके स्पेक्ट्रम खरीदने वाले मोबाइल आपरेटर्स को नए नियम से तगड़ी चपत लग रही है। इससे परेशान होकर सेल्युलर आपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के अध्यक्ष ने दूरसंचार सचिव को पत्र लिखकर कहा है कि कालिंग एप्लीकेशन इंटरनेट काल को नेटवर्कों से जोड़कर मोबाइल एवं लैंडलाइन नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। वैसे इस बारे में प्रो.भूटानी कहते हैं, यूजर को क्लाउड एवं पीसीए जैसी सुविधाएं नि:शुल्क मिली हुई हैं। क्लाउड के जरिए यूजर अपना पूरा डाटा अपलोड कर सकते हैं। एक नेटवर्क से दूसरे पर एप कालिंग करते समय काल करने वाले और रीसिव करने वाले दोनो के एकाउंट से डाउनलोड और अपलोड का डाटा खर्च होता है। इसमें खर्च होने वाला डाटा बहुत कम होता, ऐसे में उपभोक्ता लगभग मुफ्त में अपनी काल पूरी कर लेता है। मोबाइल कंपनियों के दबाव में आकर चीन में एप कालिंग पर रोक लगाने की कोशिश की गई थी, परंतु उनको अपनी रोक हटानी पड़ी।
व्हाट्स एप के जरिए मिली फ्री कालिंग की सुविधा से अब तमाम लोगों को लंदन, न्यूयार्क में बैठे अपने मित्रों एवं सगे संबंधियों से संपर्क बनाना आसान हो गया है। इस सुविधा से देश और विदेश में दूर-दराज रहने वाले मित्रों से आसानी से संपर्क कर लेते हैं। इससे ग्राहक मोबाइल कंपनियों के जाल से बाहर निकल गए हैं। कंपनियां मनमाने तरीके से पैसे वसूल नहीं कर पा रही हैं। इससे उनकी परेशानी बढ़ी है।
0 डॉ.लक्ष्मण चतुर्वेदी
कामकाजी महिलाओं एवं लड़कियों के लिए व्हाट्स ऐप के जरिए मिली मुफ्त कालिंग की नई सुविधा दूर देश में बैठे अपने सगे संबंधियों एवं देश के कोने-कोने में रहने वालों से संपर्क में रहने का अच्छा तरीका है। इसके जरिए कम पैसे में एप कालिंग से बात करने की सुविधा मिलने पर मोबाइल कंपनियां परेशान हैं। आखिर इससे मोबाइल कंपनियों को मनमानी की छूट नहीं मिल रही है। यह सुविधा नि:शुल्क है तो आखिर उपभोक्ता मोबाइल कंपनियों के मंहगे प्लान में क्यों फंसें।
0 सारिका त्रिवेदी, शिक्षिका