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सीएजी रिपोर्ट : कुंभ में मोपेड और मोटरसाइकिल से हुआ जमीन का समतलीकरण
Wed, 25 Aug 2021 06:58 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 25 Aug 2021 06:58 PM IST
सार
जमीन समतलीकरण के लिए सैकड़ों वाहनों का इस्तेमाल हुआ था। एजी ऑफिस की टीम ने इनमें से 32 ट्रैक्टरों के दस्तावेजों की क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से जांच कराई। जांच में पाया गया कि 32 में से चार ट्रेक्टरों के पंजीकरण नंबर एक मोपेड, दो मोटरसाइकिल तथा एक कार के थे।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कुंभ के मद्देनजर हुए स्थाई और अस्थाई कार्यों में कई तरह की अनियमितताएं हुई हैं। कार्यदायी संस्थाओं ने संगम क्षेत्र में जमीन समतलीकरण के काम में टै्रक्टर के बजाय मोपेड और मोटरसाइकिल का इस्तेमाल किया है। भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। खास यह कि इस गड़बड़ी की अनदेखी करके भुगतान भी कर दिया गया। जबकि, हर कार्य की जांच के लिए थर्ड पार्टी एजेंसी भी हायर की गई थी।
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जमीन समतलीकरण के लिए सैकड़ों वाहनों का इस्तेमाल हुआ था। एजी ऑफिस की टीम ने इनमें से 32 ट्रैक्टरों के दस्तावेजों की क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय से जांच कराई। जांच में पाया गया कि 32 में से चार ट्रेक्टरों के पंजीकरण नंबर एक मोपेड, दो मोटरसाइकिल तथा एक कार के थे। इस पर सीएजी की रिपोर्ट में आपत्ति उठाई गई है। हालांकि अफसरों का जवाब था कि त्रुटिवश ऐसा हो गया।
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बिना जरूरत खरीदे गए 13.27 करोड़ में 40 कम्पैक्टर
एजी ऑफिस की ऑडिट में पाया गया कि कुंभ क्षेत्र तथा शहर से ठोस कचरा हटाने के लिए जरूरत से अधिक कम्पैक्टर खरीद लिए गए। नगर निगम ने 40 कम्पैक्टर की खरीद की थी। इनके अलावा 15 कम्पैक्टर कुंभ मेला क्षेत्र से बंसवार प्लांट तक कचरा पहुंचाने के लिए आए थे। जबकि, ऑडिट में पाया गया कि 10 कम्पैक्टर की ही जरूरत थी। 13.27 करोड़ रुपये से खरीदे गए 40 कम्पैक्टर का बहुत कम उपयोग हुआ। इतना ही नहीं ऑडिट में पाया गया कि विभिन्न तिथियों में पांच कम्पैक्टर से कचरा बसवार तक पहुंचाया ही नहीं गया। जबकि, लॉग बुक में इंट्री थी। इन बिंदुओं पर सीएजी की रिपोर्ट में गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
नहीं हुई ईपीएफ की कटौती
नियमानुसार किसी प्रतिष्ठान में 20 या इससे अधिक कर्मचारी होने पर कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत कटौती आवश्यक है। इसके तहत 25 फीसदी कटौती की जाती है जिसमें से 12 प्रतिशत कर्मचारी तथा 13 फीसदी नियोक्त का अशंदान होता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग ने कुंभ मेला के दौरान सफाई कार्यों के लिए अस्थाई आधार पर 9483 श्रमिकों की नियुक्ति की थी लेकिन कर्मचारी भविष्य संगठन में किसी का अंशदान जमा नहीं किया गया। एजी ऑफिस की टीम इस मामले में अफसरों के जवाब को भी संतोषजनक नहीं पाया।
एजी ऑफिस की ऑडिट में पाया गया कि कुंभ क्षेत्र तथा शहर से ठोस कचरा हटाने के लिए जरूरत से अधिक कम्पैक्टर खरीद लिए गए। नगर निगम ने 40 कम्पैक्टर की खरीद की थी। इनके अलावा 15 कम्पैक्टर कुंभ मेला क्षेत्र से बंसवार प्लांट तक कचरा पहुंचाने के लिए आए थे। जबकि, ऑडिट में पाया गया कि 10 कम्पैक्टर की ही जरूरत थी। 13.27 करोड़ रुपये से खरीदे गए 40 कम्पैक्टर का बहुत कम उपयोग हुआ। इतना ही नहीं ऑडिट में पाया गया कि विभिन्न तिथियों में पांच कम्पैक्टर से कचरा बसवार तक पहुंचाया ही नहीं गया। जबकि, लॉग बुक में इंट्री थी। इन बिंदुओं पर सीएजी की रिपोर्ट में गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है।
नहीं हुई ईपीएफ की कटौती
नियमानुसार किसी प्रतिष्ठान में 20 या इससे अधिक कर्मचारी होने पर कर्मचारी भविष्य निधि योजना के तहत कटौती आवश्यक है। इसके तहत 25 फीसदी कटौती की जाती है जिसमें से 12 प्रतिशत कर्मचारी तथा 13 फीसदी नियोक्त का अशंदान होता है। इसके विपरीत स्वास्थ्य विभाग ने कुंभ मेला के दौरान सफाई कार्यों के लिए अस्थाई आधार पर 9483 श्रमिकों की नियुक्ति की थी लेकिन कर्मचारी भविष्य संगठन में किसी का अंशदान जमा नहीं किया गया। एजी ऑफिस की टीम इस मामले में अफसरों के जवाब को भी संतोषजनक नहीं पाया।