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बीएसए सरकार का कर्मचारी अलग राय नहीं रख सकता

Thu, 25 Jul 2019 09:54 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 25 Jul 2019 09:54 PM IST
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bsa is government servent, can not put their own view: HC
बीएसए सरकारी कर्मचारी, नहीं रख सकता अलग नजरिया
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प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी सरकार का कर्मचारी होता है। वह सरकार से अलग नजरिया नहीं रख सकता है। कोर्ट ने इस मामले में प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा, प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज से जवाब मांगा है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि अनिवार्य शिक्षा कानून के तहत आने वाले बच्चों को शिक्षा देने से इंकार कैसे किया जा सकता है। कोर्ट ने सभी पक्षकारों से छह अगस्त तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए कहा है।
निजी शिक्षण संस्थाओं में 25 प्रतिशत गरीब तबके के छात्रों को प्रवेश के मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के वकील और सरकार के वकील द्वारा अलग-अलग बयान देने पर कोर्ट ने कहा कि बीएसए के वकील, जिलाधिकारी के आदेश से स्वयं को अलग कैसे कर सकते हैं जबकि, बीएसए सरकार का कर्मचारी है। बेसिक शिक्षा विभाग का अलग अधिवक्ता पैनल होने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो रही है।
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कर्तिक और अन्य की याचिका सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अजय भनोट का कहना था कि संविधान के अनुच्छेद 21 ए के तहत छह से 14 साल के बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा का मूल अधिकार दिया गया है। इसे लागू करने का दायित्व राज्य सरकार का है। इस दायित्व को निभाने की जिम्मेदारी बेसिक शिक्षा अधिकारी की है। वह इससे स्वयं को अलग नहीं कर सकता। वह बेसिक शिक्षा परिषद का एजेंट नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि सरकार का पक्ष रखने के लिए एलआर मैनुअल के तहत वकीलों की नियुक्ति की जाती है। परिषद या कोई संस्था अपना वकील रख सकती है। सरकार अपना दायित्व परिषद पर शिफ्ट नहीं कर सकती और परिषद का वकील बेसिक शिक्षा अधिकारी की तरफ से सरकार से अलग पक्ष नहीं रख सकता। वह सरकार का अधिकारी है और सरकार के लिए कार्य करता है। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव से पूछा है कि किस अधिकार से उसने सरकारी अधिकारी का पक्ष रखने के लिए अपना वकील रखा है। कोर्ट का मानना है कि सरकारी वकील को ही बीएसए का भी पक्ष रखना चाहिए। जबकि उसका पक्ष बेसिक शिक्षा परिषद के पैनल में शामिल वकील रखते हैं इसलिए सरकार और बीएसए की ओर से विरोधाभासी तथ्य सामने आते हैं।
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