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खंड शिक्षा अधिकारी भर्ती : आरक्षण में अनियमितता पर जवाब तलब
Wed, 17 Feb 2021 08:56 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 17 Feb 2021 08:56 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खंड शिक्षा अधिकारी भर्ती में आरक्षण लागू करने में अनियमितता को लेकर दाखिल याचिका पर प्रदेश सरकार से व आयोग से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने याचीगण को भर्ती परीक्षा में चयनित हो चुके अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाने की छूट दी है।
अशोक कुमार सिंह व अन्य पिछड़ा वर्ग के अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाख़िल याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट ने सुनवाई की। याचिका में भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण लागू करने में व्यापक अनियमितता का आरोप लगाया गया है। साथ ही 30 जनवरी 2021 को जारी चयन सूची रद्द करने की मांग की गई है। अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद, राजेंद्र सिंह यादव व अंकिता सिंह के अनुसार 13 दिसंबर 2019 को बीईओ के 309 पदों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया।
विज्ञापन की धारा सात में चयन प्रक्रिया में आरक्षण कानून का पालन करने की बात कही गई। छह दिसंबर 2020 को मुख्य परीक्षा में 4182 अभ्यर्थियों ने भाग लिया और 30 जनवरी 2021 को चयन सूची जारी कर दी गई लेकिन इस चयन सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग के केवल 31 अभ्यर्थियों को रखा गया है जबकि 309 पदों के सापेक्ष 27 प्रतिशत के हिसाब से 83 ओबीसी अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
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कहा गया कि इस प्रकार 30 जनवरी 2021 को जारी चयन सूची इस भर्ती के विज्ञापन की धारा सात के विपरीत है। पक्षकारों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने चार सप्ताह में आयोग को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही याचीगण से कहा है कि वह इस दौरान चयनित अभ्यर्थियों को भी याचिका में पक्षकार बनाएं।
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अशोक कुमार सिंह व अन्य पिछड़ा वर्ग के अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दाख़िल याचिका पर न्यायमूर्ति अजय भनोट ने सुनवाई की। याचिका में भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण लागू करने में व्यापक अनियमितता का आरोप लगाया गया है। साथ ही 30 जनवरी 2021 को जारी चयन सूची रद्द करने की मांग की गई है। अधिवक्ता मुस्तकीम अहमद, राजेंद्र सिंह यादव व अंकिता सिंह के अनुसार 13 दिसंबर 2019 को बीईओ के 309 पदों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया।
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विज्ञापन की धारा सात में चयन प्रक्रिया में आरक्षण कानून का पालन करने की बात कही गई। छह दिसंबर 2020 को मुख्य परीक्षा में 4182 अभ्यर्थियों ने भाग लिया और 30 जनवरी 2021 को चयन सूची जारी कर दी गई लेकिन इस चयन सूची में अन्य पिछड़ा वर्ग के केवल 31 अभ्यर्थियों को रखा गया है जबकि 309 पदों के सापेक्ष 27 प्रतिशत के हिसाब से 83 ओबीसी अभ्यर्थियों को चयन सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
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कहा गया कि इस प्रकार 30 जनवरी 2021 को जारी चयन सूची इस भर्ती के विज्ञापन की धारा सात के विपरीत है। पक्षकारों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने चार सप्ताह में आयोग को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही याचीगण से कहा है कि वह इस दौरान चयनित अभ्यर्थियों को भी याचिका में पक्षकार बनाएं।