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पानी संकट से जूझ रहे हैं काले हिरन
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लॉक डाउन में पानी के संकट से काले हिरण जूझ रहे हैं। वे पानी को लेकर बस्ती में भी घुस जा रहे हैं। चांद खमनिया में छोटे-छोटे बनाए गए तालाब भी सूखे पड़े हैं। ग्रामीण कई दफे इसकी शिकायत वन विभाग के अफसरों से कर चुके हैं लेकिन किसी ने समस्या गंभीरता से नहीं लिया।
बता दें कि मेजा के दक्षिणांचल में स्थित चांद खमनिया के जंगल में काफी संख्या में काले हिरण हैं। काले हिरणों के पानी की व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर हुई तो चांद खमनिया में पानी के लिए विभाग द्वारा छोटे-छोटे तालाब बनाए गए हैं। लेकिन विभागीय लापरवाही से पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब में पानी भरा ही नहीं जा रहा है। जिससे काले हिरनों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई है। चांद खमनिया की प्रधान अंजू देवी ने बताया कि तालाब में पानी न छोड़े जाने से काले हिरनों के सामने पानी की समस्या महीनों से है। मौके पर कोई भी वन कर्मी नहीं रहता है। इसकी शिकायत कई दफे वन क्षेत्राधिकारी से की गई लेकिन कुछ नहीं किया गया। तालाब सूखे पड़े हैं। प्रधान का यह भी कहना है कि पानी की खोज में काले हिरन दूसरे गांव में चले जा रहे हैं। गौरतलब हो कि चांद खमनिया के जंगल में करीब पांच सौ से अधिक काले हिरन झुंड बनाकर रहते थे लेकिन पानी की समस्या से वे इधर-उधर भाग रहे हैं। चांद खमनिया के समाजसेवी नारायण पाण्डेय ने भी वन विभाग के कर्मियों की लापरवाही को लेकर क्षोभ जताया है।
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बता दें कि मेजा के दक्षिणांचल में स्थित चांद खमनिया के जंगल में काफी संख्या में काले हिरण हैं। काले हिरणों के पानी की व्यवस्था को लेकर सरकार गंभीर हुई तो चांद खमनिया में पानी के लिए विभाग द्वारा छोटे-छोटे तालाब बनाए गए हैं। लेकिन विभागीय लापरवाही से पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि तालाब में पानी भरा ही नहीं जा रहा है। जिससे काले हिरनों के सामने पानी की समस्या खड़ी हो गई है। चांद खमनिया की प्रधान अंजू देवी ने बताया कि तालाब में पानी न छोड़े जाने से काले हिरनों के सामने पानी की समस्या महीनों से है। मौके पर कोई भी वन कर्मी नहीं रहता है। इसकी शिकायत कई दफे वन क्षेत्राधिकारी से की गई लेकिन कुछ नहीं किया गया। तालाब सूखे पड़े हैं। प्रधान का यह भी कहना है कि पानी की खोज में काले हिरन दूसरे गांव में चले जा रहे हैं। गौरतलब हो कि चांद खमनिया के जंगल में करीब पांच सौ से अधिक काले हिरन झुंड बनाकर रहते थे लेकिन पानी की समस्या से वे इधर-उधर भाग रहे हैं। चांद खमनिया के समाजसेवी नारायण पाण्डेय ने भी वन विभाग के कर्मियों की लापरवाही को लेकर क्षोभ जताया है।
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